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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सीआरपीएफ कांस्टेबल ने की आत्महत्या

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Shadow of man with pistol gun turned on his head wants to commit suicide. light and shadow

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के नैमेड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत मिनगाचल गांव में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 22वीं वाहिनी में पदस्थ आरक्षक पप्पू यादव ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली।

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में जानकारी मिली है कि पप्पू यादव मंगलवार को छुटटी से वापस आया था और उसने बुधवार सुबह लगभग पांच बजे अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। अधिकारियों ने बताया कि गोली की आवाज सुनने के बाद जब शिविर के अन्य जवान वहां पहुंचे तब उन्होंने देखा कि यादव खून से लथपथ पड़ा है। बाद में इसकी सूचना अधिकारियों को दी गई। उन्होंने बताया कि यादव बिहार के भोजपुर जिले का निवासी था। उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है तथा जांच की जा रही है।

ईडी ने 500 करोड़ रुपये के छत्तीसगढ़ चिकित्सा आपूर्ति ”घोटाला” मामले में छापे मारे

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रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के चिकित्सा आपूर्ति घोटाले की धन शोधन जांच के तहत बुधवार को छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि रायपुर, दुर्ग और आसपास के इलाकों में कुछ सरकारी अधिकारियों, चिकित्सकीय सामान के आपूर्तिकर्ताओं और एजेंट के अलावा कुछ ”बिचौलियों” से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी की जांच अप्रैल में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) द्वारा छह व्यक्तियों के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र से संबंधित है जिसमें 2023 में चिकित्सा उपकरणों और रासायनिक रसायनों की खरीद में कथित अनियमितताओं से राज्य के खजाने को 550 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया है।

एसीबी/ईओडब्ल्यू ने 22 जनवरी को रायपुर स्थित राज्य सरकार द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससीएल) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के अधिकारियों के साथ-साथ चार कंपनियों मोक्षित कॉर्पोरेशन (दुर्ग), सीबी कॉर्पोरेशन (दुर्ग), रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम एचएसआईआईडीसी (पंचकुला, हरियाणा) और श्री शारदा इंडस्ट्रीज (रायपुर) के खिलाफ मामला दर्ज किया था। ऐसा आरोप है कि इस घोटाले में स्वास्थ्य केंद्रों में इन वस्तुओं की आवश्यकता/उपलब्धता की जांच किए बिना रासायनिक रसायनों और उपकरणों की खरीद की गयी। एसीबी/ईओडब्ल्यू ने कहा था कि सीजीएमएससीएल ने मोक्षित कॉर्पोरेशन और उसकी मुखौटा कंपनी के साथ मिलीभगत करके जनवरी 2022 से 31 अक्टूबर 2023 के बीच अरबों रुपये की खरीदारी की है।

शराब घोटाले में 22 आबकारी अधिकारियों की जमानत याचिका खारिज, कभी हो सकती है गिरफ्तारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले मामले में उस समय एक नया मोड आ गया जब इस मामले में निलंबन झेल रहे कुल 22 आबकारी अधिकारियों ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी जिसे रायपुर की विशेष अदालत ने खारिज कर दिया है। बताया जाता है कि अब इन निलंबित 22 अधिकारियों की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है। गौरतलब है कि प्रदेश में 3200 करोड़ रुपये का शराब घोटाला हुआ है जिसकी जांच चल रही है इस मामले में कई नेताओं की गिरफ्तारी भी हो चुकी है । गौरतलब है कि इस मामले में ईओडब्ल्यू ने 2300 पन्नों का चालान पेश किया था, जिसमें घोटाले में इन अधिकारियों की संलप्तिता का खुलासा हुआ था ।

उल्लेखनीय है कि यह घोटाला 2019 से 2023 के बीच का है, जब आबकारी विभाग के अधिकारियों ने कथित तौर पर अनवर ढेबर के सिंडिकेट के साथ मिलकर अवैध शराब बक्रिी का खेल रचा था। जांच में सामने आया कि बिना ड्यूटी पेड शराब को सरकारी दुकानों में बेचा गया, जिससे राज्य को भारी राजस्व का नुकसान हुआ। ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि इस घोटाले से 88 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की गई। अनवर ढेबर को इस रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसे 90 करोड़ रुपये का कमीशन मिला।

रायपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता संजय राठौर ने इस घोटाले को सत्ताधारी नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा बताया है और कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है। इस मामले में कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री कवासी लखमा और पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। ईओडब्ल्यू और ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि 2017 में बदली गई आबकारी नीति ने इस घोटाले की राह आसान कर दी थी।

पत्नी के सामने प्रेमी ने कर दी पति की हत्या, पुलिस हिरासत में पहुंचे प्रेमी व पत्नी

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जांजगीर/चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में प्रेम-प्रसंग के चलते एक व्यक्ति की नृशंस हत्या कर दी गई। बताया जाता है कि अकलतरा थाना क्षेत्र के कोटमीसोनार गांव में एक महिला के प्रेमी ने उसके पति की गैंती से वार कर हत्या कर दी। वारदात के वक्त पत्नी मौके पर मौजूद थी। आरोपी हत्या के बाद फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने 24 घंटे के भीतर उसे बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान 37 वर्षीय अमरनाथ केवट के रूप में हुई है। वह कोटमीसोनार गांव में अपनी पत्नी ईश्वरी केवट (32) के साथ रहता था। ईश्वरी का प्रेम संबंध अपने ही रश्तिेदार युवराज केवट से था, जो मुंगेली जिले के महुआकापा गांव का निवासी और पेशे से राजम्त्रिरी है।

शनिवार अपराह्न करीब दो बजे युवराज स्कूटी से अमरनाथ के घर पहुंचा और घर में रखी गैंती से उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अमरनाथ को चेहरे और सीने पर गंभीर चोटें आईं। वह चीखते हुए गिर पड़ा। उसकी मां ने शोर सुनकर मौके पर पहुंचकर बेटे को खून से लथपथ हालत में देखा और तत्काल ग्रामीणों की मदद से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन गंभीर चोटों के चलते इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के वक्त अमरनाथ की पत्नी ईश्वरी भी मौके पर थी, जो कुछ दिन पहले ही अपने प्रेमी के घर रहने के बाद पति के पास लौट आई थी।

पुलिस के अनुसार ईश्वरी और युवराज के बीच पिछले एक साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। अकलतरा पुलिस ने मौके से हत्या में प्रयुक्त गैंती को बरामद कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। अकलतरा की सीएसपी कविता ठाकुर ने बताया है कि आरोपी युवराज को बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। मृतक की पत्नी ईश्वरी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में 4,000 नए मोबाइल टावर लगाएगा बीएसएनएल

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दूरसंचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने रविवार को बताया कि सरकारी कंपनी बीएसएनएल छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में 4,000 नए मोबाइल टावर लगाने की योजना पर काम कर रही है। मंत्री ने यह जानकारी छत्तीसगढ़ के तीन दिवसीय दौरे के दौरान दी। इस दौरान उन्होंने आकांक्षी जिला कार्यक्रम सहित केंद्र सरकार की योजनाओं और दूरसंचार एवं ग्रामीण विकास मंत्रालयों के तहत परियोजनाओं की समीक्षा की। एक बयान में कहा गया, ”केंद्र सरकार डिजिटल संचार को मज़बूत करने के लिए छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरदराज के इलाकों में 4,000 नए बीएसएनएल टावर लगाने की योजना पर काम कर रही है।

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं दूरसंचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने रायपुर में साझा की।” पेम्मासानी ने कहा कि सुरक्षा बलों और वन विभाग से आवश्यक मंज़ूरी मिलने के बाद इन टावरों की स्थापना चरणों में की जाएगी। उन्होंने कहा, ”बीएसएनएल पूरे देश में उच्च गुणवत्ता वाली 4जी सेवाएं दे रही है और इस विस्तार के साथ, हम देश के अंतिम छोर के गांवों तक डिजिटल संपर्क पहुंचाने के मिशन को साकार कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य ‘मिशन मोड’ में किए जा रहे हैं और इन क्षेत्रों में घर-घर सेवाएं पहुंचाने की रणनीति अपनाई जा रही है। मंत्री ने कहा, ”इन क्षेत्रों के स्कूलों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे छात्र जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकेंगे। इसके अलावा, दिव्यांग छात्रों को विशेष सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ 22 अगस्त को करेगी काम बंद आंदोलन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ ने विभिन्न मांगों को लेकर 22 अगस्त को काम बंद आंदोलन करने का निर्णय लिया है। इस दिन सारे अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। फेडरेशन ने प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता, डीए की बकाया राशि को जीपीएफ खाते में समायोजित करने, वेतन विसंगति सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर 22 अगस्त को सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है।

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि हमारी प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता, डीए की बकाया राशि को जीपीएफ खाते में समायोजित करने, वेतन विसंगति सहित 11 सूत्रीय मांग है जिसे लेकर यह आंदोलन किया जाएगा। इस प्रांतव्यापी आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आहूत करने के लिए प्रांत अध्यक्षों, पदाधिकारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। साथ ही समस्त जिला प्रभारियों से अपने प्रभार के जिले में 10 अगस्त तक समीक्षा बैठक अनिवार्य रूप से संपन्न करने के लिए कहा गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार धर्मांतरण पर नया कानून ला रही है : सीएम साय

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शदाणी दरबार में आयोजित हिंदू राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा कि प्रदेश में रोज किसी न किसी जगह से धर्मांतरण की खबर आ रही जिसे लेकर हमारी सरकार धर्मांतरण पर नया कानून लाने जा रही है। सीएम साय ने बताया कि नए कानून का ड्राफ्ट तैयार हो रहा है जिसे विधानसभा के अगले सत्र में पटल पर रखा जाएगा। उन्होंने अधिवेशन में कहा कि राज्य में कोई भी गाय सड़कों पर नहीं दिखनी चाहिए और इसके लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में सवा सौ पंजीकृत गौशालाएं हैं, जिन्हें पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है. नगरीय क्षेत्रों में भी गौशालाएं बनाई गई हैं और निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों पर मवेशी नजर न आएं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘जब गाय दूध देना बंद कर देती है, तो उसे सड़कों पर छोड़ दिया जाता है. यह स्थिति ठीक नहीं है. हिंदू भाइयों को इस पर ध्यान देना होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में सड़कों पर कोई मवेशी नहीं दिखेगा। सीएम साय ने जशपुर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च है लेकिन स्व. दिलीप सिंह जूदेव और उनके पुत्र प्रबल प्रताप जूदेव ने ”घर वापसी” अभियान को मजबूती दी है। कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता गांव-गांव में हिंदू धर्म के प्रचार में जुटे हैं।

भाजपा और ईडी हमारे नेतृत्व को कमजोर करना चाहती है, छत्तीसगढ़ में बोले सचिन पायलट

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रायपुर। कांग्रेस संगठन के छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों ही हमारे नेतृत्व को कमजोर करने का काम और हमें अलग करने का काम कर रहे हैं। शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश का सियासी पारा गरम है। इस विषय पर जहां कांग्रेस ने पहले चक्का-जाम किया वहीं अब श्री पायलट ने शनिवार को खास तौर पर जेल में बंद चैतन्य बघेल और पूर्व मंत्री कवासी लखमा से मिलने सेंट्रल जेल रायपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जेल परिसर में जाकर चैतन्य और पूर्व मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात कर उनका हाल जाना।

इस दौरान उन्होंने जेल में ही अधिकारियों को कहा कि इन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होना चाहिए और स्वास्थ्य परक्षिण समय समय पर होता रहना चाहिए। जेल परिसर से बाहर आने के बाद श्री पायलट मीडिया से बात करते हुए कहा,ह्लभाजपा सरकार ने ये ठान लिया है कि कांग्रेस का नेतृत्व चाहे राष्ट्र का हो या प्रदेशों का ईडी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी व सोनिया गांधी जी सभी लोगों को अलग करने की कोशिश की है तथा देश का ध्यान डायवर्ट करने की चरत्रि हनन करने की कोशिश करते हैं। भ्रष्टाचार का नाम लेकर वैचारिक विरोध करने वाले लोगों पर वो आक्रमण कर रहे हैं। आज मैं चैतन्य बघेल से मिला हूं, कवासी लखमा से मिला हूं।

इन सभी को इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि ये मुखर होकर उनका विरोध करते हैं जो प्रदेश की जल जंगल और जमीन को बेचना चाहते हैं। आप सरकार का विरोध करो उद्योगपतियों का विरोध करो ये आप पर जरूर कार्रवाई करेंगें, हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। हम मजबूती से लड़ते रहेगें कांग्रेस एक है और राजनीितिक संघर्ष करते रहेगें। जेल में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है लखमा जी का स्वास्थ्य खराब रहता है मैंने अधिकारियों से आग्रह किया है कि उनको समय पर दवा और जांच होती रहे। चैतन्य बघेल से मिला उसके चेहरे पर मुस्कान थी उसने कहा मै डरने वाला नहीं हूं भाजपा कितना भी कुछ मेरे परिवार को कर ले हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगें। इधर पायलट के छत्तीसगढ़ दौरे पर भाजपा का भी बयान आया है। पार्टी के विधायक पुरंदर मश्रिा ने कहा कि दल्लिी में पप्पू और छत्तीसगढ़ में बिट्टू यही कांग्रेस की राजनीति बची है। मिश्रा ने कहा,ह्लकेवल परिवार तक सिमट कर कांग्रेस रह गई है।

140 वर्षों का इतिहास जिस पार्टी का है अब वो सर्फि परिवारों की सेवा में लगी है। क्या अब उनके पास यही बचा है। सचिन पायलट और कांग्रेस की को बता दूं कि आर्थिक नाकेबंदी जो आपने की वो आगे पहले अपने घरों में की होती तो ये समस्या आती ही नहीं अपने प्रदर्शन के दौरान किराए पर मजदूर बुलाए थे उनका पेमेंट नहीं होने पर वो मजदूर हल्ला मचा रहे थे। गौरतलब है कि ईडी ने हाल ही में शराब घोटाले के मामले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया है। फिलहाल चैतन्य रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

छत्तीसगढ़ में आफत बनी बारिश, रायपुर के घरों में घुसा पानी, गुस्साए लोगों ने मुंबई-हावड़ा हाइवे पर लगाया जाम

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रायपुर। बीती रात हुई बारिश से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार रात हुई भारी बारिश से जनजीवन बुरीतरह प्रभावित है। स्मार्ट सिटी के कई इलाके ऐसे हैं जो जलमग्न है। वहीं शहर के प्रोफेसर कालोनी वासियों का हाल और भी बुरा है उनके घरों में कमर तक पानी भर गया है। इसके चलते लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस जलभराव से खफ़ा लोगों ने शनिवार को मुंबई-हावड़ा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। ये जाम लगभग दो घंटे से भी कम समय का हुआ लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इतनी देर में ही मुख्यमार्ग पर लगभग 10 किलोमीटर से लंबा जाम लग गया था ।

कालोनीवासियों के सड़क पर बैठ जाने की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं थी जिसके बाद ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हुई। तब कुछ ट्रैफिक के जवान वहां पहुंचे और उसके बाद बढ़ते जाम को देखकर प्रशासन भी तत्काल हरकत में आया और पुलिस बल चक्काजाम हटाने पहुंचा। काफी मान मनौव्वल के बाद लोगों को सड़कों से हटाया गया। कालोनी वाले ने बताया कि बारिश में वे पानी की समस्या से बहुत परेशान है क्योंकि एक नाला तकनीकी दृष्टिकोण से गलत बनाया गया है, जिसके कारण पानी का निकासी नहीं हो पाता है, जिसके कारण बरसात में हल्की वर्षा होने के कारण यहां पर पानी भर जाता है। बरसात के दिनों में घरों के अंदर पानी भर जाता है और घर में रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फ्रिज,टीवी,वाशिंग मशीन खराब हो जाते हैं।

भूपेश बघेल पर ईडी के शिकंजे के मायने

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अभिषेक उपाध्याय। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह कार्रवाई न केवल एक व्यक्ति के खिलाफ जांच के रूप में देखी जा रही है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी गहरे हैं।

ईडी ने बघेल पर कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में पूछताछ तेज की है। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी को कुछ ऐसे दस्तावेज और लेन-देन के सबूत मिले हैं, जो कोयला परिवहन, शराब वितरण और अन्य सरकारी ठेकों से जुड़े हैं। बघेल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह सब “राजनीतिक प्रतिशोध” की कार्रवाई है और केंद्र की भाजपा सरकार विरोधी नेताओं को निशाना बना रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बघेल पर ईडी की जांच, कांग्रेस को कमजोर करने की एक रणनीतिक कवायद हो सकती है, खासकर तब जब राज्य में पार्टी अपनी जमीन बचाने की कोशिश कर रही है। बघेल, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय चेहरों में से एक रहे हैं और भाजपा के लिए वे हमेशा चुनौती बने रहे हैं।

इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने यह भी हैं कि आगामी चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाया जा सके। वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग के तौर पर देख रही है।

कुल मिलाकर, भूपेश बघेल पर ईडी की कार्रवाई सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में शक्ति संतुलन और केंद्र-राज्य संबंधों की नई परिभाषा भी तय कर सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मामला राजनीतिक गति पकड़ता है या वास्तव में कानूनी मोड़ लेता है।