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अपराधियों में हो कानून का भय और जनता में हो सुरक्षा का अहसास: मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के पुलिस अधीक्षकों से कहा कि पुलिस की छवि ऐसी होनी चाहिए, जिससे अपराधियों में कानून का भय और आम नागरिकों में सुरक्षा का अहसास हो। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री साय सोमवार को जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बैठक में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समग्र स्थिति, मादक पदार्थ नियंत्रण, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रशासनिक समन्वय को सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

साय ने कहा, “जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। जिन जिलों में दोनों के बीच समन्वय मजबूत है, वहां बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई को प्रशासनिक उदासीनता माना जाएगा और ऐसे मामलों में कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने, चाकूबाजी और हत्या जैसे जघन्य अपराधों पर कोई नरमी नहीं बरती जाए। साय ने गौ-तस्करी और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामलों पर सघन निगरानी रखने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जिन जिलों ने अपराध नियंत्रण में उल्लेखनीय सुधार किया है, उनके अनुभवों को अन्य जिलों में मॉडल के रूप में लागू किया जाए। साय ने नशाखोरी और मादक पदार्थों की तस्करी पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशा अपराधों की जड़ है, और इसे समाप्त करना ही कानून-व्यवस्था सुधार की पहली शर्त है। मुख्यमंत्री ने एनकॉर्ड (एनसीओआरडी) के तहत राज्यव्यापी अभियान चलाने, सीमावर्ती जिलों में तस्करी पर रोक लगाने और एनडीपीएस एक्ट के तहत समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में घुसपैठियों की पहचान और नियंत्रण के लिए विशेष कार्य बल (एसटीएफ) गठित किया गया है। उन्होंने निर्देश दिया कि सीमावर्ती जिलों में सघन जांच की जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया, “योजनाओं की सफलता केवल नीतियों पर नहीं बल्कि उन्हें लागू करने वाली टीम की पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही पर निर्भर करती है। यही भावनात्मक और प्रशासनिक समन्वय “विकसित छत्तीसगढ़” को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।” अधिकारियों ने बताया कि बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ के कोरबा में प्रेम साबित करने के लिए युवक ने खाया जहर, इलाज के दौरान मौत

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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में प्रेम का सबूत देने के लिए एक युवक ने युवती के घर में जहर खा लिया, जिसके कारण बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शनिवार को बताया कि वह मामले की जांच कर रही है। कोरबा जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतीश सिंह ठाकुर ने बताया कि लेमरू थाना क्षेत्र के अंतर्गत देवपहरी गांव के युवक कृष्ण कुमार पंडो (20) ने कथित तौर पर जहर खाकर कर जान दे दी है। ठाकुर ने बताया कि पंडो ने 25 सितंबर को जहर खाया था, जिसे 27 सितंबर को कोरबा शहर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया था।

इलाज के दौरान आठ अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। युवक के परिजनों का आरोप है कि युवक ने मौत से पहले उन्हें बताया था कि वह एक युवती से प्रेम करता था। जब युवती के परिजनों को इसकी जानकारी मिली तब उन्होंने युवक को करीब के गांव स्थित अपने घर में बुलाया और प्रेम साबित करने के लिए जहर पीने की बात कही। उनकी बातों में आकर युवक ने जहर का सेवन कर लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवक ने एक युवती के परिवार के सदस्यों के कहने पर जहर खा लिया था। पुलिस युवक की मौत के कारण और सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के बाद ही पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए मोदी सरकार की सौगात, तीन जिले होंगे लाभान्वित

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देश के किसानों के हित में दो नई योजनाओं प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भर मिशन की शुरुआत की है। इन योजनाओं का लाभ देश के 100 जिलों के किसानों को मिलेगा जिनमें छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर जिले भी शामिल हैं। राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में इस अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के सशक्तिकरण और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

सीएम साय ने बताया कि इन योजनाओं में उन जिलों को प्राथमिकता दी गई है, जहां अनाज उत्पादन अपेक्षाकृत कम है। ऐसे जिलों में किसानों को विशेष सुविधाएं, तकनीकी सहायता और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे फसल उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जीएसटी सुधारों का सीधा लाभ अब किसानों तक पहुंच रहा है। कृषि उपकरण, खाद्यान्न और ट्रैक्टरों की कीमतों में कमी आई है-ट्रैक्टरों के दाम में करीब एक लाख रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्णय लिया है, ताकि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्था में और मजबूती लाई जा सके। सीएम साय ने कहा कि नई योजनाएं किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगी और प्रदेश में कृषि उत्पादन को नई दिशा देंगी।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में प्रेशर बम में विस्फोट, सीआरपीएफ का एक जवान घायल

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में प्रेशर बम की चपेट में आने से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का जवान घायल हो गया। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के उसूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुजारी कांकेर गांव के करीब प्रेशर बम की चपेट में आने से सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन का जवान घायल हो गया है। उन्होंने बताया कि आज पुजारी कांकेर गांव से सुरक्षाबलों के दल को गश्त पर रवाना किया गया था। दल जब क्षेत्र में था तभी माओवादियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम में विस्फोट होने से कोबरा बटालियन का जवान घायल हो गया।

अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद जवान को वहां से बाहर निकाला गया और उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि जवान की हालत सामान्य है तथा वह खतरे से बाहर है। राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादी सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए अक्सर बारूदी सुरंगों का उपयोग करते हैं। ऐसे ही एक घटना में जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र में बृहस्पतिवार शाम को प्रेशर बम में विस्फोट से एक बालक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में प्रेशर बम विस्फोट की घटना में बालक घायल

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में प्रेशर बम की चपेट मे आने से एक बालक गंभीर रूप से घायल हो गया है। पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पीड़िया गांव के करीब बृहस्पतिवार शाम को प्रेशर बम की चपेट में आने से एक आदिवासी बालक गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को घटना की जानकारी मिली तब घायल बालक को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर चिकित्सा के लिए उसे बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया।

बालक का उपचार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों ने आसपास खोजी अभियान शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्र को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद स्थानीय आदिवासी समुदाय में माओवादियों के विरुद्ध गहरा आक्रोश व्याप्त है। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना नक्सल हिंसा की अमानवीयता को दर्शाती है, जिसमें निर्दोष ग्रामीणों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से जिले के अंदरूनी इलाकों में माओवादियों के द्वारा लगाये गए बारूदी सुरंग विस्फोटों की घटना में जनहानि हुई है।

पुलिस हिरासत में मौत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिया मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत को पुलिस अत्याचार का नतीजा मानते हुए राज्य सरकार को मृतक के परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति को यातना, क्रूरता या अपमान का सामना न करना पड़े। उच्च न्यायालय से मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की पीठ ने अपने फैसले में कहा, “जहां किसी व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत हो जाती है, वहां विश्वसनीय एवं स्वतंत्र साक्ष्यों के माध्यम से मौत का कारण स्पष्ट करने की जिम्मेदारी राज्य पर होती है।

ऐसा न करना, खासकर उन मामलों में जहां मृत्यु-पूर्व चोटें मौजूद हों या हिरासत के तुरंत बाद मौत हो, अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है।” पीठ ने कहा, “राज्य मृतक के आश्रितों को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है, जिससे परिवार को राहत मिलने के साथ-साथ भविष्य में ऐसे उल्लंघनों से बचाव का दोहरा उद्देश्य पूरा होता है।” उसने कहा कि मौत से जुड़ी परिस्थितियां दिखाती हैं कि मृतक को अमानवीय यातना दी गई थी और यह मामला हिरासत में बर्बरता का उदाहरण है। हिरासत में मौत का यह मामला धमतरी जिले के अर्जुनी थाने का है। याचिकाकर्ता दुर्गा देवी कठोलिया के अनुसार, पुलिस ने उसके पति दुर्गेंद्र कठोलिया को 29 मार्च 2025 को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

दु्र्गा के मुताबिक, 31 मार्च को दुर्गेंद्र को धमतरी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां वह पूरी तरह से स्वस्थ दिख रहा था, लेकिन शाम पांच बजे उसे फिर से थाने ले जाया गया, जहां महज तीन घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दुर्गेंद्र को हिरासत में कड़ी यातनाएं दीं, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुर्गेंद्र के शव पर 24 चोटों का जिक्र है और मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सहित अन्य अनुरोध को लेकर दुर्गेंद्र की पत्नी दुर्गा, मां सुशीला और पिता लक्ष्मण सोनकर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मामले में राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और मृतक के शरीर पर लगी चोटें साधारण व पुरानी थीं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा, “यह प्राकृतिक मौत नहीं, पुलिस अत्याचार का नतीजा है। सभी साक्ष्य साफ बताते हैं कि यह मौत पुलिस की यातना से हुई। यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन और उसके सम्मान के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।” अदालत ने कहा कि मौत के हालात दिखाते हैं कि मृतक को अमानवीय यातना दी गई थी और यह मामला हिरासत में बर्बरता का उदाहरण है। उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में मुआवजा देना सार्वजनिक कानून के तहत जरूरी उपाय है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मृतक की पत्नी को तीन लाख रुपये की राशि दी जाए, जिससे वह अपने दो नाबालिग बच्चों की देखभाल कर सके। उसने कहा कि मृतक के माता-पिता को एक-एक लाख रुपये दिए जाएं। उच्च न्यायालय ने कहा कि मुआवजा राशि का भुगतान आठ हफ्ते के भीतर किया जाए, वरना आदेश की तिथि से भुगतान तक इस राशि पर नौ प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज लगेगा।

छत्तीसगढ़ के आरकेएम पावर प्लांट हादसे में मालिकों, निदेशकों सहित आठ पर रिपोर्ट दर्ज

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छत्तीसगढ के सक्ति जिले के डभरा स्थित आरकेएम पावर प्लांट में गत सात अक्टूबर को हुए भीषण लिफ्ट हादसे मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस ने प्लांट के मालिकों, निदेशकों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। गौरतलब है कि हादसा आरकेएम पावर प्लांट के बॉयलर सेक्शन में हुआ था, जब लफ्टि टूटकर नीचे गिर गयी। इस दर्दनाक हादसे में 10 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए थे।

घटना स्थल पर तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि शेष घायलों को रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान एक और श्रमिक ने दम तोड़ दिया, जबकि अन्य का इलाज जारी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक संजय शुक्ला एवं पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन में सक्ती पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और प्रबंधन की लापरवाही उजागर हुई। इसके बाद पुलिस ने आर.के.एम. पावर जेनरेशन कंपनी के मालिकों, निदेशकों और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभन्नि धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है।

आरोपितों में शामिल कंपनी के मालिक और निदेशक डॉ. अंडल अरमुगम, निदेशक टी.एम. सिंगरवेल, प्लांट प्रमुख , फैक्ट्री मैनेजर सम्मुख राव, बॉयलर एवं टर्बाइन मेंटेनेंस हेड, सुरक्षा अधिकारी और लफ्टि इंजीनियर सहित कुल आठ अधिकारी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा ने स्पष्ट कहा, इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सक्ती पुलिस की जांच टीम मामले की वस्तिृत जांच में जुटी हुई है।

छत्तीसगढ के नारायणपुर को महाराष्ट्र से जोड़ेगा राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी : सीएम साय

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले इस राष्ट्रीय राजमार्ग के नर्मिाण को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। कुतुल से महाराष्ट्र सीमा के पास नीलांगुर तक 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस परियोजना पर 152 करोड़ रुपए की लागत आएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को कहा, नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की गति तेज करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। यह सड़क केवल एक हाईवे नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी का हस्सिा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग 130डी की कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी। इस राष्ट्रीय राजमार्ग का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है।

इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हस्सिा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी। साय ने बताया कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सहयोग से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हस्सिे के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के नर्मिाण का रास्ता खुल गया है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने पर बस्तर के लोगों को न केवल तेजी से परिवहन सुविधा मिलेगी, बल्कि यह क्षेत्र आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा दृष्टि से भी आत्मनर्भिरता की ओर बढ़ेगा।

छत्तीसगढ़ में 16 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, उनमें नौ पर 48 लाख रुपये का इनाम

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में बुधवार को 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से नौ पर कुल 38 लाख रुपये का इनाम है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने बताया कि सात महिलाओं समेत 16 नक्सलियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया । उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण कर रहे नक्सली “खोखली” और “अमानवीय” माओवादी विचारधारा, निर्दोष आदिवासियों पर नक्सलियों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों से निराश हैं।

गुरिया ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सैन्य प्लाटून के डिप्टी कमांडर पोदिया मरकाम उर्फ रतन (34) भी शामिल है, जिस पर आठ लाख रूपए का इनाम है। उन्होंने बताया कि बड़े नक्सलियों– मनोज दुग्गा (35), सुमित्रा उर्फ सनी कुर्साम (35) और वनीला फरसा (35), डिविजनल कमेटी के सदस्य गावड़े उर्फ दिवाकर (45) पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में एरिया कमेटी सदस्य बुधु उर्फ कमलेश उसेंडी (32) पर पांच लाख रुपये का इनाम तथा मड्डा कुंजाम (21), रवि उर्फ गोपाल वड्डे (23) और कारे कोर्राम (23) पर एक-एक लाख रुपये का इनाम है।

उन्होंने बताया कि बाकी छह अन्य प्रतिबंधित संगठन के निचले स्तर के सदस्य है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पूछताछ के दौरान आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने पुलिस को बताया कि ”शीर्ष माओवादी नेता आदिवासियों के असली दुश्मन हैं। वे जल, जंगल और जमीन की रक्षा, समानता और न्याय के झूठे वादों से स्थानीय लोगों को गुमराह करते हैं और उनका शोषण करते हैं।” बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, ”यह आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बस्तर में बदलाव की बयार बह रही है। हिंसा, भय और शोषण की विचारधारा से निराश होकर इन युवाओं ने शांति, शिक्षा और विकास का मार्ग चुना है।” उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल उनके और उनके परिवारों के लिए एक नई शुरुआत है, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति एवं विश्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

सुंदरराज का कहना है कि सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयास, बढ़ता जन समर्थन और पुनर्वास नीतियों का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण, आने वाले दिनों में कई और माओवादियों को आत्मनिरीक्षण करने और मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर बस्तर रेंज में पिछले 20 महीनों में कुल 1,837 माओवादी कैडर हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।

शराब घोटाला : अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से वार दिन की अंतरिम जमानत

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रायपुर। उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में कारोबारी अनवर ढेबर को उसकी मां के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए चार दिन की अंतरिम जमानत मंजूर कर दिया। अपने आदेश में शीर्ष अदालत ने अनवर को पुलिस अभिरक्षा में चार दिन मां के साथ रहने की इजाजत दी है। अनवर ढेबर की ओर से शीर्ष अदालत ने उन्हें मां की खराब स्वास्थ्य में समय में मिलने के लिए आवेदन दिया गया था। इसपर सुनवाई के दौरान ढेबर के वकीलों ने कोर्ट में बताया कि उनकी मां की हालत गंभीर है।

इस वक्त वह हॉस्पिटल में एडमिट हैं. जिस पर सुप्रीम कोर्ट कहा कि ऐसे संवेदनशील समय पर परिवार के ऐसे समय में इंसान को अपने करीबियों के साथ रहने का मौका मिलना चाहिए। अब अगले चार दिनों तक अनवर ढेबर अपने परिवार के साथ रह सकेगा। जमानत की तिथि खत्म होते ही उन्हें दोबारा जेल जाना होगा। जांच और दो सौ से अधिक व्यक्तियों के बयान एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है जिसकी अनुमानित कीमत 2174 करोड़ रुपये से अधिक है. पहले इस घोटाले का अनुमान 2161 करोड़ रुपये था, लेकिन नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।