छत्तीसगढ़ में धान खरीदी: भरोसे, सम्मान, आत्मनिर्भरता की सशक्त कहानी

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छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में राज्य की धान खरीदी व्यवस्था ने किसानों के जीवन में एक नया भरोसा जगाया है। यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक सफलता कहानी बनकर उभरी है। गौरतलब है कि राज्य की पहचान धान के कटोरे के रूप में रही है और यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। जिला जनसंपर्क अधिकारी ने सोमवार को बताया कि इस वर्ष धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को पहले से कहीं बेहतर व्यवस्थाएं देखने को मिलीं। टोकन प्रणाली के माध्यम से किसानों को निर्धारित समय पर धान बेचने का अवसर मिला, जिससे उन्हें घंटों कतार में खड़े रहने या अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ा। उपार्जन केंद्रों पर छांव, पेयजल और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं ने यह एहसास कराया कि व्यवस्था किसान के लिए है।

इलेक्ट्रॉनिक कांटे से सटीक तौल ने पारदर्शिता बढ़ाई और किसानों का भरोसा मजबूत किया। उन्होंने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बदलाव समय पर भुगतान के रूप में सामने आया। धान विक्रय के कुछ ही दिनों में राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंची। मोबाइल पर आया बैंक संदेश किसानों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। इससे बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और अगली फसल की तैयारी को लेकर उनकी चिंता काफी हद तक कम हुई। साहूकारों पर नर्भिरता घटी और आत्मनर्भिरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ा। विज्ञप्ति में कहा कि प्रशासन की संवेदनशीलता भी इस सफलता की अहम वजह रही।

अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण, अवैध धान परिवहन और बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई से किसानों के अधिकार सुरक्षित हुए। कर्मचारियों का सहयोगात्मक व्यवहार और त्वरित समस्या समाधान ने किसान और व्यवस्था के बीच विश्वास को और गहरा किया। धान खरीदी की यह व्यवस्था आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों में लौटती रौनक, किसानों के चेहरों पर संतोष और भवष्यि को लेकर बढ़े आत्मविश्वास की कहानी है। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी आज एक ऐसी परंपरा बन रही है, जहां किसान केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सम्मानित भागीदार है।