छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : कोर्ट ने आबकारी अधिकारी त्रिपाठी समेत चार की ईडी हिरासत बढ़ाई

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने दो हजार करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाला मामले में आबकारी विभाग के एक अधिकारी समेत चार लोगों की ईडी की हिरासत 19 मई तक बढ़ा दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिवक्ता सौरभ पांडेय ने बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की अदालत ने राज्य के आबकारी विभाग के विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी, शराब कारोबारी अनवर ढेबर, नितेश पुरोहित और त्रिलोक सिंह ढिल्लों उर्फ पप्पू की ईडी हिरासत चार दिन के लिए बढ़ा दी है। पांडेय ने बताया कि हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद इन सभी को सोमवार को अदालत में पेश किया गया। ईडी ने इस मामले में सबसे पहले छह मई को रायपुर के महापौर और कांग्रेस नेता एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर को गिरफ्तार किया था।

रायपुर स्थित गिरिराज होटल के प्रवर्तक पुरोहित और शराब कारोबारी ढिल्लों को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था। त्रिपाठी को जांच एजेंसी ने 12 मई को गिरफ्तार किया था। उन्होंने बताया कि भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी त्रिपाठी आबकारी विभाग में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापित हैं और वे छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (जो राज्य में उपभोक्ताओं को सभी प्रकार की शराब, बीयर की खुदरा बिक्री का काम करता है) के प्रबंध निदेशक भी है। ईडी ने कहा है कि उसने आयकर विभाग की ओर से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी टुटेजा और अन्य के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र के आधार पर धनशोधन का एक मामला दर्ज किया था।

ईडी ने अदालत में कहा था कि एक सिंडिकेट द्वारा छत्तीसगढ़ में शराब के व्यापार में एक बड़ा घोटाला किया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस सिंडिकेट में राज्य सरकार के उच्च-स्तरीय अधिकारी, निजी व्यक्ति और राजनीति से जुड़े लोग शामिल थे, जिन्होंने 2019-22 के बीच दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार किया। जांच एजेंसी ने कहा था कि टुटेजा, अनवर के साथ सिंडिकेट के ”सरगना” थे और भ्रष्टाचार के पैसे का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए भी किया गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि सीएसएमसीएल (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य की इकाई) से खरीदे गए प्रति शराब पेटी के आधार पर रिश्वत एकत्र की गई थी। एजेंसी ने दावा किया है कि शराब बनाने वाली इकाईयों से रिश्वत ली गई ताकि उन्हें गुट बनाने और बाजार में निश्चित हिस्सेदारी रखने की अनुमति मिल सके।

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