Home Blog Page 44

छत्तीसगढ़ में पुलिस की कार्रवाई: तीन इनामी माओवादियों समेत 26 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

0

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सोमवार को तीन इनामी माओवादियों समेत 26 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू (अपने घर/गांव वापस लौटो) अभियान से प्रभावित होकर तीन इनामी माओवादियों समेत 26 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से राजेश कश्यप आमदई एरिया जनमिलिशिया का कमांडर था। उसके सिर पर तीन लाख रुपये का इनाम है।

अधिकारियों का कहना है कि इसी तरह नक्सली कोसा माड़वी जनताना सरकार का अध्यक्ष था। उसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम है। नक्सली छोटू कुंजाम चेतना नाट्य मंच (सीएनएम) का सदस्य था। उसके सिर पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित है। अधिकारियों ने बताया कि इन नक्सलियों ने लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर तथा संगठन में अमानवीय बर्ताव, आधारहीन विचारधारा और शोषण से तंग आकर आत्मसमर्पण करने का फैसला किया । उन्होंने बताया कि जिले में लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 224 इनामी माओवादियों सहित कुल 953 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

छत्तीसगढ़ में हादसा: शोभायात्रा देखने गए तीन बाइक सवारों की मौत, एक घायल

0

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)- 49 में कार की चपेट में आने से रामनवमी की शोभायात्रा देखने आये बाईक सवार तीन युवकों की मौत हो गई जबकि कार चालक घायल हो गया। इस घटना में कार चालक को भी चोट आई है। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना छाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बेहरामुड़ा निवासी बाईक सवार तीन युवक अमित राठिया (20), तरूण राठिया (16), रितेश राठिया (16) रविवार शाम रायगढ़ शहर में रामनवमी के अवसर पर निकलने वाली शोभायात्रा को देखने आये हुए थे। जहां देर रात 11 बजे के आसपास घर जाते समय बाइक सवार तीनों युवक जब ग्राम गेजामुड़ा के पास एनएच-49 पर पहुंचते ही एक ट्रक को ओवरटेक करते समय बिलासपुर की तरफ से रही एक कार सीजी 10 एव्ही 5902 से बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। इस घटना में मौके पर ही अमित की मौत हो गई जिसके बाद दोनों घायलों को तत्काल मेडिकल कालेज अस्पताल ले जाया गया। रात में ही रितेश की मौत हो गई जबकि सोमवार सुबह तीसरे घायल युवक अरुण की भी मौत हो गई है।

एआई के लिए एथिकल गाइड लाइन जरूरी – डॉ. चिन्मय पंड्या

0

नई दिल्ली। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर इसी साल अगस्त में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में भारत सहित दुनिया भर के देशों से 400 से ज़्यादा ए आई विशेषज्ञ शामिल होंगे। देव संस्कृति विश्व विद्यालय के प्रति कुलपति और गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी देते हुए कहा कि एआई के अगले संस्करण से पहले एथिकल गाइड लाइन की जरूरत है। उन्होंने कहा अगर ए आई की चुनौतियों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह भस्मासुर बन जाएगी। उन्होंने कहा हिरोशिमा अपील में शामिल हुए जापान के प्रधानमंत्री, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट के शीर्ष अधिकारियों के अलावा पोप और मक्का के लोगों के साथ मंथन में तय हुआ था कि ए आई के लिए आध्यात्मिक नियंत्रण और संरक्षण की जरूरत है।

कार्यक्रम में चुनौतियों पर चर्चा के दौरान कहा गया कि आज जो सबसे बड़ी समस्या है, वह इस दृष्टि से है कि एक सामान्य व्यक्ति उस एआई से परिचित नहीं है, जिससे बाकी के वैज्ञानिक परिचित हैं। यदि किसी को इस बात का अंदाजा लगाना हो, अनुमान लगाना हो कि चुनौती कितनी भयावह है, तो जेफरी हिंटन को सुन करके देखिए। जिन्होंने एआई को जन्म दिया। जिस सुपर कंप्यूटर पर आज एआई अपने को प्रशिक्षित कर रहा है, उस सुपर कंप्यूटर की स्पीड 36.8 पेटाफ्लॉप्स है, जो कि मनुष्य के मस्तिष्क की तुलना में तीन गुना ज्यादा है । मनुष्य से एआई की जो स्पीड है, वह आज से 20 वर्ष के बाद वन बिलियन गुना ज्यादा होगी। एआई की चुनौतियां मानवता के हर पहलू को प्रभावित करेंगी।

बस्तर के लोग अब नक्सलवाद से मुक्ति चाहते हैं: सीएम साय

0

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को कहा कि बस्तर के लोग अब नक्सलवाद से मुक्ति चाहते हैं और विकास की मुख्यधारा से जुड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं। सीएम साय ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है, और यह बदलाव स्थायी होगा। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर पंडुम’ और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस जनभावना के प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया है। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बल के जवानों की मजबूत कार्रवाई के कारण निरंतर सफलता मिल रही है।

सीएम साय ने आशा जताई कि मां दंतेश्वरी की कृपा से यह संकल्प अवश्य पूरा होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर एक प्राकृतिक स्वर्ग है यहां अनेक जलप्रपात और अबूझमाड़ के घने जंगल हैं। यहां फिर से देश-दुनिया के पर्यटक आएँगे और बस्तर को उसका गौरवमय स्थान मिलेगा। बस्तर पंडुम में 47 हजार कलाकारों और बस्तर ओलंपिक में 1.65 लाख युवाओं की भागीदारी इस परिवर्तन की सबसे बड़ी गवाही है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर पंडुम’ ने प्रधानमंत्री मोदी जी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के सपने को साकार किया है। इस आयोजन में ओड़िशा, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे छह पड़ोसी राज्यों के 47 हजार कलाकारों ने भाग लिया। इस उत्सव में आदिवासी संस्कृति, वेशभूषा, खानपान और परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन हुआ।

नक्सली हिंसा छोड़ बस्तर की विकास यात्रा का हिस्सा बनें : अमित शाह

0

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नक्सलियों से हिंसा छोड़ने और बस्तर की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब कोई नक्सली मारा जाता है तो कोई भी खुश नहीं होता है। अमित शाह ने अगले वर्ष मार्च तक भारत से नक्सलवाद का सफाया होने का दावा करते हुए कहा कि अब नक्सली हथियारों के बल पर आदिवासियों के विकास को नहीं रोक सकते। शाह ने दंतेवाड़ा शहर में राज्य सरकार द्वारा आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अगले वर्ष यह कार्यक्रम राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश भर के आदिवासी भाग लेंगे।

शाह ने कहा, ”वे दिन चले गए जब यहां (बस्तर में) गोलियां चलती थीं और बम फटते थे। मैं उन सभी नक्सली भाइयों से अनुरोध करता हूं, जिनके हाथ में हथियार हैं और जिनके पास नहीं भी हैं, वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों। आप हमारे अपने लोग हैं। किसी नक्सली के मारे जाने पर कोई खुश नहीं होता।” उन्होंने कहा, ”इस क्षेत्र को विकास की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच वर्ष में बस्तर को वह सब कुछ देना चाहते हैं, जिसने 50 साल से विकास नहीं देखा। लेकिन यह कैसे हो सकता है? यह तभी हो सकता है जब बस्तर में शांति हो, बच्चे स्कूल जाएं, गांवों और तहसीलों में स्वास्थ्य सुविधाएं हों, हर किसी के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और स्वास्थ्य बीमा हो। यह तभी हो सकता है जब बस्तर के लोग तय करें कि वे अपने घरों और गांवों को नक्सल मुक्त बनाएंगे।

शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने घोषणा की है कि जो गांव नक्सलियों के आत्मसमर्पण में मदद करेंगे और खुद को माओवादी मुक्त घोषित करेंगे, उन्हें एक करोड़ रुपये (निर्माण कार्यों के लिए) दिए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री ने माओवादियों से हिंसा छोड़ने की अपील करते हुए कहा, ”कोई किसी को मारना नहीं चाहता। … बस अपने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं। भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार आपको पूरी सुरक्षा देगी। अब आप हथियार उठाकर अपने आदिवासी भाइयों और बहनों के विकास को नहीं रोक सकते। अपने हथियार छोड़ो और आत्मसमर्पण करो और विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनो।

शाह ने कहा, ”आज हम नक्सलवाद के खिलाफ दोनों तरफ से आगे बढ़ रहे हैं। जो समझ गए हैं कि विकास के लिए हाथ में बंदूक की जरूरत नहीं है, कंप्यूटर की जरूरत है। विकास के लिए आईईडी, हथगोला नहीं चाहिए कलम चाहिए उन्होंने सरेंडर कर दिये हैं। ” उन्होंने कहा, ”2025 में चौथे माह की शुरुआत तक 521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इससे पहले 881 नक्सली 2024 में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। जो आत्मसमर्पण करेंगे वह यहां मुख्यधारा में आएंगे और जो हथियार लेकर रहेंगे उनके खिलाफ सुरक्षाकर्मी मोर्चा संभालेंगे। जो भी होगा मार्च तक पूरे देश को इस लाल आतंक से मुक्त करने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार करेगी।” शाह ने कहा कि अगले वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर पंडुम का आयोजन किया जाएगा और वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुरोध करेंगे कि वे इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में शामिल हों तथा आदिवासी भाइयों और बहनों को आशीर्वाद दें।

वक्फ संशोधन विधेयक जनजातीय अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण: विष्णु देव साय

0

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के पारित होने पर बधाई दी है और कहा कि यह विधेयक जनजातीय अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। साय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ”वक्फ संशोधन विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने पर बधाई। यह विधेयक जनजातीय अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसमें यह प्रावधान किया गया है कि 5वीं और 6वीं अनुसूची के क्षेत्रों में किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित नहीं किया जा सकेगा। इससे आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगेगी और जनजातीय संस्कृति को संरक्षण मिलेगा।” मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, ”विधेयक पर विपक्ष ने लगातार मुस्लिम समुदाय को भ्रमित करने का प्रयास किया है। यह अत्यंत निंदनीय है। वास्तव में यह विधेयक किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय और समानता के मूल्यों को मजबूत करने वाला है। यह गरीब अल्पसंख्यकों के हित में है।” साय ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा, ”यह विधेयक भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। जिस प्रकार से इस विधेयक पर व्यापक चर्चा हुई है, वह हमारे संसदीय विमर्श की परिपक्वता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ”वक्फ कानून में संशोधन इसकी संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस विधेयक का उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार और न्यायिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।” बुधवार को लोकसभा में पास होने के बाद बृहस्पतिवार को राज्यसभा ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को लंबी चर्चा के बाद 95 के मुकाबले 128 मतों से मंजूरी दे दी। उच्च सदन में इन दोनों विधेयकों को देर रात दो बजकर 37 मिनट पर पारित किया गया।

वक्फ बिल मोदी सरकार की प्रतिबद्धता तो विपक्ष सिर्फ मुसलमानों को गुमराह कर रहा, BJP MP देवेंद्र सिंह भोले का बयान

0

कानपुर। वक्फ संशोधन विधेयक का कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने विरोध जताया तो वहीं भाजपा नीत एनडीए ने समर्थन किया। भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कहा, इस बिल के पास होने और फिर कानून बनने से गरीब मुस्लिमों को लाभ होगा। उन्होंने इसे गरीब मुसलमानों के उत्थान की दिशा में उठाया गया बेहद अहम क्रांतिकारी कदम करार दिया। उन्होंने वक्फ बिल को पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकेगा- भाजपा सांसद

सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने कहा, यह विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक संकल्प है. हमें वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना है। वक्फ में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी है। उन्होंने आगे कहा, वक्फ संपत्तियों के सही इस्तेमाल से करोड़ों की आय होगी, जिसका इस्तेमाल मुस्लिम समाज के विकास और उत्थान में किया जाएगा। भाजपा सांसद ने कहा, वक्फ संपत्तियों पर माफिया का कब्जा है। माफियाओं को ही इस बिल से परेशानी है. उन्होंने आगे कहा, यह नरेंद्र मोदी सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के सिद्धांत पर आधारित है।

विपक्ष गुमराह कर रहा-भाजपा सांसद

सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने आगे कहा, विपक्षी दलों ने जैसे 3 तलाक कानून, सीएए-एनआरसी को लेकर मुसलमानों को गुमराह किया, ठीक वैसे ही ये लोग इस बिल को लेकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं। विपक्षी दल मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझते हैं। मगर हमारी सरकार उन्हें विकास और उत्थान के रास्ते पर लाना चाहती है। उन्होंने कहा, ये बिल मुस्लिम महिलाओं और गरीबों को उनका हक दिलाने में भी मदद करेगा। यह संविधान के दायरे में रहकर किया गया एक साहसिक सुधार है, जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में फिर हाथी का हमला, महिला के बाद एक ग्रामीण की मौत

0

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में जंगली हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई है। पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना पस्ता थाना क्षेत्र के घाघरा गांव की है। उन्होंने बताया कि कोचली गांव निवासी दिनेश तीन अन्य ग्रामीणों के साथ धान और मक्का की फसल की रखवाली करने घाघरा गांव गए थे तभी हाथी ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि हमले के दौरान तीन अन्य ग्रामीण वहां से भाग गए, लेकिन दिनेश ऐसा नहीं कर पाए और हाथी ने उन्हें कुचलकर मार डाला। अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग के दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

उन्होंने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता दी गई है। बलरामपुर जिले में पिछले चार दिनों में जंगली हाथी के हमले में चार ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। सोमवार रात हाथी ने जिले के रामानुजगंज इलाके में एक महिला समेत दो लोगों को मार डाला था। वहीं बुधवार को हाथी ने शंकरगढ़ इलाके में एक महिला को कुचल दिया था जिससे उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में हाथियों की गतिविधि को देखते हुए आसपास के गावों में मुनादी कर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। छत्तीसगढ़ के उत्तरी इलाके के जिलों में जंगली हाथियों और मानव संघर्ष की लगातार खबरें आती रहती हैं।

नक्सलियों के साथ बिना शर्त शांति वार्ता के लिए तैयार है छत्तीसगढ़ सरकार : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

0

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह नक्सलियों के साथ बिना शर्त शांति वार्ता के लिए तैयार है। शर्मा का बयान ऐसे समय में आया है जब कथित तौर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने कुछ शर्तों के साथ ‘युद्ध विराम’ की घोषणा करने की इच्छा जताई है। माओवादियों की शर्तों में नक्सल विरोधी अभियान और सुरक्षाबलों के नए शिविर स्थापित करने से रोकना शामिल है। बुधवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित माओवादियों द्वारा जारी एक कथित बयान में माओवादियों ने केंद्र और राज्य सरकारों से शांति वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाने को कहा है।

माओवादियों की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय द्वारा 28 मार्च, 2025 को जारी किया गया यह कथित बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की छत्तीसगढ़ की निर्धारित यात्रा से दो दिन पहले सामने आया है। माओवादियों के कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह विभाग भी संभालने वाले शर्मा0 ने कहा, ”सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह नक्सलियों के साथ बिना शर्त शांति वार्ता के लिए तैयार है तथा राज्य सरकार ने एक आकर्षक आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति पेश की है।” उपमुख्यमंत्री ने कहा, ”उन्होंने (नक्सलियों ने) पहले भी इस बारे में (शांति वार्ता) कहा था, लेकिन कई नियम और शर्तें रखी थीं।

माओवादियों ने ऐसी शर्तें रखी थीं कि सुरक्षाबलों को छह महीने तक शिविरों में रहना चाहिए और सुरक्षाबलों के नए शिविर नहीं बनाए जाने चाहिए। ऐसी सभी मांगों का कोई मतलब नहीं है और उन पर विचार नहीं किया जा सकता। अब उन्होंने अपने पत्र (बयान) में कहा है कि वे युद्ध विराम की घोषणा करेंगे। युद्ध विराम का कोई मुद्दा नहीं है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि ऐसी शब्दावली के साथ बातचीत कैसे होगी।” उन्होंने कहा, ”मैं पहले भी कह चुका हूं और फिर कह रहा हूं कि राज्य और केंद्र सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहतीं और पुनर्वास नीति इसी उद्देश्य से लाई गई है। बहुत से लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्हें नीति का लाभ दिया जा रहा है। हम चाहते हैं कि नक्सली हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों और खुशहाल जीवन जिएं।

शर्मा ने कहा, ”हम चाहते हैं कि यह समस्या खत्म हो और बस्तर क्षेत्र के हर गांव में विकास हो।” उन्होंने कहा, ”वे कहते हैं कि यदि सरकार सुरक्षाबलों के शिविरों का विस्तार नहीं करती तो वे युद्ध विराम की घोषणा कर देंगे। क्या युद्ध की स्थिति है? अगर वे वास्तव में बिना किसी शर्त के शांति वार्ता चाहते हैं तो सरकार सौ बार तैयार है। अगर आप (नक्सली) शांति वार्ता चाहते हैं तो आपको एक व्यक्ति या समिति भेजनी चाहिए।” यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार शांति वार्ता के लिए समिति बनाएगी, शर्मा ने इनकार करते हुए कहा कि सरकार ने पहले भी ऐसी समितियां बनाई हैं, लेकिन अब वह ऐसा नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यदि नक्सली वास्तव में बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें कोई व्यक्ति या समिति भेजनी चाहिए। माओवादियों द्वारा मूल रूप से तेलुगु में जारी कथित प्रेस नोट में कहा गया है कि केंद्र सरकार और (नक्सली हिंसा के खतरे का सामना कर रही) राज्य सरकारों ने संयुक्त रूप से क्रांतिकारी आंदोलन के खिलाफ ‘कागर’ अभियान शुरू किया है।

प्रेस नोट में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में माओवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं और पिछले 15 महीनों में 400 से अधिक माओवादी मारे गए हैं। बयान में यह आरोप भी लगाया गया है कि कई नागरिकों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। बयान में कहा गया है, ”हम जनता के हित में शांति वार्ता के लिए हमेशा तैयार हैं। इसलिए इस मौके पर हम केंद्र और राज्य सरकार के सामने शांति वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल बनाने का प्रस्ताव रख रहे हैं। इसके लिए हमारा प्रस्ताव है कि केंद्र और राज्य सरकारें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गढ़चिरौली), ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में कागर के नाम पर की जा रही हत्याओं, नरसंहार को रोकें और सशस्त्र बलों के नए शिविरों की स्थापना को रोकें। यदि केंद्र और राज्य सरकारें इन प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देती हैं, तो हम तुरंत युद्धविराम की घोषणा कर देंगे।” माओवादियों ने बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों, छात्रों, आदिवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि वे सरकार पर शांति वार्ता शुरू करने के लिए दबाव डालें और वार्ता के लिए देशव्यापी अभियान चलाएं।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में जंगली हाथी के हमला, ग्रामीण महिला की मौत

0

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में जंगली हाथी के हमले में एक महिला की मौत हो गई। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि जिले के शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के अंतर्गत सिलियारीकोना गांव के जंगल में महुआ एकत्र करने गई महिला गिधि पहाड़ी कोरवा (54) को जंगली हाथी ने कुचल दिया। इस घटना में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। उन्होंने बताया कि जगिमा जोताड़ गांव की निवासी गिधि महुआ एकत्र करने सिलियारिकोना गांव के जंगल में गई थी। उन्होंने बताया कि आज सुबह छह बजे जब वह जंगल में थी तब एक जंगली हाथी ने उस पर हमला कर दिया।

हाथी ने महिला को कुचलकर मार डाला। अधिकारियों ने बताया कि महिला के साथ महुआ एकत्र करने गए अन्य लोगों ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल पहुंच गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अधिकारियों ने बताया कि मृतिका के परिजनों को तात्कालिक सहायता राशि 25 हजार रुपए प्रदान की गयी है।

शेष 5.75 लाख रुपये की राशि औपचारिकता पूरी करने के बाद दी जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि झारखंड से आए दो हाथियों ने मंगलवार को रामानुजगंज क्षेत्र में महिला सहित दो लोगों पर हमला किया था। इस हमले में दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद एक हाथी ने सिलियारिकोना के जंगल में महिला पर हमला किया है। उन्होंने बताया कि गांव में मुनादी कर ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की सलाह दी गई है।