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छत्तीसगढ़ में छह वर्षीय बालिका से दुष्कर्म और हत्या के विरोध में 18 अप्रैल से पैदल मार्च करेगी कांग्रेस

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या की घटना के विरोध में राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 18 से 21 अप्रैल के बीच दुर्ग से रायपुर तक पैदल मार्च करने का फैसला किया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘न्याय पथ’ नाम से यह पैदल मार्च दुर्ग से शुरू होगा और रायपुर में समाप्त होगा, जहां 21 अप्रैल को कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करेंगे। बैज ने कहा कि नवरात्रि के अंतिम दिन जब पूरे देश में कन्या भोज का आयोजन हो रहा था, उस दिन एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा, ”छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित सरकार में बेटियां, बहनें, माताएं सुरक्षित नहीं हैं।

दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ रही हैं, अपराधी बेलगाम हो गए हैं और उन्हें कानून का कोई डर नहीं है।” कांग्रेस नेता ने दावा किया, ”मुख्यमंत्री और गृह मंत्री राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित नहीं हैं। राज्य सरकार महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने में विफल रही है। वहीं जनता का राज्य सरकार और पुलिस पर से विश्वास उठ गया है, यही कारण है कि दुर्ग में संदिग्ध दुष्कर्म आरोपी के घर में आग लगा दी गई।” छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में रविवार को मोहन नगर इलाके में छह वर्षीय बच्ची के साथ उसके चाचा ने कथित तौर पर दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार बच्ची नवरात्रि के नवमी वाले दिन कन्या पूजन के लिए पड़ोस में अपनी दादी के घर गई थी, जहां उसके 24 वर्षीय चाचा ने उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। बाद में शव को पड़ोसी की कार में रख दिया।

दुर्ग जिला बार काउंसिल ने घोषणा की है कि वह अदालत में आरोपी की पैरवी नहीं करेगी। बच्ची जिस यादव समुदाय से आती है, उसने घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है तथा दुर्ग जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर बच्ची की मां को 50 लाख रुपये की सहायता और सरकारी नौकरी देने की मांग की है। घटना की त्वरित जांच सुनिश्चित करने के लिए दुर्ग पुलिस ने बुधवार को आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। दुर्ग के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आईयूसीएडब्ल्यू-महिलाओं के खिलाफ अपराध के लिए जांच इकाई) पद्मश्री तंवर की अध्यक्षता वाली एसआईटी में मोहन नगर थाना प्रभारी शिव प्रसाद चंद्रा सहित सात अन्य सदस्य होंगे। एसआईटी रोजाना कार्रवाई करेगी और जल्द से जल्द जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र पेश करेगी। इसके अलावा, पर्यवेक्षण अधिकारी मामले की समय पर और तेजी से सुनवाई के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

कई बड़े शहरों में रेलवे के इस पद पर जिम्मेदारी संभाल चुके IPRS उरई के राजेश कुमार शर्मा को झांसी मंडल में मिली यह जिम्मेदारी

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यूपी के उरई जिले के रहने वाले राजेश कुमार शर्मा ने उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी का पदभार ग्रहण किया है। राजेश शर्मा 2011 बैच के भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा के अधिकारी हैं। राजेश शर्मा ने आईईटी, लखनऊ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत में वे राजस्थान प्रशासन सेवा में चयनित हुए और मकराना (नागौर) में सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) के पद पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने सहायक कार्मिक अधिकारी, भोपाल, मंडल कार्मिक अधिकारी जबलपुर, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी जबलपुर, उप मुख्य कार्मिक अधिकारी (पश्चिम मध्य रेलवे), और वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।

शर्मा ने प्रयागराज मंडल में वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी रहते हुए 14,000 से अधिक रेलकर्मियों को पदोन्नति प्रदान की तथा सात वर्षों के बाद मंडल के कार्मिक विभाग को रेलवे दक्षता शील्ड से सम्मानित करवाया। उन्हें हाल ही में विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी, झांसी के रूप में राजेश कुमार शर्मा की प्राथमिकता पारदर्शिता, त्वरित कार्यप्रणाली तथा कर्मचारियों को समयबद्ध ढंग से देय लाभ प्रदान करना एवं समग्र कर्मचारी कल्याण रहेगा।

छत्तीसगढ़ में नक्सलवादी आत्मसमर्पण व पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 लागू हुई

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छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में नक्सलवादी आत्मसमर्पण व पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 को लागू कर दिया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। इस बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एक बार फिर कहा है कि राज्य सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य में नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक अहम कदम उठाते हुए नक्सलवादी आत्मसमर्पण व पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है।

उन्होंने बताया कि गृह विभाग द्वारा 28 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं। उनके मुताबिक, यह नीति, नक्सल हिंसा के पीड़ित व्यक्तियों और उनके परिवारों तथा आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और राहत के उद्देश्य से तैयार की गई है। अधिकारियों ने बताया कि अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक जिले में गठित होने वाली समिति में कलेक्टर अध्यक्ष होंगे, जबकि पुलिस अधीक्षक को सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अतिरिक्त वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत के सीईओ, कलेक्टर द्वारा नामित दो अन्य अधिकारी तथा सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले एवं उपमंडल स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। यह अधिकारी सभी पुनर्वास कार्यों की निगरानी करेंगे। गृह विभाग ने निर्देशित किया है कि राज्य गठन के बाद से अब तक के सभी पीड़ित प्रकरणों को चिन्हित किया जाए और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का चयन कर राहत एवं पुनर्वास की कार्यवाही प्राथमिकता पर की जाए। अधिकारियों ने बताया कि इस नीति के अंतर्गत एक विशेष पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक पीड़ित एवं आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति की जानकारी दर्ज की जाएगी और उन्हें एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी। संबंधित अधिकारी इस पोर्टल के डैशबोर्ड का नियमित रूप से अवलोकन कर राहत एवं पुनर्वास के कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने बताया कि गृह विभाग ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे इस नीति के अंतर्गत निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए राहत एवं पुनर्वास की कार्यवाही को समय सीमा में प्रभावी रूप से पूरा करेंगे। इस बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एक बार फिर कहा है कि राज्य सरकार नक्सलियों से बातचीत करने के लिए तैयार है। उनके पास ही गृह विभाग का प्रभार है। शर्मा ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए किसी प्रकार से समिति का गठन नहीं करेगी और यदि नक्सली कोई समिति का गठन करते हैं तब उस समिति के साथ बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि नई पुनर्वास नीति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों से आग्रह किया है कि वे हिंसा छोड़ें और मुख्यधारा से जुड़ें तथा यदि नक्सली बंदूक उठाएंगे तब सुरक्षाबल भी बंदूक उठाने के लिए बाध्य रहेंगे। शर्मा ने कहा कि यदि नक्सली हिंसा छोड़ कर मुख्यधारा से जुड़ेंगे तो उनका स्वागत किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में प्रेशर बम में विस्फोट, सीआरपीएफ जवान घायल

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में प्रेशर बम की चपेट में आने से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का जवान गंभीर रूप से घायल हो गया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के चिन्नाकोड़ेपाल क्षेत्र में प्रेशर बम की चपेट में आने से सीआरपीएफ की 196 बटालियन का जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि सीआरपीएफ के दल को चिन्नाकोड़ेपाल क्षेत्र में गश्त के लिए रवाना किया गया था और दल जब कोड़ेपाल नाला के करीब था तब जवान का पैर प्रेशर बम के ऊपर चला गया और इससे बम में विस्फोट हो गया और जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि जवान के दोनों पैर में गंभीर चोट पहुंची है और जवान को उपचार के लिए बीजापुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

माओवादी अक्सर बीजापुर सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र के अंदरूनी इलाकों में सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने के लिए सड़क के किनारे और पगडंडियों में बारूदी सुरंग लगाते हैं। बस्तर क्षेत्र में पहले भी नक्सलियों द्वारा बिछाए गए ऐसी बारूदी सुरंग में विस्फोट होने से सुरक्षाबल के कई जवानों और नागरिकों की मृत्यु हुई है तथा घायल हुए हैं। इससे पहले सोमवार को राज्य के नारायणपुर जिले में नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम में विस्फोट होने से सड़क निर्माण कार्य में लगे ट्रक का चालक घायल हो गया था।

छत्तीसगढ़ में छह वर्षीय बच्ची से बलात्कार-हत्या मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में छह वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के मामले की जल्द जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। इस मामले में बालिका के चाचा के पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि दुर्ग जिले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। उन्होंने बताया कि दुर्ग की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आईयूसीएडब्ल्यू-महिलाओं के खिलाफ अपराध के लिए जांच इकाई) पद्मश्री तंवर की अध्यक्षता वाली एसआईटी में मोहननगर थाना प्रभारी शिवप्रसाद चंद्रा सहित सात अन्य सदस्य होंगे।

अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी प्रतिदिन कार्यवाही करते हुए जल्द से जल्द जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र पेश करेगी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, पर्यवेक्षण अधिकारी मामले की समय पर और त्वरित सुनवाई के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। रविवार को मोहन नगर इलाके में बालिका का यौन उत्पीड़न किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, जब बालिका चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन रामनवमी को कन्या पूजन के लिए पड़ोस में अपनी दादी के घर गई थी तब उसके 24 वर्षीय चाचा ने उसका यौन उत्पीड़न किया और उसकी हत्या कर दी। बाद में आरोपी ने शव को पड़ोसी की कार में रख दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को सामाजिक संगठनों के सदस्य सड़कों पर उतरे थे।

वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने कई जिलों में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पुतले जलाए। दुर्ग जिला बार काउंसिल ने घोषणा की कि वह अदालत में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगी। बालिका जिस यादव समुदाय से आती है, उसने घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की है। समुदाय ने दुर्ग कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर बालिका की मां के लिए 50 लाख रुपये की सहायता और उसके लिए सरकारी नौकरी की मांग भी की है। विपक्षी कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने का आरोप लगाते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के इस्तीफे की मांग की है। शर्मा के पास गृह विभाग भी है।

अधिकारी आम जनता की समस्या का निराकरण करें : राज्यपाल डेका

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छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अधिकारी कार्यालयों में बैठे, आम जनता से मिले और उनसे नियमित संवाद करें। उनकी समस्याओं को जाने और उनका निराकरण करें। शासकीय सेवक जनता के सेवक होते है। उनकी समस्याओं को हल करना पहली प्राथमिकता है। राज्यपाल डेका ने मंगलवार को रायपुर के रेडक्रॉस हॉल, कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केन्द्र सरकार की फ्लैगशीप योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन आप लोगों के माध्यम से ही होगा। रायपुर जिले में कोई राज्यपाल इस तरह समीक्षा करने पहली बार आए हैं। इस बैठक में जिले के विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही, राज्यपाल ने कलेक्ट्रेट परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण भी किया। इस दौरान उन्होंने जिले की प्रमुख समस्याओं जैसे ट्रैफिक जाम, पेयजल की स्थिति, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और अन्य मुद्दों पर गहन चर्चा की।

राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य समस्याओं को उजागर करना नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस कदम सुझाना और लागू करना है। उन्होंने रायपुर की मूलभूत समस्याओं के बारे में पूछा और कहा कि राजधानी रायपुर में पेयजल की कमी, ट्रैफिक जाम और ड्रग्स तीन बड़ी समस्याएं है। उन्होंने इन मुद्दों को जिले के विकास में बाधा बताया और अधिकारियों से इनके समाधान के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मांगी। राज्यपाल डेका ने इस पर जोर दिया कि ट्रैफिक सुधार का मकसद सिर्फ चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों को यातायात के लिए शिक्षित करना है। इसको मिशन की तरह ले. उन्होंने सुझाव दिया कि बाएं मोड़ (लेफ्ट टर्न) को आसान बनाया जाए, रेलवे फाटकों पर डिवाइडर लगाए जाएं ताकि दुर्घटनाएं कम हों, और स्टंट करने वाली तेज रफ्तार टू-व्हीलर गाड़ियों पर सख्ती से कार्रवाई हो।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे किसी भी दबाव में न आएं और नियमों का सख्ती से पालन करवाएं। राज्यपाल डेका ने अधिकारियों से पूछा कि जलसंचयन के लिए ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में कितना काम हुआ है और बरसात के बाद इसका मापन कर स्थिति बताने को कहा। उन्होंने यह भी पूछा कि जिले में 149 डबरी हैं, इनका क्या हाल है। जल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि रायपुर जिले में पेयजल में कौन से खनिज मुख्य रूप से मिलते हैं। पीएचई के अधिकारी ने बताया कि यहां पानी में फ्लोराइड और आयरन की समस्या पाई गई है। राज्यपाल ने आईआईटी गुवाहाटी के सहयोग से विकसित प्रोटोटाइप का जिक्र करते हुए निर्देश दिया कि धरसीवां के एक गांव में पायलट प्रोजेक्ट की तरह फ्लोराइड और आयरन हटाने के लिए यह प्लांट लगाया जाए। उन्होंने क्रेडाई द्वारा रायपुर के शासकीय भवनों में बनाए गए जल संग्रहण रिचार्ज पिट की तारीफ की और कहा कि ऐसे छोटे प्रयासों से बड़ी सफलता मिल सकती है। बच्चों और युवाओं में नशे की समस्या पर राज्यपाल ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केंद्र के अलावा अस्पताल और मनोवैज्ञानिक की मदद से भी युवाओं को नशे की लत से निकालने की कोशिश की जानी चाहिए।

छत्तीसगढ़ में 26 लाख रुपए के इनामी चार नक्सली समेत 22 ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में कुल 26 लाख रुपए के इनामी चार नक्सलियों समेत 22 माओवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में चार इनामी नक्सलियों कमली हेमला उर्फ सोमे (32), मुया माड़वी उर्फ राजेश (19), सोनू तांती (28) और महेश पुनेम (20) समेत 22 उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाली नक्सली कमली हेमला पीएजीए बटालियन नंबर एक की सदस्य है तथा उसके सर पर आठ लाख रुपए का इनाम है। उन्होंने बताया कि नक्सली मुया माड़वी तेलंगाना स्टेट कमेटी के अंतर्गत पार्टी सदस्य है तथा उस पर भी आठ लाख रुपए का इनाम है।

अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले पश्चिम बस्तर डिवीजन प्रेस टीम के कमांडर सोनू ताती और पीएलजीए सदस्य महेश पुनेम पर पांच—पांच लाख रुपए का इनाम है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का नक्सली संगठन के विचारों से मोहभंग हो गया है तथा वह संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद से परेशान थे। उन्होंने समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने के लिए आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने वाले सभी माओवादियों को प्रोत्साहन स्वरूप 50-50 हजार रुपए का चेक प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक नक्सली घटनाओं में शामिल 172 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं तथा 179 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 83 नक्सली मारे गए है। बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र कुमार यादव ने नक्सलियों से अपील की है कि वे सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों। उन्होंने नक्सलियों से कहा है कि वे बाहरी लोगों की भ्रामक बातों और विचारधारा से बाहर निकलें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों, जहां वे निर्भीक रूप से सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।

छत्तीसगढ़ में पुलिस की कार्रवाई: तीन इनामी माओवादियों समेत 26 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सोमवार को तीन इनामी माओवादियों समेत 26 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू (अपने घर/गांव वापस लौटो) अभियान से प्रभावित होकर तीन इनामी माओवादियों समेत 26 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से राजेश कश्यप आमदई एरिया जनमिलिशिया का कमांडर था। उसके सिर पर तीन लाख रुपये का इनाम है।

अधिकारियों का कहना है कि इसी तरह नक्सली कोसा माड़वी जनताना सरकार का अध्यक्ष था। उसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम है। नक्सली छोटू कुंजाम चेतना नाट्य मंच (सीएनएम) का सदस्य था। उसके सिर पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित है। अधिकारियों ने बताया कि इन नक्सलियों ने लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर तथा संगठन में अमानवीय बर्ताव, आधारहीन विचारधारा और शोषण से तंग आकर आत्मसमर्पण करने का फैसला किया । उन्होंने बताया कि जिले में लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 224 इनामी माओवादियों सहित कुल 953 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

छत्तीसगढ़ में हादसा: शोभायात्रा देखने गए तीन बाइक सवारों की मौत, एक घायल

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)- 49 में कार की चपेट में आने से रामनवमी की शोभायात्रा देखने आये बाईक सवार तीन युवकों की मौत हो गई जबकि कार चालक घायल हो गया। इस घटना में कार चालक को भी चोट आई है। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना छाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बेहरामुड़ा निवासी बाईक सवार तीन युवक अमित राठिया (20), तरूण राठिया (16), रितेश राठिया (16) रविवार शाम रायगढ़ शहर में रामनवमी के अवसर पर निकलने वाली शोभायात्रा को देखने आये हुए थे। जहां देर रात 11 बजे के आसपास घर जाते समय बाइक सवार तीनों युवक जब ग्राम गेजामुड़ा के पास एनएच-49 पर पहुंचते ही एक ट्रक को ओवरटेक करते समय बिलासपुर की तरफ से रही एक कार सीजी 10 एव्ही 5902 से बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। इस घटना में मौके पर ही अमित की मौत हो गई जिसके बाद दोनों घायलों को तत्काल मेडिकल कालेज अस्पताल ले जाया गया। रात में ही रितेश की मौत हो गई जबकि सोमवार सुबह तीसरे घायल युवक अरुण की भी मौत हो गई है।

एआई के लिए एथिकल गाइड लाइन जरूरी – डॉ. चिन्मय पंड्या

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नई दिल्ली। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर इसी साल अगस्त में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में भारत सहित दुनिया भर के देशों से 400 से ज़्यादा ए आई विशेषज्ञ शामिल होंगे। देव संस्कृति विश्व विद्यालय के प्रति कुलपति और गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी देते हुए कहा कि एआई के अगले संस्करण से पहले एथिकल गाइड लाइन की जरूरत है। उन्होंने कहा अगर ए आई की चुनौतियों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह भस्मासुर बन जाएगी। उन्होंने कहा हिरोशिमा अपील में शामिल हुए जापान के प्रधानमंत्री, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट के शीर्ष अधिकारियों के अलावा पोप और मक्का के लोगों के साथ मंथन में तय हुआ था कि ए आई के लिए आध्यात्मिक नियंत्रण और संरक्षण की जरूरत है।

कार्यक्रम में चुनौतियों पर चर्चा के दौरान कहा गया कि आज जो सबसे बड़ी समस्या है, वह इस दृष्टि से है कि एक सामान्य व्यक्ति उस एआई से परिचित नहीं है, जिससे बाकी के वैज्ञानिक परिचित हैं। यदि किसी को इस बात का अंदाजा लगाना हो, अनुमान लगाना हो कि चुनौती कितनी भयावह है, तो जेफरी हिंटन को सुन करके देखिए। जिन्होंने एआई को जन्म दिया। जिस सुपर कंप्यूटर पर आज एआई अपने को प्रशिक्षित कर रहा है, उस सुपर कंप्यूटर की स्पीड 36.8 पेटाफ्लॉप्स है, जो कि मनुष्य के मस्तिष्क की तुलना में तीन गुना ज्यादा है । मनुष्य से एआई की जो स्पीड है, वह आज से 20 वर्ष के बाद वन बिलियन गुना ज्यादा होगी। एआई की चुनौतियां मानवता के हर पहलू को प्रभावित करेंगी।