झीरम घाटी बयान विवाद में कांग्रेस नेता तिवारी पर कड़ी कार्रवाई, सांसद प्रतिनिधि पद से भी हटाए गए

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छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेता विकास तिवारी के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। झीरम घाटी नक्सल हमले को लेकर पार्टी की आधिकारिक राय से इतर दिए गए बयानों के कारण कांग्रेस ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया है। मंगलवार को उस वक्त यह जानकारी सामने आयी जब सोशल मीडिया में उन्हें हटाने का आधिकारिक पत्र सामने आया। दरअसल अब ताजा कार्रवाई में उन्हें राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन के सांसद प्रतिनिधि पद से हटा दिया गया है। इससे पहले पार्टी नेतृत्व ने अनुशासनहीनता के आरोप में तिवारी को कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पद से मुक्त किया था। इसके बाद उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया था।

दरअसल, तिवारी ने झीरम घाटी नक्सल कांड को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं के नार्को टेस्ट कराए जाने की मांग की थी। इस संबंध में उन्होंने न्यायिक जांच आयोग को पत्र भी भेजा था। पार्टी नेतृत्व ने इस कदम को संगठनात्मक मर्यादा के विरुद्ध मानते हुए गंभीर अनुशासनहीनता करार दिया। कांग्रेस का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं के नाम सार्वजनिक रूप से जोड़कर मीडिया में इस तरह के बयान देना पार्टी की नीति और अनुशासन के खिलाफ है।

इसी आधार पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और निर्धारित समय में स्पष्टीकरण संतोषजनक न पाए जाने पर संगठनात्मक कार्रवाई की गई। अब सांसद प्रतिनिधि पद से हटाए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में किसी भी तरह की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है।