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छत्तीसगढ में दंतैल हाथी का आतंक: रुद्री में एक और मकान पर किया हमला

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छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में दंतैल हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार देर रात रुद्री क्षेत्र में हाथी ने एक ग्रामीण के मकान की दीवार तोड़ दी। गनीमत रही है इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। इससे पहले भी यही हाथी एक और मकान को क्षति पहुँचा चुका है। वन विभाग ने हाथी की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी है और आसपास के 22 गाँवों में अलर्ट जारी किया है। इनमें से सात गाँवों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और रात में अकेले घरों से बाहर न निकलने की अपील की गयी है। वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और हाथी की हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है।

शराब घोटाले में ईडी के जांच के घेरे में 30 से ज्यादा आबकारी अधिकारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3,200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए आबकारी विभाग के 30 से अधिक अधिकारियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। इनमें वे अफसर भी शामिल हैं जिन्हें हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली थी। सूत्रों ने गुरुवार को कहा कि पिछले तीन दिनों से लगातार आबकारी अधिकारी ईडी दफ्तर पहुंचकर अपने बयान दर्ज करा रहे हैं। ईडी और ईओडब्ल्यू/एसीबी को इस मामले का चालान अदालत में पेश करने के लिए क्रमशः तीन और दो महीने का समय मिला है। इस वजह से जांच एजेंसियों ने गवाही और सबूतों को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज़ कर दिए हैं।

समन की सूची में आबकारी उपायुक्त अनिमेष नेताम, अरविंद कुमार पाटले, नीतू नोतानी, नोहर सिंह ठाकुर, विजय सेन शर्मा सहित कई उपायुक्त, सहायक आयुक्त और जिला आबकारी अधिकारी शामिल हैं। वहीं सेवानिवृत्त अधिकारी एके सिंह, जे.आर. मंडावी, जी.एस. नरूटी, देवलाल वैद्य, ए.के. अनंत, वेदराम लहरे और एल.एल. ध्रुव से भी पूछताछ की तैयारी है। जानकार मानते हैं कि ईडी का यह कदम आने वाले दिनों में बड़े खुलासों का आधार बन सकता है। समन प्रक्रिया के बाद एक बार फिर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में कड़ी हलचल देखी जा रही है।

सनातन धर्म को बचाने के लिए पलायन नहीं, संघर्ष का मार्ग अपनाना होगा : आचार्य शांतनु महाराज

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कानपुर देहात। कंचौसी बाजार स्थित दर्शन सिंह स्मृति महाविद्यालय में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन का आयोजन आध्यात्मिक संदेशों और भक्ति भाव से ओतप्रोत रहा। कथा सुनाते हुए आचार्य शांतनु जी महाराज ने बेटियों के सम्मान और दहेज जैसी कुप्रथा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा कहती है–बेटी को पिता देता है, लेता नहीं। किंतु दहेज प्रथा ने इस पवित्र परंपरा को कलंकित कर दिया है। बेटियाँ बोझ नहीं, बल्कि कुल की शोभा हैं। यदि समाज को प्रगति की ओर ले जाना है तो हमें दहेज जैसी अमानवीय प्रथाओं को समाप्त करना होगा। इस दौरान कथा वक्ता आचार्य शांतनु जी महाराज ने जीवन और समाज से जुड़े गहरे विषयों पर श्रोताओं को संबोधित किया। आचार्य शांतनु जी महाराज ने कहा कि आज लोग माता-पिता की सेवा नहीं करते, भगवान का स्मरण नहीं करते, धर्म और संस्कृति से विमुख हो गए हैं। यही कारण है कि लोग नीले ड्रम में भरे जा रहे हैं।

गौरवशाली सनातन और संघर्ष की परंपरा

इतिहास का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि मुगलों के शासनकाल में मंदिर तोड़े गए, नाम बदले गए, संस्कृति को दबाने का प्रयास हुआ। लेकिन सनातन धर्म अपनी गहरी जड़ों के कारण अडिग रहा। आज राम मंदिर का पुनर्निर्माण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म को बचाने के लिए पलायन नहीं, बल्कि संघर्ष का मार्ग अपनाना होगा। भागवत कथा का महत्व तभी है जब सनातन सुरक्षित रहे। कथा और संस्कृति जीवित तभी रहेंगी, जब हम अपनी आस्था और परंपरा की रक्षा के लिए डटकर खड़े होंगे। आचार्य जी ने जीवन का सत्य उजागर करते हुए कहा मनुष्य की इच्छा का पात्र कभी भरता नहीं।

सांसद भोले ने किया शुभारंभ

कथा का शुभारंभ सांसद देवेंद्र सिंह भोले, प्रेम शीला सिंह, विकास सिंह भोले स्वामी विवेकानंद युवा समिति के अध्यक्ष, अमित सिंह ने वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ किया। सांसद भोले ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि यह समाज को संस्कारित करने का भी माध्यम है।डीएम और जिला जज भी हुए शामिलकथा स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। कार्यक्रम में विशेष रूप से कपिल जी (जिलाधिकारी, कानपुर देहात), जिला जज, सुखराम यादव (पूर्व सांसद), स्वप्निल वरुण (जिला अध्यक्ष), विजय सचान (जिला अध्यक्ष, कानपुर देहात), राकेश तिवारी (पूर्व जिला महामंत्री), आचार्य कृष्ण दास जी महाराज (पनकी हनुमान मंदिर, कानपुर नगर) आदि सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने कथा श्रवण कर पुण्य अर्जित किया।

छत्तीसगढ़ का बालोद बना देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला

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छत्तीसगढ़ का बालोद जिला देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला बन गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 27 अगस्त 2024 को शुरू किए गए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। उनके मुताबिक, बालोद जिले की सभी 436 ग्राम पंचायतों और नौ नगरीय निकायों को विधिवत प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विगत दो वर्षों में बालोद जिले से बाल विवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया। अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजों के सत्यापन और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिले के सभी पंचायतों और नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त का दर्जा मिल गया है तथा इस अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ बालोद जिला पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है।

बालोद जिले की कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय की सामूहिक भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने सभी पंचायतों और नगरीय निकायों को इस प्रयास में सक्रिय सहयोग देने के लिए धन्यवाद भी दिया। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 75वें जन्मदिन के अवसर पर सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया गया। उनके मुताबिक, विगत दो वर्षों में इन पंचायतों से भी बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। इसे राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है, “छत्तीसगढ़ सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमारा लक्ष्य है कि चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2028-29 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकल्प है।” साय ने कहा कि अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और जिन जिलों में पिछले दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, वहां शीघ्र ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। वहीं राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया है।

उन्होंने कहा कि बालोद की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि समाज और सरकार मिलकर कार्य करें तो बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। राजवाड़े ने कहा कि सूरजपुर की उपलब्धि भी इस दिशा में एक मजबूत कदम है और इस अभियान में यूनिसेफ का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन ने तकनीकी सहयोग, जागरूकता कार्यक्रम और निगरानी तंत्र को मजबूत करने में मदद की।

छत्तीसगढ़ : माओवादी मामले में एनआईए ने चार के खिलाफ दायर किया आरोप पत्र

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राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने से जुड़े एक मामले में चार और आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दायर किया है। एजेंसी ने बुधवार को एक बयान में बताया कि इनमें से तीन आरोपी-सुनीता पोटाम, शंकर मुचाकी और दशरथ उर्फ दसरू मोडियाम- भाकपा (माओवादी) के एक मुखौटा संगठन, मूलवासी बचाओ मंच (एमबीएम) के पदाधिकारी थे और उन्हें पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपपत्र में नामज़द चौथा आरोपी मल्लेश कुंजम, एक सशस्त्र माओवादी कैडर है और अब भी फरार है। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत एमबीएम पर प्रतिबंध लगा दिया था। आरोपपत्र में नामज़द सभी चार आरोपी माओवादियों के लिए धन संग्रह, भंडारण और वितरण जैसी गतिविधियों में शामिल थे।

संगठन ने इसका इस्तेमाल लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार और राज्य में चल रही विकास गतिविधियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए किया। बयान में कहा गया है कि इस अवैध धन को एमबीएम जैसे मुखौटा संगठनों के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा था। इस मामले में अब तक कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार मल्लेश सहित सात आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है। एनआईए का यह मामला 2023 में छत्तीसगढ़ में बीजापुर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से उत्पन्न हुआ है। मई, 2023 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिला पुलिस ने एमबीएम के दो मददगारों गजेंद्र माडवी और लक्ष्मण कुंजाम को गिरफ्तार किया था और उनके पास से छह लाख रुपये जब्त किए थे जो दो हजार रुपये के बंद हो चुके नोटों में थे।

बयान में कहा गया है कि वे भाकपा (माओवादी) नेताओं के कहने पर विभिन्न बैंक खातों में धनराशि जमा करने जा रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया। बाद में, बीजापुर पुलिस ने नवंबर 2023 में दोनों आरोपियों, गजेंद्र माडवी और लक्ष्मण कुंजाम के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। एनआईए ने पिछले साल फरवरी में मामले की तफ्तीश अपने हाथ में ली थी। उसने इस साल अगस्त में पहला पूरक आरोपपत्र दायर किया। गजेंद्र और लक्ष्मण के खिलाफ नए आरोपपत्र दायर किए गए हैं और एक अन्य गिरफ्तार आरोपी रघु मिडियामी पर भी उस आरोपपत्र में आरोप लगाए गए। एनआईए ने कहा है कि इस मामले की जांच जारी है।

संस्कृति और सभ्यता की धरोहर हैं हमारी परम्पराएं, इनका पोस्टमार्टम नहीं होना चाहिए : आचार्य शांतनु जी महाराज

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कंचौसी (कानपुर देहात)। कंचौसी बाजार के दर्शन सिंह स्मृति महाविद्यालय में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का छठा दिन आस्था और भक्ति से सराबोर रहा। झमाझम बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ डटी रही और वातावरण भक्तिरस से गूंजता रहा। कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि भागवत कथा आत्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य मार्ग है। इसके सुनने से मनुष्य का कर्म और धर्म दोनों बदल जाते हैं। आचार्य शांतनु महाराज ने समाज में बदलते आयोजनों पर चिंता जताते हुए कहा कि आजकल परम्पराओं का मजाक उड़ाया जा रहा है। हमारी परम्पराएं संस्कृति और सभ्यता की धरोहर हैं, इनका पोस्टमार्टम नहीं होना चाहिए। उन्होंने श्रोताओं को प्रेरित किया कि वे अगली पीढ़ियों तक इन मूल्यों को पहुंचाएं।

जागरण में नृत्य नहीं, भक्ति हो

आचार्य शांतनु महाराज ने साफ कहा कि जागरण का उद्देश्य केवल साधना और भक्ति है, न कि मनोरंजन। राधा-कृष्ण के नाम पर मंचों पर नृत्य कराना संस्कृति के साथ खिलवाड़ है। जागरण में भजन और भक्ति का रस होना चाहिए, तभी वह सार्थक है।

सीएम योगी आदित्यनाथ का दिया उदाहरण

कथा को आज के परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए आचार्य शांतनु महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब योगी जी दीपावली को वनवासियों और गरीबों के साथ मनाते हैं, तो यह भागवत का आदर्श है। निज सुख के लिए नहीं, बल्कि परमार्थ और लोककल्याण के लिए जीना ही सच्चा धर्म है।

राम और कृष्ण की लीलाओं का वर्णन

षष्ठम दिवस की कथा में आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीराम ने वनवास झेला और श्रीकृष्ण ने मथुरा से लेकर कुरुक्षेत्र तक धर्म की स्थापना की। इन अवतारों से मनुष्य को यह सीख मिलती है कि धर्म और सत्य के मार्ग पर डटे रहना ही जीवन का उद्देश्य है।

माता-पिता ही साक्षात देवता

कथा के अंत में आचार्य शांतनु महाराज ने कहा इस धरती पर माता-पिता ही सच्चे ईश्वर हैं। उनकी सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। जो इन्हें देवताओं के समान मानता है, वही वास्तव में सनातन संस्कृति का पालन करता है।

मंत्री, महापौर और दिल्ली से आए अतिथि

यह कथा अपनी माता कनकरानी और पिता दर्शन सिंह की स्मृति में भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले, उनकी पत्नी प्रेम शीला सिंह, विकास सिंह भोले (अध्यक्ष स्वामी विवेकानंद युवा समिति) और अमित सिंह आयोजित कर रहे हैं। आज इस अवसर पर प्रांत संघचालक भवानी भीख जी, कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, कानपुर नगर की महापौर प्रमिला पांडेय, पूर्व विधायक दिलीप सिंह उर्फ कल्लू यादव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख राम स्वरूप कटियार, पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश राय, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता संजीव दुबे, आचार्य अरुण पूरी महाराज, श्रीमती नीतू सिंह दीदी समेत सैकड़ों श्रद्धालु और गणमान्यजन मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ में नाबालिग गर्भवती प्रेमिका ने शादी से इनकार करने पर की प्रेमी की ‘हत्या’

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छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले की पुलिस ने प्रेमी की हत्या करने के आरोप में 16-वर्षीय एक गर्भवती लड़की को पकड़ लिया है। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने शहर के गंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत ‘ए-वन लॉज’ में मोहम्मद सद्दाम की हत्या के आरोप में बिलासपुर निवासी एक लड़की को गिरफ्तार कर लिया है। रायपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि सोमवार को लॉज के कर्मचारियों ने पुलिस को वहां के एक कमरे में संदिग्ध गतिविधि की सूचना दी थी, उसके बाद पुलिस दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने कमरे का दरवाजा खोला तब वहां सद्दाम का शव पड़ा हुआ था तथा उसके शरीर पर धारदार हथियार से हमले के निशान थे।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी। पटले ने बताया कि जांच के दौरान जानकारी मिली कि एक नाबालिग लड़की ने बिलासपुर शहर के कोनी थाने में संबंधित हत्या की जानकारी दी है तथा खुद को पुलिस को हवाले कर दिया है। अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि बिहार निवासी सद्दाम कुरूद क्षेत्र में रह रहा था और कुछ समय से उसका बिलासपुर निवासी आरोपी लड़की के साथ प्रेम संबंध था। उन्होंने बताया कि जब आरोपी गर्भवती हुई तब उसने सद्दाम पर शादी का दबाव डाला, लेकिन युवक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। अधिकारी के अनुसार, इस बीच वे शनिवार को ‘ए-वन लॉज’ पहुंचे, जहां रात में दोनों के बीच शादी को लेकर विवाद हुआ।

उन्होंने बताया कि जब शनिवार-रविवार की दरमियानी रात सद्दाम सोया हुआ था तब लड़की ने कथित तौर पर सद्दाम के ही धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी और कमरे में ताला लगाकर चाबी को रेल की पटरी पर फेंक दिया तथा बिलासपुर चली गई। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जब नाबालिग ने बिलासपुर में अपनी मां को घटना की जानकारी दी, तब मां-बेटी कोनी थाना पहुंचे, जहां लड़की ने सद्दाम की हत्या की बात स्वीकार कर ली एवं खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। उन्होंने बताया कि आरोपी लड़की को रायपुर लाया गया है तथा उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।

छत्तीसगढ़ में फिल्म ‘बलिदानी राजा गुरु बालकदास’ को कर मुक्त करने की घोषणा

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सतनामी समाज के प्रसिद्ध गुरू बालकदास पर बनी फिल्म ‘बलिदानी राजा गुरु बालकदास’ को राज्य में कर मुक्त करने की घोषणा की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री साय सोमवार को राजधानी रायपुर के एक मॉल के सिनेमाघर में छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘बलिदानी राजा गुरु बालकदास’ देखने पहुंचे। इस अवसर पर उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक और अन्य लोग मौजूद थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘बलिदानी राजा गुरु बालकदास’ फिल्म साहस और शौर्य की अनुपम गाथा है।

उन्होंने कहा कि गुरु बालकदास ने अंग्रेजों और पिंडारियों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचार और भुखमरी के विरुद्ध न केवल संघर्ष किया, बल्कि समाज को संगठित करने का भी प्रयास किया। उन्होंने शिक्षा की अलख जगाने, सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने और अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का विरोध करने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साय ने इस अवसर पर घोषणा की कि फिल्म ‘बलिदानी राजा गुरु बालकदास’ को छत्तीसगढ़ में कर मुक्त किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक दर्शक इस प्रेरणादायी गाथा को देख सकें और अपने इतिहास तथा विरासत से जुड़ सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”हमारा छत्तीसगढ़ राज्य प्रारंभ से ही वीर शहीदों और संत-महात्माओं की धरती रहा है। आवश्यकता है कि हम अपने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इतिहास को जानें और समझें।” उन्होंने कहा कि यह फिल्म छत्तीसगढ़ की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका, राज्य की समृद्ध संस्कृति, सामाजिक सद्भाव, अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष और जीवन की सहजता को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा की प्रतिभाओं की सराहना करते हुए कहा, ”हमारे कलाकार, निर्देशक और पूरी यूनिट मेहनत और लगन से कार्य कर रही है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा आज दर्शकों के दिलों को छू रहा है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित फिल्म सिटी का निर्माण छत्तीसगढ़ी सिनेमा को बेहतर अधोसंरचना, अधिक अवसर और राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भी सशक्त होगी।” गुरु बालकदास छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज के प्रवर्तक गुरु घासीदास जी के पुत्र थे। उन्होंने सतनामी आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था तथा स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

भागवत कथा केवल धर्मग्रंथ का पाठ नहीं, बल्कि जीवन का विज्ञान है : आचार्य शांतनु महाराज

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कानपुर देहात। कंचौसी बाजार स्थित दर्शन सिंह स्मृति महाविद्यालय चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन आचार्य शांतनु महाराज ने मित्र और मित्रता का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा, जीवन में सबसे सुंदर और महान रिश्ता मित्रता का है, जो रक्त से नहीं बल्कि हृदय से जुड़ता है। सच्चा मित्र वही है, जो सुख-दुःख में साथ खड़ा रहे और धर्म के मार्ग पर प्रेरित करे। बेटा और बेटी में भी कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए, दोनों एक समान हैं। बेटी दो कुलों की शोभा है, वह संस्कारों की धरोहर और भगवान की अनुपम भेंट है।
आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि हर मनुष्य को पारिवारिक सुख भोगते हुए भी प्रभु स्मरण को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धर्मग्रंथ का पाठ नहीं, बल्कि जीवन का विज्ञान है, जो हमें जीने की सही दिशा दिखाती है।

आचार्य शांतनु महाराज ने विशेष रूप से समाज में प्रचलित बेटे और बेटी के भेदभाव पर चिंतन कराया। उन्होंने श्लोक का हवाला देते हुए कहा- ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’। अर्थात जहां स्त्री और कन्या का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। बेटा केवल एक कुल का मान बढ़ाता है, किंतु बेटी मायके और ससुराल दोनों कुलों का गौरव बढ़ाती है। माता सीता का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने जनक और रघुकुल दोनों को सम्मानित किया। अतः कन्या को बोझ नहीं, वरदान मानना चाहिए और उसे शिक्षा व संस्कार देने में कभी भेदभाव नहीं होना चाहिए।

मित्रता की पवित्रता पर भी डाला प्रकाश

इसी क्रम में आचार्य शांतनु महाराज ने मित्रता की पवित्रता पर भी प्रकाश डालते हुए श्रीकृष्ण-सुदामा और श्रीकृष्ण-अर्जुन के प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि मित्रता केवल साथ घूमने-फिरने या हँसी-मजाक तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका अर्थ है सुख-दुःख में साथ देना और धर्म-सत्य के मार्ग पर एक-दूसरे को प्रेरित करना। संस्कृत श्लोक उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा- “सुखे दुःखे च यो मित्रं भवेच्च सुमनाः सदा। सः मित्रं परमं ज्ञेयं प्राणैरपि सुहृद्भवेत्॥” अर्थात सच्चा मित्र वही है, जो हर परिस्थिति में समान भाव से खड़ा रहे और प्राणों से भी बढ़कर मित्र का हित चाहे। उन्होंने बताया कि जब निर्धन सुदामा द्वारका पहुँचे तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गले लगाकर यह संदेश दिया कि सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी या ऊँच-नीच का कोई स्थान नहीं होता। गीता में भी भगवान ने अर्जुन को “भक्त और सखा” कहकर इस अनोखे संबंध की पवित्रता को स्थापित किया।

16 संस्कारों का भी किया वर्णन

कथा के दौरान आचार्य शांतनु महाराज ने सोलह संस्कारों का भी विस्तार से वर्णन किया और कहा कि यदि माता-पिता अपनी संतान को इन संस्कारों की थाती सौंपेंगे तो वही पीढ़ियाँ सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाएँगी। उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कार और संस्कृति का संरक्षण ही हिंदुत्व को जीवित रखेगा और यही भारतभूमि की असली पहचान है।

गूंजते रहे जय श्री राम और जय श्री कृष्ण के जयकारे

पूरे दिन कथा स्थल पर भजन-कीर्तन, हवन-पूजन और प्रसाद वितरण का क्रम चलता रहा। श्रद्धालु कथा में डूबकर “जय श्रीराम” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान करते रहे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अकबरपुर के सांसद देवेंद्र सिंह भोले, उनकी धर्मपत्नी प्रेमशीला सिंह और युवा नेता स्वामी विवेकानंद युवा समिति के अध्यक्ष विकास सिंह भोले उपस्थित रहे। श्रीमद् भागवत कथा में कानपुर नगर के सांसद रमेश अवस्थी, विधायक महेश त्रिवेदी, भाजपा कानपुर उत्तर के जिला अध्यक्ष अनिल दीक्षित, ब्लॉक प्रमुख अनुराधा अवस्थी और राकेश कटिहार, पूर्व जिला अध्यक्ष श्याम सिंह सिसौदिया समेत सैकड़ों श्रद्धालु और गणमान्यजन भी उपस्थित रहे।

प्रदेश नेतृत्व पर भरोसा खो चुकी है कांग्रेस, दिल्ली से भेजे जा रहे पर्यवेक्षक: ठाकुर

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छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अब अपने ही प्रदेश नेताओं पर भरोसा नहीं कर पा रहा है। इसी कारण छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का निर्णय दिल्ली से किया जा रहा है और इसके लिए पर्यवेक्षक भेजे गए हैं। श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की कार्यशैली में स्पष्ट अंतर है। कांग्रेस हाईकमान को आदिवासी नेतृत्व पर कभी भरोसा नहीं रहा, यही कारण है कि बैज को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं दिया गया और दिल्ली से बार-बार हस्तक्षेप किया जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं और नेताओं का अपमान भी आम हो चुका है।

हाल ही में प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी में एक पूर्व आदिवासी मंत्री को मंच से माइक छीनकर बोलने से रोका गया, लेकिन पार्टी ने उस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि बैज को बदलने के लिए कांग्रेस के ही वरष्ठि नेता और पूर्व मंत्री रवद्रिं चौबे आवाज उठा चुके हैं। वहीं, जिला अध्यक्षों की बैठक में बैज और बघेल समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने नेताओं को अपने “चमचों” को संभालने की नसीहत तक दी। श्री ठाकुर ने दावा किया कि कांग्रेस इस समय छत्तीसगढ़ में न केवल मुद्दाविहीन बल्कि नेतृत्वविहीन भी हो चुकी है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री वष्णिुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार सुशासन की अवधारणा को मूर्त रूप दे रही है। ऐसे हालात में कांग्रेस हाईकमान को प्रदेश नेतृत्व पर भरोसा न होने के कारण 17 पर्यवेक्षक छत्तीसगढ़ भेजने पड़े हैं।