छत्तीसगढ़ में प्रदर्शन के दौरान महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ने का वीडियो सामने आया; दो गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में खनन विरोधी प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक महिला आरक्षक पर हमला करने और उसके कपड़े फाड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा है। पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस घटना के संबंध में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना 27 दिसंबर को तमनार ब्लॉक में हुई, जब कोयला खनन परियोजना के खिलाफ 14 गांवों के निवासियों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिंसा के दौरान महिला आरक्षक भीड़ के बीच एक खेत में अकेली रह गई, जहां उस पर हमला किया गया।

बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में आरक्षक जमीन पर लेटी हुई, रोती हुई और दया की भीख मांगती हुई दिख रही है, जबकि दो आदमी उसके कपड़े फाड़ रहे हैं और उससे विरोध स्थल पर उसकी मौजूदगी के बारे में सवाल कर रहे हैं। महिला आरक्षक को लगातार हाथ जोड़कर रोते हुए और बार-बार उनसे उसे जाने देने का अनुरोध करते हुए सुना जा सकता है। वह कह रही है, “भाई, मत फाड़ो। मैं कुछ नहीं करूंगी। मैंने किसी को नहीं मारा।” आरोपियों में से एक को उसके फटे हुए कपड़े खींचते हुए देखा जा सकता है, जबकि दूसरा वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। बाद में वह चप्पल पकड़ कर उसे धमका रहा था और उस पर चिल्ला रहा था।

बिलासपुर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक संजीव शुक्ला ने बताया कि महिला आरक्षक के साथ मारपीट करने और कथित तौर पर छेड़छाड़ करने के आरोप में दोनों स्थानीय निवासियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके बयानों और डिजिटल सबूतों के आधार पर, घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। शुक्ला ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ छेड़छाड़, हत्या के प्रयास, लूट तथा अन्य अपराधों के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की जांच जारी है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने शुक्रवार को धुंधला वीडियो फेसबुक पर शेयर किया। वहीं पोस्ट में लिखा गया है, ”छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में महिला सिपाही से बदसलूकी और उसके कपड़े फाड़ने का वीडियो बेहद भयावह है। जब महिला पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं तो आम नागरिकों का क्या होगा?

साफ़ है कि डबल इंजन की भाजपा सरकार महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह विफल है।” इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इसे भयावह और शर्मनाक बताया और कहा कि सरकार को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि पुलिस और प्रशासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा क्यों बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोग सिस्टम पर से भरोसा खो रहे हैं। रायगढ़ जिले के तमनार इलाके में कोयला खनन परियोजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने 27 दिसंबर को कथित तौर पर पत्थरबाजी की और एक पुलिस बस, एक जीप और एक एम्बुलेंस में आग लगा दी, साथ ही कई दूसरी सरकारी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया। ग्रामीण 12 दिसंबर से जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित प्रस्तावित गारे पेलमा सेक्टर-एक कोयला ब्लॉक के लिए हुई जनसुनवाई को रद्द करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित तौर पर पत्थरबाजी करने के बाद दो अधिकारियों सहित कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

प्रदर्शनकारियों ने लिब्रा गांव के पास जिंदल पावर लिमिटेड के कोल हैंडलिंग प्लांट पर भी धावा बोल दिया और एक कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आग लगा दी, जबकि ऑफिस परिसर में तोड़फोड़ की। ग्रामीणों ने दावा किया कि पुलिस द्वारा प्रदर्शन स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हिंसा के दौरान, महिलाओं के एक समूह ने कथित तौर पर तमनार पुलिस थाना की प्रभारी कमला पुसाम पर हमला किया, जिससे उन्हें चोटें आईं। हिंसा के एक दिन बाद, रायगढ़ प्रशासन ने कहा कि उसने परियोजना के लिए हुई जनसुनवाई को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।