Home Blog Page 36

छत्तीसगढ़ में कोयला खदान का एक हिस्सा ढहने से दो युवकों की मौत, एक अन्य घायल

0

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मंगलवार को एक कोयला खदान की दीवार ढहने से दो युवकों की मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना सुबह के समय जिले की ‘साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ (एसईसीएल) की गेवरा-दीपका खदान में उस वक्त हुई जब मुंडापार बाजार निवासी विशाल यादव (18), धन सिंह कंवर (24) और साहिल धनवार (19) बिना अनुमति क्षेत्र में दाखिल हुए। उन्होंने बताया कि कथित तौर पर कोयला चोरी करने की कोशिश में खदान की दीवार ढहने से तीनों मलबे में दब गए।

अधिकारियों ने बताया कि यादव और कंवर की मौके पर ही मौत हो गई तथा धनवार गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि मौके पर ग्रामीण इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचित किया। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचा और शवों तथा घायल को अस्पताल में पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी सनीश चंद्र ने बताया कि खदान के बाहरी क्षेत्र की दीवार पर कुछ कोयला रह जाता है और दीवार करीब 15 से 25 फुट ऊंची होती है। उन्होंने बताया कि संभवत: इस स्थान से कोयला चोरी करते समय यह ढह गई जिसके कारण दुर्घटना हुई। चंद्र ने बताया, ‘एसईसीएल प्रबंधन ने सभी से अपील की है कि वह इस प्रकार के जोखिम भरे और गैरकानूनी गतिविधियों से दूरी बनाएं तथा किसी प्रकार के प्रलोभन में न आएं।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र पामेड़ में खुली ग्रामीण बैंक की शाखा, मुख्यमंत्री साय ने की शुरुआत

0

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के पामेड़ इलाके में राज्य सरकार ने ग्रामीण बैंक की शाखा की शुरुआत की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को बीजापुर जिले के अंदरूनी और पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे पामेड़ इलाके में डिजिटल माध्यम से छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा की शुरुआत की। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर कहा, ”जिस पामेड़ को कभी माओवादियों के बटालियन नंबर-एक का गढ़ माना जाता था, आज वहां बैंक खुल रहे हैं, कन्या आश्रम बन रहे हैं और लोग खुले मन से सुशासन शिविरों में भाग ले रहे हैं। यह बदला हुआ बस्तर है जो आत्मविश्वास, विकास और लोकतंत्र का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने इसे विकास और विश्वास की नयी सुबह बताते हुए कहा कि अब ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं के लिए 100 किलोमीटर दूर आवापल्ली नहीं जाना पड़ेगा। यह पहल सरकार के सुशासन और समावेशी विकास के दृष्टिकोण को दर्शाती है। साय ने बताया कि इस बैंक शाखा से पामेड़ और आसपास के 50 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा, जहां अब खाता खोलने, पैसा निकालने और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं की राशि लेने में सुविधा होगी। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को आश्वस्त किया कि अब उन्हें योजना की राशि के लिए लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने पामेड़ में 1.62 करोड़ रुपये की लागत से बने 50 लोगों की क्षमता वाले आदिवासी कन्या आश्रम का भी लोकार्पण किया।

साय ने कहा कि कन्या आश्रम के माध्यम से आगामी समय में बस्तर की बेटियां शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़कर बस्तर को नया नेतृत्व प्रदान करते हुए क्षेत्र के विकास को नयी ऊंचाई पर ले जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पामेड़ में अब पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की जा रही है ताकि आसपास के कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे बच्चों को समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र में लाएं और स्वास्थ्य लाभ लें। अधिकारियों ने बताया कि इस मौके पर ‘सुशासन तिहार’ के तहत समाधान शिविर का भी आयोजन किया गया जिसमें क्षेत्रीय जनसमस्याओं का त्वरित समाधान किया गया।

नक्सलवाद की टूटती कमर और शांति की उम्मीदें

0

अभिषेक उपाध्याय। भारत में नक्सलवाद लंबे समय से सुरक्षा और विकास दोनों के लिए चुनौती रहा है। विशेषकर छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और ओड़िशा जैसे राज्यों में यह सक्रिय रहा। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त रणनीति, सुरक्षा बलों की सटीक कार्रवाई और स्थानीय विकास कार्यक्रमों ने नक्सलवाद की कमर तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसक घटनाओं में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे न केवल नागरिकों की सुरक्षा बेहतर हुई है, बल्कि निवेश और विकास परियोजनाओं को भी गति मिली है। सुरक्षा बलों की मोर्चेबंदी, तकनीकी निगरानी और लोकल पुलिस की सक्रियता ने नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया है। साथ ही, ग्राम स्तर पर सुरक्षा और सामाजिक विकास के कार्यक्रम—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार—ने लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सलवाद को केवल सुरक्षा बलों के बल पर समाप्त करना संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक और आर्थिक समावेशिता, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और स्थानीय नेतृत्व को सशक्त करना जरूरी है। इन उपायों से न केवल नक्सलियों के लिए अपनाई गई हिंसा का विकल्प सीमित होता है, बल्कि शांति और स्थायित्व की संभावनाएँ भी बढ़ती हैं।

हालांकि चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। कुछ क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियाँ जारी हैं और विकास के लाभ सभी तक नहीं पहुँच पाए हैं। लेकिन केंद्र और राज्य की योजनाओं की निरंतर निगरानी और सुधार से यह आशा बढ़ी है कि नक्सलवाद जल्द ही सीमित और नियंत्रित हो जाएगा।

निष्कर्षतः, नक्सलवाद की टूटती कमर से भारत के उन हिस्सों में शांति की उम्मीदें जग गई हैं, जहां दशकों तक हिंसा और भय का शासन था। यदि विकास और सुरक्षा का संतुलन बनाए रखा गया, तो आने वाले वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और समृद्धि संभव हो सकेगी।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का लिया फैसला

0

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शुक्रवार को सुरक्षाबलों के समक्ष कुल 87 लाख 50 हजार रुपये के इनामी 24 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इनमें से 20 नक्सलियों पर 50,000 से लेकर 10 लाख रुपए तक के इनाम घोषित थे। सरकार की प्रभावी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति झ्र 2025 और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक्स पर ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मार्च 2026 तक देश-प्रदेश से लाल आतंक का समूल नाश निश्चित है। यह आत्मसमर्पण उसी निर्णायक यात्रा की एक कड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब नक्सली भी समझ चुके हैं कि हिंसा का रास्ता अंतहीन विनाश की ओर ले जाता है। अब नक्सली उग्रवाद की राह छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। हम इन आत्मसमर्पित साथियों के पुनर्वास और पुनरुत्थान के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं।

बसवराजू को मार गिराने से नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ने में सफल हुए: विष्णु देव साय

0

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बृहस्पतिवार को कहा कि शीर्ष माओवादी नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराने के साथ ही सरकार ने नक्सलवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी है। प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का महासचिव और पोलित ब्यूरो का सदस्य बसवराजू उन 27 नक्सलियों में शामिल था जिन्हें सुरक्षाबलों ने बुधवार को नारायणपुर और बीजापुर जिलों की सीमा पर अबूझमाड़ के जंगलों में मार गिराया। साय ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”तीन दशकों में पहली बार हुआ है कि महासचिव स्तर का कोई माओवादी मारा गया हो। यह असाधारण कामयाबी है और इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सलवाद के ताबूत में हमने अंतिम कील जड़ दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”नक्सल आंदोलन की रीढ़ कहा जाने वाला भाकपा (माओवादी) का महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य बसवराजू उर्फ गगन्ना, इस कार्यवाही में ढेर किया गया है। इसकी गिनती माओवादियों में नंबर एक के रूप में होती थी। बसवराजू के ऊपर सवा तीन करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इसमें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक करोड़ रुपये, एनआईए द्वारा 50 लाख रुपये, आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा 25 लाख रुपये तथा ओडिशा सरकार द्वारा 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था।” साय ने कहा, ”इस बड़ी सफलता से हमने नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ने में कामयाबी हासिल की है। हमारी इस सफलता के पीछे हमारे सुरक्षा बलों के जवानों का शौर्य और साहस है। उन पर हमें गर्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”हमारे जवानों का हौसला अपने चरम पर है, नक्सलियों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।” साय ने नक्सलियों से बातचीत के सवाल पर कहा, ”बंदूक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती। नक्सलवाद ने भोले भाले आदिवासी लोगों के जीवन को तबाह किया है। आज बस्तर का हर व्यक्ति विकास चाहता है, गोली का जवाब गोली से और बोली का जवाब बोली से हमारी सरकार की नीति रही है।” मुख्यमंत्री ने बताया, ”हमारी सरकार ने बीते डेढ़ साल में चार सौ से अधिक नक्सलियों को मार गिराया है तथा 1422 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में मुठभेड़, एक कोबरा कमांडो और एक नक्सली मारा गया

0

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बृहस्पतिवार को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक कोबरा कमांडो की मृत्यु हो गई तथा मुठभेड़ में एक नक्सली मारा गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि सुकमा और बीजापुर जिले के सीमावर्ती तुमरेल क्षेत्र में माओवादियों के उपस्थिति की सूचना पर बुधवार को सुकमा जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), एसटीएफ और कोबरा कमांडो के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान आज सुबह से सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच रूक-रूक कर मुठभेड़ जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में कोबरा कमांडो की मृत्यु हो गई तथा सुरक्षाबलों ने एक नक्सली को मार गिराया है। अपुष्ट सूचनाओं के अनुसार एक कोबरा कमांडो घायल भी हुआ है। उन्होंने बताया कि घायलों को निकालने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है। कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विशेष इकाई है जिसे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में तैनात किया गया है।

छत्तीसगढ़ में मारे गए 27 नक्सलियों में शीर्ष माओवादी नेता बसवराजू भी शामिल: अमित शाह

0

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नक्सल आंदोलन के शीर्ष नेता और रीढ़, भाकपा-माओवादी का महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू बुधवार को छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए 27 खूंखार नक्सलियों में शामिल था। शाह ने यह भी कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के तीन दशकों में यह पहली बार है कि महासचिव स्तर के किसी नेता को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। गृह मंत्री ने ‘एक्स’ पर कहा, “ नक्सलवाद को खत्म करने की लड़ाई में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। आज, छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक अभियान में, हमारे सुरक्षा बलों ने 27 खूंखार माओवादियों को ढेर कर दिया है, जिनमें भाकपा-माओवादी का महासचिव, शीर्ष नेता और नक्सल आंदोलन की रीढ़ नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू भी शामिल है।

इस बड़ी सफलता के लिए बहादुर सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 54 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और 84 अन्य ने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने कहा, ”मोदी सरकार 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए संकल्पबद्ध है।” अधिकारियों ने बताया कि बसवराजू की उम्र करीब 70 साल थी। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिलों के त्रि-जंक्शन पर अभुजमाड़ के घने जंगलों में हुई। अभियान में नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंडागांव के डीआरजी कर्मी शामिल थे और यह दो दिन पहले शुरू किया गया था। माओवादियों की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्यों के साथ-साथ माड़ डिवीजन के वरिष्ठ कैडर और पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) के सदस्यों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान शुरू किया गया।

छत्तीसगढ़ में 27 माओवादियों को ढेर करने पर बोले प्रधानमंत्री मोदी- हमें अपनी सेना पर गर्व

0

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि उन्हें छत्तीसगढ़ में 27 माओवादियों को मार गिराने वाले सुरक्षा बलों पर गर्व है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, “इस उल्लेखनीय सफलता के लिए हमें अपने सुरक्षा बलों पर गर्व है। हमारी सरकार माओवाद की बुराई को समाप्त करने तथा अपने लोगों के लिए शांतिपूर्ण एवं प्रगतिशील जीवन सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि नक्सल आंदोलन के शीर्ष नेता और रीढ़, भाकपा-माओवादी का महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू बुधवार को छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए 27 खूंखार नक्सलियों में शामिल था। शाह ने यह भी कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई के तीन दशकों में यह पहली बार है कि महासचिव स्तर के किसी नेता को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। अधिकारियों ने बताया कि बसवराजू की उम्र करीब 70 साल थी। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिलों के त्रि-जंक्शन पर अभुजमाड़ के घने जंगलों में हुई।

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 27 नक्सली ढेर

0

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 27 नक्सलियों को मार गिराया है। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षाबलों ने इस मुठभेड़ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को मार गिराया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में सुरक्षाबल का एक जवान शहीद हो गया तथा कुछ अन्य जवान घायल हो गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित अबूझमाड़ के इलाके में नक्सलियों की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्य तथा माड़ डिवीजन और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के बड़े कैडर की मौजूदगी की सूचना पर जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंडागांव के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों के जवान आज जब क्षेत्र में थे तब नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। बाद में सुरक्षाबल के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस अभियान के दौरान 27 नक्सलियों के शव और अनेक हथियार बरामद किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान एक डीआरजी जवान शहीद हो गया तथा कुछ अन्य जवानों को चोटें पहुंची है। सभी घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है। घायल हुए सभी जवान खतरे से बाहर हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले कई दिनों से जारी इस अभियान के दौरान कई वरिष्ठ स्तर के माओवादी कैडर के मारे जाने या गंभीर रूप से घायल होने का अनुमान है। अधिकारियों ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अनेक चुनौतियों के बावजूद, सुरक्षाबल के जवान वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ इस निर्णायक अभियान को पूरी प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। क्षेत्र में अभियान लगातार जारी है। सूत्रों ने बताया कि इस नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव बसवराजू (70) को मार गिराया है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने बसवराजू के मारे जाने की पुष्टि नहीं की है। माओवादियों ने नवंबर 2018 में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि माओवादियों की केंद्रीय समिति ने बसवराजू को नया महासचिव चुना था। बसवराजू ने गणपति का स्थान लिया था। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया था कि सुरक्षाबलों ने इस मुठभेड़ में शीर्ष स्तर के कई नक्सलियों को मार गिराया है।

नक्सलियों से बातचीत के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने कहा था, ”केंद्र और राज्य की सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दो बार बस्तर के प्रवास पर कहा कि ‘मैं निवेदन करता हूं कि नक्सली मुख्यधारा में जुड़े।’ मुख्यमंत्री ने भी यही कहा है। मेरा कहना है कि उचित लोग बातचीत करें, चर्चा करें। हथियार से समस्या का हल नहीं होता है, नक्सलियों को मुख्यधारा से जुड़ना चाहिए।” छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2023 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में नयी सरकार के गठन के बाद से नक्सल विरोधी अभियान तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक केंद्र ने मार्च 2026 तक देश को नक्सल समस्या से मुक्त करने का संकल्प लिया है। सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस महीने की 14 तारीख को एक संवाददाता सम्मेलन में बताया था कि सुरक्षाबलों ने बस्तर क्षेत्र के बीजापुर और पड़ोसी राज्य तेलंगाना की सीमा पर स्थित करेगुट्टालू की पहाड़ी में 21 दिन तक चले सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान में 31 नक्सलियों को मार गिराया था तथा बड़ी संख्या में हथियार और विस्फोटक बरामद किया था। आज की कार्रवाई के साथ ही इस वर्ष अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 200 नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें से 183 बस्तर संभाग में मारे गए हैं। बस्तर संभाग में बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव समेत सात जिले शामिल हैं।

शिक्षकों की न्यूनतम संख्या में कटौती के नए नियम का कांग्रेस ने किया विरोध

0

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य में नये सेटअप के तहत शिक्षकों की न्यूनतम संख्या में कटौती और युक्तियुक्तकरण के नए नियम का विरोध किया है। बैज ने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने साय सरकार ने षड्यंत्र रचा है, जिससे छत्तीसगढ़ के लगभग 5000 स्कूल बंद हो जाएंगे, साय सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा नुकसान बस्तर और सरगुजा के आदिवासी अंचलों में पढ़ने वाले बच्चों पर पड़ेगा। नए सेटअप में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में एचएम को शिक्षकीय पद मानते हुए प्राइमरी में 30 और मिडिल में 35 बच्चों के बीच एक शिक्षा का सेटअप घोषित किया गया है। प्राथमिक शालाओं में पहली व दूसरी में तीन-तीन विषय एवं तीसरी, चौथी, पांचवी में चार-चार विषय के अनुसार कुल 18 विषय होते हैं, जिन्हें वर्तमान समय में तीन शिक्षकों को 40 मिनट का 6-6 कक्षा लेना होता है, अब युक्तियुक्तकरण के नए नियम के बाद दो ही शिक्षकों के द्वारा 18 कक्षाओं को पढ़ाना कैसे संभव हो सकता है?

मिडिल स्कूल में तीन क्लास और छह सब्जेक्ट इस हिसाब से कुल 18 क्लास और 60 बच्चों की कुल संख्या में एचएम और उसके साथ केवल एकमात्र शिक्षक कैसे 18 क्लास ले पाएंगे? इसके अतिरिक्त मध्यान भोजन की व्यवस्था डाक का जवाब और अन्य गैर शिक्षकीय कार्यों की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर रहेगी बैज ने कहा कि स्कूलों को जबरिया बंद किए जाने से न केवल शिक्षक बल्कि उन स्कूलों से संलग्न हजारों रसोईया, स्लीपर और मध्यान भोजन बनाने वाली महिला, स्वसहायता समूह की बहनों के समक्ष जीवन यापन का संकट उत्पन्न हो जाएगा। नए सेटअप के तहत सभी स्तर प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलो में शिक्षकों के न्यूनतम पदों में कटौती के चलते युवाओं के लिए नियमित शिक्षक के पद पर नई भर्ती के अवसर भी कम हो जाएंगे, शिक्षा के स्तर पर बुरा असर पड़ना निश्चित है। अधिनायकवादी भाजपा सरकार ने इतना बड़ा अव्यवहारिक निर्णय लेने से पहले ना प्रभावित वर्ग से चर्चा की, न ही प्रदेश के भविष्य के बारे में सोचा।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही प्रदेश में 58000 से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं, हर महीने सैकड़ो शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, कई वर्षों से शिक्षकों का प्रमोशन रुका हुआ है, स्थानांतरण को लेकर कोई ठोस पॉलिसी बना नहीं पाए, समयमान वेतनमान का विवाद अब तक लंबित है ऐसे में युक्तिकरण के नाम पर शिक्षकों को डरा कर वसूली करना चाहती है यह सरकार। बैज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की साय सरकार नहीं चाहती कि छत्तीसगढ़ के बच्चों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके, इसीलिए निजी शिक्षण संस्थानों को लाभ पहुंचाने, सरकारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने का षड्यंत्र रचा गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ही 5484 स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे हैं, 297 स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन है, पिछले सवा साल से भाजपा की सरकार है, इस दौरान एक भी पद नियमित शिक्षा की नियुक्ति नहीं की गयी।

विधानसभा में 33000 शिक्षक के पदों पर भर्ती की घोषणा करके वह प्रक्रिया भी दुर्भावना पूर्वक रोक दी गई, अब युक्तियुक्तकरण और नए सेटअप के नाम पर हजारों स्कूलों को बंद करके शिक्षकों के पद को खत्म करने का अव्यवहारिक फैसला थोपा जा रहा है। सरकार पहले शिक्षकों को प्रमोशन दे, उनके लिये ट्रांसफर पॉलिसी तय करे उसके बाद ही युक्तियुक्तकरण का फैसला ले। नए सेटअप के नाम पर स्कूलों में शिक्षकों के न्यूनतम पदों में कटौती का आदेश तत्काल वापस ले सरकार।