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कला व संस्कृति
छतीसगढ़ सच 31/07/2021 :10:24
जनप्रतिनिधियों के लिए उदाहरण है सुदरपुरा को सुंदर बनाने की मुहिम
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हम आपको ले चल रहे हैं अरावली पहाड़ियों के बीच बसे गांव सुदरपुरा। वैसे तो कई मायनों में ये गांव भारत के अन्य गांव की तरह ही है। पर जब यहां का एक नौजवान मैं से निकल कर हम और हमारे का भाव लेकर एक सपना साकार करने के लिए चल पड़ता है तो सुदरपुरा जैसे गांव नज़ीर बन जाते हैं। नौजवानों के लिए और खासकर उन लोगो के लिए जो समाज के प्रति अपनी जवाबदेही समझते हैं।

कोटपुतली, (अंजना शर्मा)। हम आपको ले चल रहे हैं अरावली पहाड़ियों के बीच बसे गांव सुदरपुरा। वैसे तो कई मायनों में ये गांव भारत के अन्य गांव की तरह ही है। पर जब यहां का एक नौजवान मैं से निकल कर हम और हमारे का भाव लेकर एक सपना साकार करने के लिए चल पड़ता है तो सुदरपुरा जैसे गांव नज़ीर बन जाते हैं। नौजवानों के लिए और खासकर उन लोगो के लिए जो समाज के प्रति अपनी जवाबदेही समझते हैं। 

कुछ समय पहले तक ये गांव पानी की कमी , बेरोज़गारी और मूलभूत आवश्यकताओं की कमी से जूझ रहा था। लेकिन विष्णु मित्तल ने गांव के हर दर्द और परेशानी को महसूस किया। आखिर क्यों न समझते इसी गांव की मिट्टी में पल बढ़कर संघर्ष करते हुए वे दिल्ली पहुंचे और एक मुकाम हासिल किया। विष्णु मित्तल अब चाहते हैं कि जो कमी उन्होंने महसूस की वो आने वाली पीढ़ी को महसूस न हो। जो परेशानियां उन्होंने झेली वो आने वाली पीढ़ी को न झेलनी पड़े। 

चुनौती को अवसर में बदलने का जज्बा लिए मित्तल गांव के नौजवानों को भी आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। उनकी मंशा पूरे गांव को मॉडल गांव में तब्दील करने की है। इस मुहिम में गांव की विरासत और पुरानी अच्छी परंपराओं को भी सुरक्षित रखने का बीड़ा उन्होंने उठाया है। किसानों की आय बढ़ाने, गांव की बावड़ी,कुओं को जलमय बनाने और भूख मिटाने की उनकी बहुआयामी सेवा का केंद्र उनका गांव ही नही बल्कि पूरा कोटपुतली बन रहा है। 

गांव की समस्याओं को दूर करने का संकल्प विष्णु मित्तल के नेतृत्व में बने 'आओ साथ चले' संस्था ने जताया, तो जैसे यहां की तक़दीर ही बदल गई। 
करीब एक दशक से सूखे पड़े तालाब , बाबड़ी, कुंए एक बार फिर पुनर्जीवित होकर अपनी पुरानी लय में लौट रहे हैं।संस्था के राष्ट्रीय संयोजक विष्णु मित्तल ने 'दिल्ली खबर' से खास बातचीत में बताया कि हमारा मकसद गांव के लोगो को आत्मनिर्भर बनाना है।

अब तक संस्था द्वारा 6 जलाशयों को पुनर्जीवित करने का काम लगभग पूरा हो चुका है आने वाले समय मे 12 अन्य को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारी कोशिश है कि गांव में एक ऐसा जल तंत्र विकसित किया जाए जो सालभर गांव वासियों की जरूरत को पूरा कर सके। किसानों को औषधीय खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यहाँ की जलवायु और उवर्रक क्षमता औषधीय खेती के अनुकूल है। 

इसके अलावा संस्था गांव की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता पैदा कर रही है। इनके लिए 100 महिलाओं के 10 समूह तैयार किये गए है। जो गॉव में रहकर महिलाओ को सरकारी योजनाओं की जानकारी दे रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओ को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

सपना सच किया जा सकता है अगर आप संकल्प के साथ उसे पूरा करने के लिये आगे बढ़े। यही दृष्टि विष्णु मित्तल की है और गांव के लिये उनका हर सपना पूरा होता नजर आ रहा है। सच मानिए तो सुदरपुरा की सुंदर तस्वीर कई चुने हुए जनप्रतिनिधियों के लिए भी उदाहरण है। उन्हें यहां का भ्रमण कर अपने गांव-घर की सेहत सुधारने का प्रयास जरूर करना चाहिए।





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