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छत्तीसगढ़ के दुर्ग में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी दंपति गिरफ्तार

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने भारत में अवैध रूप से रहने के आरोप में बांग्लादेशी महिला और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों को 2020 में भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी/रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने तथा उन्हें वापस भेजने के लिए दुर्ग जिले में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का गठन किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार 16 मई को जानकारी मिली कि सुपेला थाना क्षेत्र के एक मकान में एक संदिग्ध बांग्लादेशी महिला और उसका पति अपनी मूल पहचान छिपाते हुए ज्योति और रासेल शेख के नाम से रह रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्राप्त सूचना के बाद जब पुलिस दल ने बांग्लादेशी दंपति से पूछताछ की तब उन्होंने अपना नाम ज्योति और रासेल शेख बताया। आरोपियों ने बताया कि वह पश्चिम बंगाल के उत्तर-24 परगना जिले के निवासी हैं। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान दंपति ने जानकारी दी कि वह 2009 से 2017 तक नवी मुंबई ठाणे में रहते थे तथा 2017 से वह दुर्ग जिले के भिलाई में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि दंपति ने जब अपना आधार कार्ड दिखाया तब वह संदेहास्पद लगा। जब उनसे सख्ती से पूछताछ की गई तब महिला ने अपना नाम शाहिदा खातून (35) और उसके पति ने अपना नाम मोहम्मद रासेल शेख (36) बताया। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने जानकारी दी कि वह बांग्लादेश के जेस्सोर जिले के निवासी हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान जानकारी मिली कि बांग्लादेशी महिला शाहिदा खातून ने 2009 में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय बोंगा बॉर्डर से अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल में प्रवेश किया तथा वहां से हावड़ा होते हुए वह मुंबई पहुंच गई। मुंबई में वह मजदूरी करने लगी। अधिकारियों ने बताया कि मुंबई में उसका परिचय बांग्लादेश के निवासी मोहम्मद रासेल से हुआ और दोनों मुंबई से वापस बांग्लादेश चले गए। वहां शाहिदा खातून ने अपना नाम बदलकर ज्योति रख लिया और रासेल से शादी कर ली। उन्होंने बताया कि शादी के बाद दोनों ने 2017 में पासपोर्ट और भारतीय वीजा पर भारत में प्रवेश किया। महिला ज्योति रासेल शेख की वीजा अवधि 13 सितंबर 2018 में तथा रासेल शेख की वीजा अवधि 12 अप्रैल 2020 में समाप्त हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि दोनों बांग्लादेशी नागरिकों ने ठाणे में रहते हुए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर जन्मतिथि और अपने वास्तविक नाम को छिपाते हुए ज्योति रासेल शेख और रासेल शेख के नाम से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार कर लिया। बाद में वह भिलाई में आकर रहने लगे। उन्होंने बताया कि 2020 में बगैर कानूनी दस्तावेज के भारत में रहते हुए पाए जाने के बाद पुलिस ने महिला और उसके पति के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अधिकारियों ने बताया कि यह मामला अदालत में चल रहा है इसलिए दोनों को वापस बांग्लादेश नहीं भेजा गया था। पुलिस ने बताया कि 2018 में रासेल शेख के खिलाफ जिले के छावनी थाना क्षेत्र में लूट का मामला भी दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भिलाई में फर्जी पैन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र बनवाया और विभिन्न बैंकों में खाता भी खुलवाया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अवैध रूप से भारत में निवास करने तथा बांग्लादेशी नागरिक की मूल पहचान को छिपाते हुए स्वयं को भारतीय नागरिक सिद्ध करने के आरोप में विदेशी विषयक अधिनियम 1946, पासपोर्ट अधिनियम 1967, पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गौरतलब है कि 14 मई को दुर्ग जिले की पुलिस ने अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में बांग्लादेशी महिला अंजली सिंह उर्फ काकोली घोष को गिरफ्तार किया था।

छत्तीसगढ़ में बायो-सीएनजी संयंत्रों के लिए रियायती लीज दर पर दी जाएगी जमीन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बायो-सीएनजी संयंत्रों के निर्माण के लिए सार्वजनिक उपक्रमों, तेल और गैस विपणन कंपनियों को रियायती लीज दर पर जमीन दी जाएगी तथा इस संबंध में राज्य शासन ने कलेक्टरों को पत्र जारी किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैव अपशिष्ट और कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण के लिए नगरीय निकायों में बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित किया जाएगा। संयंत्रों की भूमि के आबंटन के लिए राज्य शासन ने सभी जिलों के कलेक्टरों को परिपत्र जारी किया है। उन्होंने बताया कि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा मंत्रालय से जारी परिपत्र में इस वर्ष 17 अप्रैल को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णय का उल्लेख किया गया है।

परिपत्र में कहा गया है कि मंत्रिपरिषद के निर्णय के परिपालन में राज्य के सभी नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट-सह-कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण के लिए स्थापित किये जा रहे बायो-सीएनजी संयंत्रों के लिए रियायती लीज दरों पर शासकीय भूमि का आबंटन किया जाना है। परिपत्र में लिखा है कि बायो-सीएनजी संयंत्रों की स्थापना की आवश्यक कार्यवाही के लिए नगरीय प्रशासन विभाग और संबंधित नगरीय निकाय को अधिकृत किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य शासन ने नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट और कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण के लिए स्थापित किये जा रहे बायो-सीएनजी संयंत्रों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा शासकीय तेल और गैस विपणन कंपनियों को अधिकतम दस एकड़ शासकीय भूमि का आबंटन रियायती लीज दर एक रुपए प्रति वर्ग मीटर के मान से करने के लिए कलेक्टरों को निर्देशित किया है। अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा शासकीय तेल और गैस विपणन कंपनियों को अधिकतम 25 वर्षों की लीज पर भूमि आवंटित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री मजरा टोला विद्युतीकरण योजना से नक्सल प्रभावित 17 वनग्रामों में पहुंची बिजली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना से राज्य के नक्सल प्रभावित मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के 17 वनग्रामों में पहली बार बिजली पहुंची है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित घने वनों के बीच बसे मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के 17 वनग्रामों में पहली बार बिजली पहुंची है। उन्होंने बताया कि राज्य में मुख्यमंत्री मजराटोला विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत तीन करोड़ रुपये की लागत से कातुलझोरा, कट्टापार, बोदरा, बुकमरका, संबलपुर, गट्टेगहन, पुगदा, आमाकोड़ो, पीटेमेटा, टाटेकसा, कुंदलकाल, रायमनहोरा, नैनगुड़ा, मेटातोडके, कोहकाटोला, एडसमेटा और कुंजकन्हार जैसे अत्यंत दुर्गम गांवों में बिजली पहुंचाने का सपना साकार हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि इन इलाकों तक बिजली पहुंचाने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। दुर्गम पहाड़ियों, सघन वनों और नक्सली खतरे के बीच कार्य को अंजाम देना किसी मिशन से कम नहीं था। उन्होंने बताया कि जब गांवों में पहली बार ट्रांसफार्मर लगा तब ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की। कुछ गांवों में बच्चों ने नृत्य किया और ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर अपनी खुशी जताई। अधिकारियों ने बताया कि इन वनग्रामों के 540 परिवार अब तक सौर ऊर्जा और लालटेन पर निर्भर थे। कई गांवों में सौर प्लेट या तो चोरी हो गए थे या खराब हो चुके थे, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बताया कि अब 275 परिवारों को बिजली कनेक्शन मिल चुका है तथा अन्य परिवारों के घरों में बिजली कनेक्शन लगाया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि टाटेकसा गांव में स्थापित 25 केवीए ट्रांसफार्मर को चार्ज कर शुरू कर दिया गया है। इस कार्य में 45 किमी लंबी 11 केवी लाइन, 87 निम्नदाब पोल और 17 ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। कार्यपालक निदेशक सेलट ने बताया कि इन दुर्गम गांवों तक 11 केवी लाइन बिछाने के लिए वन विभाग से एनओसी प्राप्त करने से लेकर उपकरणों की ढुलाई का काम चुनौतीपूर्ण था। उनके अनुसार, समर्पित तकनीकी टीम के प्रयासों से यह कार्य संभव हो सका।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में बारातियों से भरी बस खाई में गिरी, तीन की मौत 53 अन्य घायल

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बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में बारातियों से भरी बस के गहरी खाई में गिरने से एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 53 अन्य घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जिले में चांदो थाना क्षेत्र के कंठी घाट में आज दोपहर एक बाराती बस गहरी खाई में गिर गई जिससे उसमें सवार तीन लोगों– ममेश बड़ा (13), महिला महंती कुजूर (30) और बनेशरा तिर्की (18) की मौत हो गई तथा 53 अन्य बाराती घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक पुलिस को जानकारी मिली है कि बस शंकरगढ़ से बारातियों को लेकर झारखंड जा रही थी।

बस में लगभग 70 बाराती सवार थे। बस जब दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे कंठी घाट के करीब पहुंची तब अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। अधिकारियों ने बताया कि वहां से गुजर रहे मुसाफिरों ने इस हादसे की जानकारी पुलिस को दी तब तत्काल घटनास्थल के लिए पुलिस दल रवाना किया गया तथा राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि इस घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है तथा 53 लोग घायल हुए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे में घायल 46 लोगों का इलाज जिला चिकित्सालय बलरामपुर में किया जा रहा है। गंभीर रूप घायल सात लोगों को अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद बलरामपुर के जिलाधिकारी राजेंद्र कटारा जिला चिकित्सालय पहुंच गए तथा घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रशासन को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

छत्तीसगढ़ में कोरबा के सरकारी अस्पताल में आग, कोई हताहत नहीं

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दूसरी मंजिल पर बृहस्पतिवार सुबह आग लग गई। इस घटना में किसी के भी हताहत होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रानी धनराज कुंवर अस्पताल की ऊपरी मंजिल में आज सुबह आग लग गई। उन्होंने आशंका जताई कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी होगी। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉक्टर दीपक राज ने बताया कि आज सुबह रानी धनराज कुंवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दूसरी मंजिल से धुआं निकलता देखा गया, जिसके बाद अस्पताल के कर्मचारी हरकत में आए और दमकल विभाग को सूचना दी।

डॉक्टर राज ने बताया कि अस्पताल में अग्निशमन यंत्रों और पानी से आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया। उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर मरीजों को अस्पताल से बाहर निकाला गया तथा आग बुझने के बाद उन्हें भीतर ले जाया गया। अधिकारी ने बताया कि घटना में किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है। प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि शॉर्ट सर्किट के कारण दूसरी मंजिल के स्टोर रूम में रखे उपकरणों में आग लगी। उन्होंने बताया कि आग में कुछ उपकरण और रिकॉर्ड जलकर खाक हो गए हैं। आग लगने का सही कारण और उससे होने वाले नुकसान के बारे में अभी जानकारी नहीं मिली है।

छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ का संचालन करने का फैसला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य के शासकीय विद्यालयों में ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ का संचालन करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां ‘मंत्रालय’ में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य के शासकीय विद्यालयों में ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान’ का संचालन करने का फैसला किया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, पालक-शिक्षक (पैरेंट-टीचर) सहभागिता बढ़ाने और शैक्षणिक उपलब्धियों को उन्नत करने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अभियान के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत विद्यालयों का सामाजिक अंकेक्षण कर गुणवत्ता के आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी। कमजोर शालाओं (स्कूल) की नियमित निगरानी विभिन्न विभागों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने साहित्य और कला के क्षेत्र में अर्थाभाव से जूझ रहे राज्य के कलाकारों और साहित्यकारों को राहत देने का फैसला किया है।

उन्होंने बताया कि विधानसभा के बजट सत्र में की गई घोषणा के परिपालन में अब कलाकारों को दी जाने वाली मासिक वित्तीय सहायता (पेंशन) को दो हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया है। उनके मुताबिक, इसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित वित्तीय सहायता योजना नियम-1986 में संशोधन के प्रस्ताव का मंत्रिपरिषद ने अनुमोदन कर दिया है। इससे उन कलाकारों और साहित्यकारों को आर्थिक संबल मिलेगा, जो आजीविका के लिए संघर्षरत हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह योजना वर्ष 1986 में शुरू की गई थी, तब न्यूनतम सहायता राशि 150 रुपये और अधिकतम 600 रुपये निर्धारित थी।

बाद में वर्ष 2007 में इसे बढ़ाकर 1500 रुपये और फिर 2012 में 2000 रुपये किया गया था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। वर्तमान में राज्य में कुल 162 कलाकारों को यह पेंशन दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रत्येक कलाकार को सालाना 24 हजार रुपये पेंशन की राशि मिल रही है, जो संशोधन के बाद बढ़कर 60 हजार रुपये हो जाएगी। इससे राज्य पर 58.32 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक भार आएगा। अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने राज्य में औद्योगिक विकास को और अधिक गति देने तथा भूमि आबंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। उन्होंने बताया कि इस संशोधन से औद्योगिक क्षेत्रों, लैंड बैंक तथा अन्य भूमि खंडों के आबंटन की प्रक्रिया में और अधिक स्पष्टता तथा पारदर्शिता आएगी, इससे औद्योगिक निवेशकों को भूमि आबंटन प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने और लाभ उठाने में सुविधा होगी।

अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में कई महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी है। इससे राज्य की औद्योगिक नीति और अधिक रोजगारपरक, व्यापक और उद्यमों के लिए लाभकारी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित संशोधन से राज्य में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे साथ ही आधुनिक खेती से लेकर खिलौना उद्योग तक को बढ़ावा मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि नई नीति के तहत जिन कंपनियों में छत्तीसगढ़ के लोगों को नौकरी मिलेगी, उन्हें सरकार की तरफ से अनुदान मिलेगा। उनके मुताबिक, अब ‘हाइड्रोपोनिक’ और ‘ऐयरोपोनिक’ जैसी आधुनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसानों को नई तकनीक, जैसे ‘ऑटोमेशन’ और ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ का फायदा मिलेगा। इसके तहत राज्य में खेल अकादमी और निजी प्रशिक्षण केंद्रों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण और करियर के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत गुणवत्ता पूर्ण विश्वविद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा तथा ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग और सर्विस सेंटर को सभी विकासखण्ड समूहों में मान्य किया जाएगा।

उनके अनुसार, राज्य के बस्तर और सरगुजा संभाग में होटल और रिसॉर्ट बनाने के लिए निवेश की न्यूनतम सीमा घटा दी गई है, जिससे इन इलाकों में पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि वहीं वस्त्र क्षेत्र में निवेश करने पर अब 200 प्रतिशत तक का प्रोत्साहन मिलेगा जिससे सिलाई, कढ़ाई और बुनाई जैसे काम करने वालों को भी फायदा मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के हर हिस्से में माल ढुलाई और व्यापार को आसान बनाने के लिए नई ‘लॉजिस्टिक’ नीति लाई जाएगी जिससे व्यापारियों को फायदा होगा तथा बाजारों तक पहुंच आसान होगी। उनके मुताबिक, दिव्यांगजनों की परिभाषा को नया रूप दिया गया है जिससे उन्हें ज्यादा योजनाओं का लाभ मिल सके।

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में ‘गोपनीय’ सैनिक ने की आत्महत्या

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Shadow of man with pistol gun turned on his head wants to commit suicide. light and shadow

सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में बुधवार को एक ‘गोपनीय सैनिक’ ने कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यहां बताया कि जिले के भंडारीपारा पुलिस शिविर में आज सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक गोपनीय सैनिक सोढ़ी सोमडा ने राइफल से खुद को गोली मार ली। गोपनीय सैनिक (गुप्तचर) इस शिविर में तैनात था।

अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गोपनीय सैनिक ने एक पुलिसकर्मी से राइफल ली और खुद को गोली मार ली। उन्होंने बताया कि घटना के तत्काल बाद उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि गोपनीय सैनिक ने आत्महत्या क्यों की, इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं मिली है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों में सहायता के लिए पुलिस ने स्थानीय युवकों को गोपनीय सैनिक (गुप्तचर) के रूप में भर्ती किया है। बस्तर क्षेत्र में सुकमा समेत सात जिले हैं।

छत्तीसगढ़ के धमतरी में आभूषण दुकान में लूट की कोशिश, हमले में दुकान मालिक और बेटी घायल

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धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी शहर में आभूषण की दुकान में लूट के इरादे से पहुंचे दो नकाबपोशों ने दुकान के मालिक और उसकी बेटी पर हमला कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के पावर हाउस इलाके में मंगलवार रात लगभग 8.45 बजे नकाबपोश बदमाशों ने आभूषण की एक दुकान बरडिया ज्वेलर्स को लूटने की कोशिश। इस दौरान लुटेरों ने नैना बरडिया (25) पर गोली चलाई तथा उसके पिता भवरू बरडिया पर बंदूक की बट से हमला किया। इस घटना में नैना के पैर में तथा भवरू के सिर में चोट पहुंची है।

धमतरी जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि मंगलवार रात दो नकाबपोश बदमाश दुकान में घुसे और दुकान मालिक के सिर पर बंदूक की बट से वार कर उसे घायल कर दिया तथा उनकी बेटी पर गोली चला दी। चंद्रा ने बताया कि गोली की आवाज सुनकर आस-पास के लोग वहां पहुंचे, जिसके बाद दोनों बदमाश वहां से भाग निकले। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुकान से कोई आभूषण नहीं लूटा गया है। अधिकारी ने बताया कि दोनों घायलों को उनके रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुंचाया। वहीं सूचना मिलने पर पुलिस दल भी घटनास्थल पहुंचा। उन्होंने बताया कि पुलिस ने हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। शहर में चेक पोस्ट बनाकर वाहनों की तलाशी ली जा रही है तथा सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि हमलावरों ने लूटपाट के लिए एयर पिस्टल का इस्तेमाल किया था।

मोदी का विरोध करते-करते सेना, देश का विरोध ना करे विपक्ष : केंद्रीय मंत्री चौहान

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रायपुर। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करते-करते विपक्ष देश और सेना का विरोध ना करे। चौहान ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सशस्त्र बलों की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने महिलाओं के ‘सिंदूर’ को उजाड़ा और हमने आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट कर दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार से जवाब मांगे जाने के बारे में पूछे जाने पर चौहान ने कहा, ”सारा देश (ऑपरेशन सिंदूर पर) गर्वित और गौरवान्वित है। पाकिस्तान ड्रोन छोड़ रहा था और वे तिनके की तरह उड़ गए।

मैं हमारे बहादुर सेना, उसके पराक्रम को सलाम करता हूं। उनकी वीरता और उनके सटीक निशाने को सलाम करता हूं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था जो हमारे लक्ष्य से दूर रहा हो। उन्होंने सिंदूर उजाड़ा, हमने आतंकवाद के अड्डे ही समाप्त कर दिए। अगर इसके बाद भी रोना है तो मोदी जी का विरोध करते-करते सेना और देश का विरोध तो नहीं करिए।” केंद्रीय मंत्री चौहान सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य सरकार के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ आए हैं। कार्यक्रम के दौरान वह राज्य के लोगों को तीन लाख से अधिक आवास आवंटित करेंगे। चौहान ने छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा और उस पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों का घर छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ”आपको याद होगा कि जब पिछली सरकार (कांग्रेस सरकार) थी, तब मोर आवास-मोर अधिकार आंदोलन चला था। पुरानी सरकार के मुखिया ने अपने पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री के कहने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास की धनराशि आवंटित नहीं की। हमारे प्रधानमंत्री जी ने पीएम आवास योजना की राशि भेजी लेकिन वह राशि राज्य सरकार ने खर्च नहीं की और इसका परिणाम यह हुआ कि लाखों पात्र हितग्राही लाभ से वंचित रह गए।

गरीब को घर न देना एक पाप था।” केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”उस समय भाजपा ने संघर्ष किया और वचन दिया था कि उसकी सरकार बनने पर वह सभी हितग्राहियों को आवास देगी। आज मेरे मन में संतोष है कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की जनता से किया वादा हमने निभाया। हमने 8.47 लाख आवास आवंटित किये। फिर और आवास की आवश्यकता पड़ी, तो 3.03 लाख आवास हमने दुर्ग के कार्यक्रम में आवंटित किया। 2018 की आवास प्लस की सूची में अब केवल तीन लाख 767 हितग्राही बचे थे। आज मैं मुख्यमंत्री जी को शेष आवास की स्वीकृति का पत्र सौंपूंगा। इसके बाद सभी हितग्राही के पास आवास उपलब्ध हो जाएगा।” उन्होंने कहा, ”हम जो कहते हैं वह करते हैं। मैं छत्तीसगढ़ की सरकार को इस बात की बधाई दूंगा कि तेजी से यहां मकान बनाए जा रहे हैं।” चौहान ने कहा, ”नक्सल प्रभावित परिवार और आत्मसर्मण कर चुके नक्सलियों, जिनका नाम सूची में नहीं है, उनके लिए भी हमने 15 हजार मकान आवंटित किये हैं, उनका निर्माण प्रारंभ हो गया है।

पुरानी सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना बनाई थी, जिसके तहत आवास के निर्माण पूरे नहीं हुए। वे भी अब पूरे हो रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार ने नया सर्वेक्षण फिर से शुरू कर दिया है। जो पात्र लोग वंचित रह गए उन्हें वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। भौतिक सत्यापन कर उन्हें भी मकान दिया जाएगा। चौहान ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ बहुत उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। यहां कृषि उत्पादन और फल-सब्जी का उत्पादन बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”मैं चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ के किसान और आगे बढ़ें। विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का होना आवश्यक है। मेरी कोशिश है कि विकसित छत्तीसगढ़ के लिए विकसित खेती, समृद्ध किसान और गरीबी मुक्त ग्रामीण भाई-बहन हों।

पहलगाम हमले की जवाबदेही तय होनी चाहिए, क्या गृह मंत्री इस्तीफा देंगे : बघेल

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कांग्रेस ने भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका की ”मध्यस्थता” को लेकर सोमवार को एक बार फिर सवाल खड़े किए और कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि क्या उसने द्विपक्षीय मामले में तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप स्वीकार कर लिया है? पार्टी महासचिव भूपेश बघेल ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सरकार एवं प्रशासन के स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग भी की तथा सवाल किया कि क्या गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा देंगे? उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे घटनाक्रम पर सर्वदलीय बैठक और संसद का विशेष सत्र बुलाकर स्थिति साफ करनी चाहिए तथा सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अवश्य शामिल होना चाहिए। बघेल ने कहा, ”पहलगाम आतंकी हमले के बाद हमारी वीर सेना ने संकल्प और साहस के साथ दुश्मनों को जिस तरह से मुंहतोड़ जवाब दिया, वह पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का पल था। हमारे जवानों ने अनेक युद्धों में भारत की अखंडता की रक्षा की। 1971 के बाद इंदिरा गांधी ने दुनिया को दिखा दिया था कि भारत किसी के सामने झुकने वाला नहीं है।

आज भी हमारी सेना उसी जज़्बे के साथ सीमा पर डटी हुई है। कांग्रेस पार्टी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।” उन्होंने कहा, ”जब भी देश पर संकट आया, कांग्रेस पार्टी ने राजनीति को पीछे रखा और देशहित को प्रथम स्थान दिया। 1965 में लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का नारा देकर देश को एक सूत्र में बांधा। 1971 में इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव को ठुकराकर पाकिस्तान को धूल चटा दी।” बघेल ने कहा, ”आज भी हमारा वही संकल्प है। आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में राजनीति नहीं, राष्ट्रवाद चाहिए। हमने उनसे सीखा है कि दुश्मन के साथ बातचीत की मेज पर बैठें तो कमजोरी नहीं, ताकत दिखाएं।” उन्होंने कहा, ”इस संकट की घड़ी में कांग्रेस ने अपने राजनीतिक कार्यक्रम रद्द किए। ‘संविधान बचाओ रैली’ जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को स्थगित किया गया ताकि देश में एकजुटता का संदेश जाए। हमने ‘जय हिंद यात्रा’ निकाली ताकि सेना का मनोबल बढ़े और जनता आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट हो। हमने सरकार से कहा कि कितना भी बड़ा संकट आए, कांग्रेस आपके साथ है।” बघेल ने दावा किया कि लेकिन जब पूरा देश सेना के साथ खड़ा था तो भाजपा के नेता ट्विटर पर भाजपा और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की तुलना कर इसे राजनीतिक रंग दे रहे थे।

उन्होंने सवाल किया कि क्या सेना के बलिदान को चुनावी बयानबाजी में इस्तेमाल करना उचित है? बघेल ने यह भी कहा, ”अमेरिका के राष्ट्रपति ने अचानक संघर्षविराम की घोषणा की, क्या यह भारत सरकार की कूटनीतिक नाकामी नहीं है? क्या भारत ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को स्वीकार कर लिया है? क्या शिमला समझौता अब रद्द हो गया है? हमने संघर्षविराम में पाकिस्तान से क्या वादे लिए हैं, देश के लोगों को यह भी जानने का हक है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद के विशेष सत्र की मांग की है, जिसमें सभी दलों को बताया जाए कि युद्ध विराम की क्या शर्ते हैं। बघेल ने कहा कि सरकार एक सर्वदलीय बैठक और संसद का विशेष सत्र बुलाए ताकि सारी स्थिति साफ हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई दो सर्वदलीय बैठकों में नहीं पहुंचे। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ”जब सरकार ने चूक मान ली है तो किसकी जिम्मेदारी तय की जा रही है? क्या गृह मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं?” उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ”26 लोगों की जान गई है। अगर आप कार्रवाई नहीं करेंगे तो आने वाले समय में ऐसी घटनाओं के लिए किसी को जवाबदेह ठहराया नहीं जाएगा।” बघेल ने एक सवाल के जवाब में कहा, ”आतंकवाद को समाप्त करने के लिए यह जंग छिड़ी थी। पीओके पर हमें कब्जा करना चाहिए, देश का मूड यही था। सब चाहते थे कि बदला लेने का यह अच्छा अवसर है। 1994 में संसद से प्रस्ताव पारित हुआ है और देश ने माना है कि पीओके हमारा है… यह (मध्यस्थता) हम लोगों के लिए दुखद है।