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पुलिस जवानों की निष्ठा और अनुशासन से ही राज्य में शांति, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण संभव: सीएम साय

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को कहा कि पुलिस जवानों की निष्ठा और अनुशासन से ही राज्य में शांति, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण संभव हो पाता है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री साय आज रायपुर के माना स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की चौथी वाहिनी के प्रांगण में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित परेड कार्यक्रम में शामिल हुए। राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों की ओर से पुलिस के शहीद वीर जवानों को नमन किया तथा शहीद स्मारक में पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिस अधिकारियों और जवानों के परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदना व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने परिजनों को शाल, श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह भेंट किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 21 अक्टूबर को हम देश की सुरक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस बल के जवानों का पुण्य स्मरण करते हैं। पुलिस और सुरक्षा बल कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच चौबीसों घंटे समाज की सुरक्षा में तत्पर रहते हैं। पुलिस जवानों की निष्ठा और अनुशासन से ही राज्य में शांति, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण निर्मित होना संभव हो पाता है। साय ने कहा, ”यह दिवस न केवल उन जवानों के पराक्रम का स्मरण कराने का अवसर है, बल्कि उनके परिजनों के त्याग को भी श्रद्धापूर्वक नमन करने का अवसर है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध सुरक्षा बलों ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया है और अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य हो रहे है। नियद नेल्ला नार, पीएम जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाओं से सुदूर अंचल के गांवों की तस्वीर बदल रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के उन्मूलन की लड़ाई और तेज हुई है तथा राज्य सरकार मार्च 2026 तक इसके पूर्ण उन्मूलन के संकल्प के साथ दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने अमर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनका बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा और हमें कर्तव्य, अनुशासन एवं समर्पण की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। वहीं राज्यपाल डेका ने पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हुए पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पुलिस के अदम्य साहस, पराक्रम और त्याग को देश सदैव नमन करता रहेगा।

उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने दृढ़ संकल्प, साहस और निष्ठा के साथ नक्सलवाद की चुनौती का मुकाबला किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज इन क्षेत्रों में शांति और विश्वास का वातावरण सशक्त हुआ है। उन्होंने आशा जताई कि आने वाले समय में राज्य नक्सल समस्या से पूर्णतः मुक्त होगा। अधिकारियों ने बताया कि इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस जवान और शहीद जवानों के परिजन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों के बढ़ते प्रभाव के बीच, माओवादी नेता ने कैडर से हथियार छोड़ने का किया आग्रह

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छत्तीसगढ़ में शीर्ष माओवादी नेताओं सहित बड़ी संख्या में माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद, प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के एक प्रमुख नेता ने अपने साथियों से हथियार छोड़कर सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने की अपील की है। उदंती एरिया कमेटी के माओवादी नेता सुनील के नाम से जारी एक पृष्ठ के पत्र में ‘कामरेड साथियों’ को संबोधित करते हुए माओवादी कैडर से ”देर होने से पहले सावधानीपूर्वक सोचने और सही निर्णय लेने” का आग्रह किया गया है। गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए सभी सक्रिय माओवादी कैडर से मुख्यधारा में लौटने और शांतिपूर्ण जीवन जीने की अपील की है।

उदंती एरिया कमेटी, गरियाबंद के कुछ हिस्सों और छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से सटे क्षेत्रों में सक्रिय है। कथित माओवादी नेता द्वारा जारी पत्र में लिखा गया, ”आप सब कामरेड्स कैसे हो, मेरे हिसाब से आप अच्छे होंगे। कामरेड, आप सभी से अपील है कि 16 अक्टूबर 2025 को सोनू दादा (मलोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति) ने महाराष्ट्र में 61 कामरेड के साथ हथियार त्याग कर सशस्त्र आंदोलन को विराम दिया है। और 17 अक्टूबर 2025 को बस्तर में रूपेश दादा उर्फ सतीश दादा ने 210 साथियों सहित आत्मसमर्पण किया। इन सभी कामरेड्स ने सरकार को अपने हथियार सौंप दिए हैं।

सोनू दादा ने एक बुकलेट में लिखा, ”वर्तमान परिस्थितियों में सशस्त्र आंदोलन मुश्किल हो गया है। सुरक्षा बलों का दबाव बहुत बढ़ गया है। जिस तरह से क्रांति को चलाना था, वह नहीं हो पाया। सीसी (केंद्रीय समिति) सही समय पर निर्णय नहीं ले सकी—यह एक बड़ी भूल रही है।” इसमें लिखा, ”इसलिए, हम सभी को अब हथियारबंद संघर्ष को विराम देकर जन आंदोलनों के साथ मिलकर जनता की समस्याओं को हल करने का प्रयास करना चाहिए। हमारी उदंती टीम अब गरियाबंद में सशस्त्र आंदोलन को समाप्त करने जा रही है।” बुकलेट में लिखा गया, ”आप सभी यूनिट के साथी—गोबरा, सीनापाली, एसडीके, सीतानदी भी इस दिशा में सोचें और सही फैसला लें, ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाए। हमने पहले ही कई प्रमुख कामरेड खो दिए हैं। हमारी यूनिट, सोनू दादा और रूपेश दादा द्वारा लिए गए फैसले का समर्थन करती है।

आप भी अपने पूरे दलम सहित हथियार लेकर आएं।” इसमें लिखा गया, ”जनता से भी मेरी अपील है कि कृपया इस पत्र को जल्द से जल्द हमारे अन्य कामरेड तक पहुंचाएं।” पत्र में एक मोबाइल नंबर भी दिया गया है, जिसके माध्यम से माओवादी कार्यकर्ता उनसे संपर्क कर सकते हैं। पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ”हम इस पत्र का स्वागत करते हैं। यह एक सकारात्मक पहल है। मैं उदंती, गोबरा, सीनापाली, एसडीके और सीतानदी क्षेत्रों में सक्रिय नक्सलियों से जल्द से जल्द आत्मसमर्पण की अपील करता हूं। वे बिना किसी हिचकिचाहट के मुझसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। हम उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेंगे।” शुक्रवार को बस्तर जिले में केंद्रीय समिति के सदस्य रूपेश और 111 महिला कैडर सहित कुल 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। पुलिस के अनुसार, इन सभी पर कुल मिलाकर 9.18 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। दक्षिणी छत्तीसगढ़ (बस्तर) से लेकर ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश तक फैला दंडकारण्य क्षेत्र लंबे समय से माओवादियों का प्रमुख गढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 16 अक्टूबर को बताया था कि राज्य में पिछले 22 महीनों में 477 नक्सली मारे गए, 2,110 ने आत्मसमर्पण किया, और 1,785 गिरफ्तार किए गए हैं। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में घोषणा की थी कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का संकल्प लिया है। उन्होंने अपने बस्तर प्रवास के दौरान माओवादियों से हथियार छोड़ने की अपील भी की थी। बृहस्पतिवार को गृह मंत्री शाह ने छत्तीसगढ़ के दो सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों अबूझमाड़ और उत्तरी बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करते हुए स्पष्ट किया था, ”जो आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, उनका स्वागत है; लेकिन जो बंदूक उठाएंगे, उन्हें सुरक्षाबलों की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

नक्सल समर्पण को लेकर सियासी जंग तेज, कांग्रेस ने एक ‘सरकारी इवेंट’ बताया

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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया कि नक्सलवाद पर नियंत्रण पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की विश्वास, विकास और सुरक्षा की नीतियों का परिणाम है जबकि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार महज ‘प्रचार इवेंट’ आयोजित कर रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, बस्तर के दूरस्थ इलाकों में सड़कों का निर्माण, सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित करना और शक्षिा व रोजगार के अवसर पैदा करना कांग्रेस सरकार की देन थी। इससे ही नक्सलवाद 65 प्रतिशत तक कम हुआ जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2021 में स्वीकार किया था।

उन्होंने आज 11 बजे जगदलपुर में हुए नक्सली आत्मसमर्पण पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार आंकड़े तो दिखाती है लेकिन, समर्पण करने वालों का विस्तृत ब्यौरा-जैसे उन पर दर्ज मामले, जमा किए गए हथियार-सार्वजनिक नहीं करती। यह केवल एक प्रोपेगैंडा इवेंट है। शुक्ला ने आगे कहा, महाराष्ट्र में आत्मसमर्पण के बाद अचानक छत्तीसगढ़ सरकार को भी यह आयोजन करने की याद आई। वहीं, हकीकत यह है कि समर्पण के दावों के बीच भी नक्सली हिंसा जारी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि नक्सलवाद के मुद्दे पर गंभीरता दिखाए और कोरी बयानबाजी के बजाय ठोस कदम उठाएं।

छत्तीसगढ़ में 210 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में शुक्रवार को वरिष्ठ पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों की मौजूदगी में माओवादियों के केंद्रीय समिति के एक सदस्य सहित 210 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस घटनाक्रम की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन न केवल बस्तर के लिए, बल्कि छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। अधिकारियों ने कहा कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में सबसे बड़ा है तथा यह वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान में एक निर्णायक मोड़ है। सभी आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का आदिवासी समुदाय के नेताओं और पुजारियों ने मुख्यधारा में लौटने पर औपचारिक रूप से स्वागत किया और उन्हें प्रेम, शांति और एक नई शुरुआत के प्रतीक लाल गुलाब भेंट किए।

बाद में, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों, पुलिस और अर्धसैनिक बल के वरिष्ठ अधिकारियों और आदिवासी समुदाय के नेताओं ने तस्वीरें खिंचवाईं। मंच पर माओवादियों ने भी तस्वीरें खिंचवाईं। मंच के पीछे लगे बैनर पर लिखा था, ”पूना मार्गेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन – माओवादी कैडर्स का मुख्यधारा में पुनरागमन।” इस दौरान आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी संविधान की प्रति भी थामे हुए थे। ‘पूना मार्गेम’ बस्तर रेंज पुलिस द्वारा नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए शुरू की गई एक पुनर्वास पहल है। बाद में, एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुमराह और समाज से कटे हुए 210 भाई-बहन आज संविधान, गांधी की अहिंसा और पुनर्वास नीति में विश्वास दिखाते हुए मुख्यधारा में वापस आ गए हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेताओं से लेकर निचले स्तर के सदस्य भी आत्मसमर्पण करने वाले कार्यकर्ताओं में शामिल हैं।

साय ने इस दौरान उन्हें बधाई दी और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि राज्य की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति में वित्तीय सहायता, भूमि लाभ, नई औद्योगिक नीति में लाभ और उन्हें रोजगार से जोड़ने सहित कई प्रावधान हैं। साय ने कहा कि इस ऐतिहासिक घटना को केंद्र और राज्य सरकारों की व्यापक नक्सल-विरोधी रणनीति का परिणाम माना जा रहा है, जिसे पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन के निरंतर प्रयासों और जागरूक तथा सतर्क समुदायों की सक्रिय भागीदारी का समर्थन प्राप्त है।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले वरिष्ठ माओवादी नेताओं में केंद्रीय समिति के सदस्य रूपेश उर्फ सतीश, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के चार सदस्य – भास्कर उर्फ राजमन मंडावी, रनिता, राजू सलाम, धन्नू वेट्टी उर्फ संतू और एरिया कमेटी सदस्य रतन एलम शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने 153 हथियार सौंपे, जिनमें 19 एके-47 राइफलें, 17 सेल्फ-लोडिंग राइफल, 23 इंसास राइफलें, एक इंसास एलएमजी (लाइट मशीन गन), 36 .303 राइफल, चार कार्बाइन और 11 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) शामिल हैं। दो अक्टूबर को बस्तर क्षेत्र के बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिनमें से 49 पर कुल 1.06 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या की समाप्ति का संकल्प लिया है। उन्होंने हाल ही में अपने बस्तर प्रवास के दौरान नक्सलियों से हथियार छोड़ने की अपील की थी। शाह ने बृहस्पतिवार को छत्तीसगढ़ के दो सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, अबूझमाड़ और उत्तरी बस्तर को नक्सली आतंक से मुक्त घोषित किया और स्पष्ट किया कि जो लोग आत्मसमर्पण करने को तैयार हैं, उनका स्वागत है लेकिन जो लोग बंदूक चलाना जारी रखेंगे उन्हें सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

रायगढ़ में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में दुकानों की नीलामी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लगाई रोक

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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायगढ़ जिले के जनपद पंचायत धरमजयगढ़ द्वारा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की नवनिर्मित पांच दुकानों की खुली बोली प्रक्रिया पर गुरुवार को रोक लगा दी। जनपद पंचायत की ओर से इन दुकानों की नीलामी 24 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पंचायत सभा कक्ष में आयोजित की जानी थी। इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 22 शर्तों के साथ सीमित निविदा सूचना प्रकाशित की गई थी। इन्हीं शर्तों में से कुछ को कठोर और विधि विरुद्ध बताते हुए दोमन सिदार, पिता भूपदेव सिदार, निवासी चिर्रामुड़ा, थाना तमनार, जिला रायगढ़ ने न्यायालय अपर कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष पुनरीक्षण प्रकरण प्रस्तुत किया।

पुनरीक्षणकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजीव कालिया की ओर से प्रस्तुत तर्कों को सुनने के पश्चात न्यायालय ने दुकानों की नीलामी की अग्रिम कार्यवाही स्थगित रखने का अंतरिम आदेश पारित किया है। जानकारी के अनुसार नीलामी की शर्तों को अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितों के विपरीत माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि पंचायत द्वारा बनाई गई कठोर शर्तों से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने से रोका जा रहा है। न्यायालय के इस आदेश के बाद जनपद पंचायत की नीलामी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गया है। साथ ही पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर संशय बरकरार

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर बुधवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस मामले की न्यायमूर्ति अरविंद वर्मा की एकल पीठ में सुनवाई हुई, जिसमें बचाव पक्ष की ओर से हर्षवर्धन परगनिया और हर्षित शर्मा ने अपना पक्ष रखा। गौरतलब है कि एंटी करप्शन ब्यूरो और ईकोनॉमिक ऑफेंस विंग की कार्रवाई के बाद चैतन्य बघेल न्यायिक रिमांड पर जेल में हैं। विशेष अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई कर उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजने का आदेश दिया था।

बुधवार को उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जमानत के पक्ष में दलीलें दीं, जबकि एसीबी की ओर से सरकारी वकीलों ने जमानत का विरोध किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित नहीं रखा और अगली सुनवाई की तिथि भी नश्चिति नहीं की। इस बीच, पूरे मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है वहीं सरकार का कहना है कि एसीबी-ईओडब्ल्यू कानून के अंतर्गत कार्रवाई कर रही है। अब सबकी निगाहें उच्च न्यायालय के अगले नर्णिय पर टिकी हैं।

नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है, शीर्ष माओवादी नेता भूपति के आत्मसमर्पण पर बोल सीएम विष्णु देव साय

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में शीर्ष नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव और 60 अन्य नक्सलियों का आत्मसमर्पण माओवादी विचारधारा पर एक निर्णायक प्रहार है। साय ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाला नक्सलवाद अब दम तोड़ रहा है और अपने अंतिम चरण में है। साय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,”देश की आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाला नक्सलवाद अब हर मोर्चे पर दम तोड़ रहा है और अपने अंतिम दौर से गुजर रहा है।

गढ़चिरौली में कुख्यात माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू एवं 60 अन्य नक्सलियों का आत्मसमर्पण नक्सलवादी विचारधारा पर एक निर्णायक प्रहार है। हमारे शौर्यवान सुरक्षाबल दिन-रात अदम्य साहस के साथ इस लड़ाई को अंजाम दे रहे हैं और सफलता प्राप्त कर रहे हैं।” साय ने लिखा है, ”मुझे पूर्ण विश्वास है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त भारत का हमारा संकल्प अवश्य पूरा होगा।

छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर, अब विकास और शांति की उस नई सुबह की ओर बढ़ रहा है, जिसका वर्षों से इंतज़ार था।” राव को भूपति, सोनू और अभय के नाम से भी जाता है। उसने 60 अन्य नक्सलियों के साथ गढ़चिरौली जिले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण किया है। इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 253 नक्सली मारे जा चुके हैं। उनमें प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव और शीर्ष कार्यकर्ता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू (70) तथा केंद्रीय समिति के पांच सदस्यों का मुठभेड़ में मारा जाना अहम है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस साल झारखंड में दो और आंध्र प्रदेश में केंद्रीय समिति का एक सदस्य मारा गया। छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार, इस वर्ष माओवादियों के महासचिव और आठ केंद्रीय समिति सदस्यों के खात्मे तथा केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता और भूपति के आत्मसमर्पण के बाद, अब प्रतिबंधित संगठन में नौ पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति सदस्य (शीर्ष माओवादी कार्यकर्ता) बचे हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ का खूंखार माओवादी कमांडर माड़वी हिडमा भी शामिल है।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में 50 लाख रूपए के 16 इनामी समेत 27 नक्सलियों ने किया समर्पण

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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में कुल 50 लाख रूपए के 16 इनामी नक्सलियों समेत 27 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के बटालियन नंबर एक में सक्रिय दो कट्टर नक्सली समेत 27 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें 10 महिला नक्सली भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों में से पीएलजीए बटालियन नम्बर एक में सप्लाई टीम कमांडर ओयाम लखमू (53) के सर पर 10 लाख रूपए का इनाम है।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सली पीएलजीए बटालियन नंबर एक के सदस्य माड़वी भीमा (18), रीजनल मिलिट्री कंपनी नंबर दो की पार्टी सदस्या सुनिता उर्फ कवासी सोमड़ी (24) और रीजनल मिलिट्री कंपनी नंबर एक की पार्टी सदस्या सोड़ी मासे (22) के सर पर आठ—आठ लाख रूपए का इनाम है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा एक नक्सली पर तीन लाख रूपए, दो नक्सलियों पर दो—दो लाख रूपए तथा नौ नक्सलियों के सर पर एक—एक लाख रूपए का इनाम है।

अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ शासन की ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति’ और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना से प्रभावित होकर तथा माओवादियों के अमानवीय व्यवहार, आधारहीन विचारधारा, उनके शोषण, अत्याचार तथा बाहरी माओवादियों के द्वारा भेदभाव करने से तंग आकर आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की नई पुनर्वास नीति ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति -2025’ के 50-50 हजार रूपए प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाएं दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ के जंगल से बड़ी संख्या में विस्फोटक और अन्य सामान बरामद

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने जंगल से बड़ी संख्या में विस्फोटक और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के उसूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ताड़पाला गांव के जंगल में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों द्वारा छुपाए गए विस्फोटक और अन्य सामान बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को ताड़पाला आधार शिविर से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कोबरा बटालियन तथा 229, 153 और 196वीं बटालियन के संयुक्त दल को कर्रेगुट्टा पहाड़ी की ओर गश्त में रवाना किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान कल दोपहर बाद लगभग तीन बजे सुरक्षाबलों ने नक्सलियों द्वारा छुपाकर रखा गया विस्फोटक सामान और बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल) बनाने का सामान भारी मात्रा में बरामद किया। उन्होंने बताया कि सुरक्षबलों ने जंगल से 51 बीजीएल, 100 बंडल एचटी एल्युमिनियम तार, 50 स्टील पाइप (बीजीएल निर्माण के लिए), भारी मात्रा में बिजली का तार, 20 लोहे की शीट (बीजीएल निर्माण के लिए) और 40 लोहे की प्लेट (बीजीएल निर्माण के लिए) बरामद की हैं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों ने क्षेत्र से गश्त के दौरान नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लगाए गए पांच प्रेशर बम भी बरामद किए, जिन्हें नष्ट कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने माओवादियों की एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया है। बरामद की गई विस्फोटक सामग्री और बीजीएल निर्माण सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि माओवादी सुरक्षाबलों को गंभीर क्षति पहुंचाने की साजिश रच रहे थे। सुरक्षाबलों की सतर्कता और प्रभावी कार्रवाई से माओवादियों के मंसूबों को विफल किया गया। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों ने की भाजपा कार्यकर्ता की हत्या

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में संदिग्ध नक्सलियों ने भाजपा के एक कार्यकर्ता की गला घोंटकर हत्या कर दी। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के इलमिड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत मुजालकांकेर गांव में नक्सलियों ने सोमवार रात सत्यम पुनेम की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। उन्होंने बताया कि पुनेम की हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुनेम क्षेत्र में भाजपा के मंडल कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहा था। उन्होंने बताया कि शव के करीब से पर्चा भी बरामद किया गया है। पुनेम की हत्या की जिम्मेदारी कथित तौर पर नक्सलियों की मद्देड़ एरिया कमेटी ने ली है। पर्चे में पुनेम के मुखबिर होने का आरोप लगाया गया है, वहीं उसे बार—बार समझाइश देने का भी उल्लेख किया गया है। इस घटना के साथ बीजापुर सहित सात जिलों वाले बस्तर संभाग के अलग-अलग स्थानों पर इस साल अब तक माओवादी हिंसा में लगभग 40 लोगों की जान जा चुकी है। जनवरी 2023 से दिसंबर 2024 के बीच संभाग में अलग-अलग घटनाओं में 11 भाजपा नेताओं की हत्या कर दी गई।