छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने धान खरीद की तारीख बढ़ाने की मांग की

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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने गुरुवार को प्रदेश सरकार से धान खरीदी की समय सीमा कम से कम एक महीने बढ़ाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मात्र पांच कार्यदिवस शेष रहने के कारण लाखों किसानों के धान खरीद से वंचित रहने का खतरा है। बैज ने आज आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार द्वारा घोषित 31 जनवरी की अंतिम तिथि में 24, 25, 26 और 31 जनवरी की छुट्टियों को मिलाकर केवल पांच दिन ही खरीदी के लिए बचे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 5.5 लाख किसान धान नहीं बेच पाए हैं और 4.7 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन भी अटका हुआ है। उन्होंने धान खरीदी के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि 165 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले अभी तक केवल 115 लाख मीट्रिक टन धान ही खरीदा गया है।

पांच दिनों में शेष 50 लाख टन की खरीदी लगभग असंभव है। उन्होंने सरकार से ऑनलाइन टोकन काटने की प्रक्रिया फिर से शुरू करने और सभी सहकारी समितियों में ऑफलाइन टोकन देना प्रारंभ करने की भी मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने धान खरीदी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उनका आरोप है कि पिछले वर्ष के लगभग 25.93 लाख क्विंटल धान का मिलिंग नहीं करवाया गया और अब उसे धीरे-धीरे नष्ट होना बताकर घोटाला किया जा रहा है। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में एक लाख क्विंटल से अधिक धान के सड़ जाने का मामला भी उठाया।

बैज ने भुगतान को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने 2023 में 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर धान खरीदने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी को जोड़कर पूरा भुगतान नहीं कर रही है, जिससे किसानों को लगभग 6500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। उन्होंने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी इसके विरोध में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चला रही है। उन्होंने जमीनों की गाइडलाइन दरों पर सरकार के अनिर्णय से उत्पन्न समस्याओं और प्रयागराज में शंकराचार्य के साथ हुए दुर्व्यवहार की भी निंदा की।