छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने धान खरीदी की समस्याओं और मनरेगा के मुद्दे पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय की है। पार्टी की ‘मनरेगा बचाओ समन्वय समिति’ की बैठक में 30 जनवरी को प्रदेशव्यापी चक्का जाम और 31 जनवरी से 7 फरवरी तक सभी जिला कलेक्ट्रेट पर घेराव प्रदर्शन करने का फैसला किया गया है। राजीव भवन में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने की। इसमें नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू और ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान के समन्वयक उमेश पटेल सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में दो प्रमुख मुद्दों पर जोरदार आक्रामक रुख अपनाने का निर्णय लिया गया। पहला, धान खरीदी प्रक्रिया में व्याप्त अव्यवस्था और किसानों की परेशानी।
पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी है, लेकिन दस दिन पहले से ही टोकन जारी करना बंद कर दिया गया है। जिन किसानों के टोकन कटे भी हैं, उनका धान खरीदा नहीं जा रहा है। संग्रहण केंद्रों पर उठाव न होने से तौलाई का काम ठप पड़ा है। पार्टी का कहना है कि कई किसानों का एक बार भी टोकन नहीं कटा है और अब उनके पास धान बेचने के लिए सिर्फ तीन दिन बचे हैं। इसी के विरोध में 30 जनवरी को प्रदेशभर में चक्का जाम किया जाएगा। दूसरा बड़ा मुद्दा मनरेगा योजना को लेकर है। पार्टी ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत जिला, ब्लॉक व मंडल स्तर पर चल रहे आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया।
इसके तहत 31 जनवरी से 7 फरवरी तक सभी जिला कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में इस आंदोलन को और प्रभावी व जनहितकारी बनाने के लिए रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार की दुर्भावना के कारण किसानों की समस्याएं बनी हुई हैं। पार्टी प्रभावित किसानों के साथ खड़ी है और उनकी मांगों के समर्थन में आंदोलन को तेज करेगी। इस बैठक में पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता और प्रभारी भी मौजूद रहे।





