कैसा था रूस-यूक्रेन वार? युद्ध के हालातों को बयां करती यूपी टू यूक्रेन पुस्तक रिलीज

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दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की किताब यूपी टू यूक्रेन का गुरुवार को विमोचन किया गया। ये किताब रूस यूक्रेन युद्ध की पहली आँखों देखी गवाही है। लेखक अभिषेक उपाध्याय देश के पहले पत्रकार थे जो इस युद्ध की कवरेज के लिए यूक्रेन पहुंचे थे। पुस्तक का विमोचन एबीपी न्यूज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संत प्रसाद राय और नेशनल बुक ट्रस्ट के डायरेक्टर युवराज मलिक के कर कमलों से हुआ। यश पब्लिकेशंस से प्रकाशित हुई इस किताब में खाड़ी युद्ध के करीब 30 साल बाद हुए इस सदी के उस पहले भयावह युद्ध का आंखों देखा ब्योरा है जिसने पूरी दुनिया को विश्व युद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया।

वर्तमान में एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर एडिटर पॉलिटिकल अफ़ेयर्स कार्यरत लेखक अभिषेक उपाध्याय ल़ड़ाई शुरू होने के दस दिन पहले ही यूक्रेन की राजधानी कीव में दाखिल हो चुके थे। इस किताब में लड़ाई के उन सबसे भयावह दिनों की दास्तां है जब यूक्रेन की राजधानी कीव चारों तरफ से रूसी टैंकों से घिरी हुई थी। यूक्रेन के खारकीव और डोनबास से लेकर ब्लैक सी के ओडेसा तक मिसाइलें आग उगल रहीं थीं। कीव के बूचा और इरपिन सामूहिक कब्रों के बोझ से चीत्कार कर रहे थे। इस किताब में लड़ाई के उन सबसे भयावह दिनों की लगभग हर महत्वपूर्ण फ्रंटलाइन की कहानी है। ये कहानी उन किरदारों के जरिए बयां की गई है जो वहां लेखक को मिले और जो यूक्रेन छोड़ने के बाद भी लेखक के भीतर रह गए!! इस किताब के विमोचन में न्यूज़ 24 के वरिष्ठ पत्रकार सचिन खरे का परिवार विशेष रूप से शामिल हुआ। सचिन खरे का कुछ ही दिनो पहले आसमयिक निधन हुआ है।

इस दौरान मौजूद एबीपी न्यूज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संत प्रसाद राय ने किताब के नाम पर रोशनी डालते हुए कहा कि किताब का नाम यूपी टू यूक्रेन इसलिए है क्योंकि ये कहानी यूपी के चुनावों से शुरू होती है। उन्होंने इस दौरान एक बड़ा फैसला लेते हुए यूपी चुनावों की कवरेज छोड़कर अभिषेक को विनाशक नज़र आते इस युद्ध के माहौल की कवरेज करने भेजा। युद्ध तब शुरू नही हुआ था, पर उसकी आहट एकदम स्पष्ट थी। ये एक बेहद कठिन फैसला था जिसे वक्त ने सही साबित किया। संत प्रसाद राय के मुताबिक अभिषेक और कैमरामैन चेतन ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर यूक्रेन युद्ध को कवर किया।कई कई बार उनके फोन नही लगते थे और तब सबकी जान सूख जाती थी। नेशनल बुक ट्रस्ट के डायरेक्टर युवराज मलिक ने लेखक के जज्बे की सराहना करते हुए इस किताब को वॉर रिपोर्टिंग के क्षेत्र में बेहद उपयोगी करार दिया। उन्होंने शस्त्र और शास्त्र दोनो के ही महत्व पर रोशनी डालते हुए लेखक को भयानक युद्ध के इन अनुभवों को किताब की शक्ल में ढालने के लिए धन्यवाद दिया।

इस दौरान मौजूद एबीपी न्यूज के एडिटर इनपुट इंद्रजीत राय ने युद्ध की विभीषिका को समझने और वॉर रिपोर्टिंग में इस किताब के महत्व का जिक्र किया। एबीपी न्यूज की सीनियर एंकर रूबिका लियाकत ने इस मौके पर कहा कि ये किताब भावनाओं से जन्मी है। ऐसी भावनाएँ जो युद्ध के मैदान मे्ं भी आपके भीतर के जज्बे और इंसानियत को ज़िंदा रखती हैं। रूबिका ने वॉर रिपोर्टिंग के ख़तरों के बीच हिम्मत के साथ काम करने के जज्बे और खबर पहुँचाने के जुनून का खासतौर पर जिक्र किया। अपनी जान की बाजी लगाकर कवर किया और भारत समेत पूरी दुनिया को युद्ध के कई पहलुओं से वाकिफ कराया। उन्होंने पाठक वर्ग के लिए कहा कि ये किताब निश्चित ही उन्हें युद्ध और रिपोर्टिंग को समझने के लिए एक प्रमाणिक दस्तावेज साबित होगी। कार्यक्रम का संचालन नंदिनी ने किया। इस दौरान यश पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक जतिन भारद्वाज की विशेष मौजूदगी रहे। कार्यक्रम के अंत में सिदार्थ शंकर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

लॉन्च से पहले ही रिकॉर्ड तोड़ बुकिंग

एमेजॉन पर लिस्टिंग के कुछ ही घंटों में इस पुस्तक की बुकिंग को लेकर पाठक वर्ग में होड़ मच गई। थोड़े ही समय में ये किताब अपनी कैटेगरी में पहले नंबर पर पहुंच गई।यही नहीं कई बार को बंपर बुकिंग के चलते एमेजॉन पर थोड़े थोड़े समय के लिए बुकिंग रोकनी भी पड़ी।

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