पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी को लेकर सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री तथा पाटन के विधायक भूपेश बघेल ने राज्य सरकार से खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए हुई धान खरीदी से संबंधित महत्वपूर्ण सवालों और आशंकाओं का स्पष्टीकरण मांगा है। धान खरीदी की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद, उन्होंने किसानों, विशेष रूप से ऋणग्रस्त किसानों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को लेकर चिंता जताई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आज (मंगलवार) अपने शासकीय आवास में एक प्रेस वार्ता लेकर लिखे गए पत्र के तथ्यों के बारे पत्रकारों को बताया। बघेल ने राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र में धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए नौ बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी और स्पष्टीकरण का अनुरोध किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस वर्ष के धान खरीदी लक्ष्य, प्राप्त लक्ष्य का प्रतिशत, पंजीकृत किसानों की संख्या, टोकन काटे गए किसानों का आंकड़ा और वे किसान जो पंजीयन के बावजूद धान नहीं बेच पाए, के बारे में जानकारी मांगी है। उन्होंने विशेष रूप से ऋणी किसानों की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। बघेल ने पूछा है कि कुल पंजीकृत ऋणी किसानों में से कितनों का धान पूरी तरह खरीदा गया और जिनका धान नहीं खरीदा जा सका, वे अपने अल्पकालिक कृषि ऋण की अदायगी कैसे करेंगे। उन्होंने अब तक किए गए भुगतान और लंबित राशि का ब्यौरा भी मांगा है। पत्र में ‘एग्रीस्टेक’ पोर्टल की तकनीकी खामियों का जिक्र करते हुए पूछा गया है कि जिन हजारों किसानों का रकबा शून्य या कम दिखाया गया और वे धान नहीं बेच पाए, उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई कैसे की जाएगी।

साथ ही, यह भी पूछा गया है कि क्या अब शासन उन किसानों के हित में खरीदी की अवधि बढ़ाने का विचार कर रहा है, जो टोकन होने के बावजूद धान नहीं बेच पाए हैं। भूपेश बघेल ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि अन्नदाता के पसीने की कीमत और उसके स्वाभिमान की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार किसानों के व्यापक हित में सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि कोई भी किसान आर्थिक क्षति या ऋण के बोझ से परेशान ना हो।