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छत्तीसगढ़ में किसानों से धान खरीदी की शुरूआत, जानें पहले दिन कितनी हुई खरीद

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत की गई। राज्य में पहले दिन 10 हजार 257 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में आज से धान खरीदी का काम शुरू हो गया। पहले दिन 775 उपार्जन केंद्रों द्वारा 10 हजार 257 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। पहले दिन तीन हजार 951 किसानों ने धान बेचा। उन्होंने बताया कि राज्य में शुरू की गई ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ से प्रति वर्ष धान खरीदी का नया रिकॉर्ड बन रहा है। इस साल भी फसल अच्छी होने से किसानों में उत्साह है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में आज से शुरू हुई धान खरीदी 31 जनवरी 2023 तक जारी रहेगी। इस वर्ष 110 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की तैयारी शासन द्वारा की गई है। इस वर्ष 2497 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। धान विक्रय के लिए 25 लाख 93 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। धान का कुल पंजीकृत रकबा 31.13 लाख हेक्टेयर है। इस वर्ष दो लाख तीन हजार नए किसानों ने पंजीकरण कराया है। पहले दिन के लिए 5341 टोकन जारी किए गए थे। पहले दिन के धान उपार्जन के लिए किसानों को भुगतान करने के लिए मार्कफेड द्वारा 279 करोड़ रुपए अपेक्स बैंक को जारी किए गए हैं।

उन्हेांने बताया कि राज्य में राजीव गांधी किसान न्याय योजना लागू होने के बाद प्रति वर्ष किसानों की संख्या और खेती के रकबे में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही प्रति वर्ष धान खरीदी का नया रिकार्ड भी बन रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में 97.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी, जो राज्य निर्माण के बाद से अब तक का एक रिकार्ड है। तब 21 लाख 77 हजार किसानों ने धान बेचा था। उन्हें 19038.04 करोड़ रुपए के समर्थन मूल्य का भुगतान किया गया था। इसके अलावा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत उन्हें इनपुट सब्सिडी का लाभ भी मिला है।

जो खुद को आधुनिक कहते हैं, वे ही प्रकृति के दुश्मन बने हैं: सीएम बघेल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आज विकास की हमारी सोच दो भागों में विभाजित हो चुकी है, एक सोच वह है जिसमें हमारे आदिम मूल्य आज भी कायम हैं जबकि दूसरी सोच वह है जो खुद को आधुनिक कहती है, लेकिन वह प्रकृति की दुश्मन बनी हुई है। बघेल ने यहां के शासकीय विज्ञान महाविद्यालय मैदान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव 2022 समारोह की शुरुआत की।

उन्होंने इस अवसर पर कहा, समय में आए बदलाव के साथ-साथ जीवन जीने के तरीकों में भी बदलाव आया है। आज विकास की हमारी सोच दो भागों में विभाजित हो चुकी है। एक सोच वह है जिसमें हमारे आदिम मूल्य आज भी कायम हैं। दूसरी सोच वह है जो खुद को आधुनिक कहती है, लेकिन वही प्रकृति की दुश्मन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि विकास की गलत अवधारणा के कारण आज प्रकृति ही खतरे में पड़ गई है और आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के अधिकारों पर भी खतरा बढ़ गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, मनुष्य का हृदय जब उल्लास से भर जाता है, तब उसका शरीर स्वयं ही थिरक उठता है। यही नृत्य है। बहुत प्राचीन समय में जब हमारे पुरखे जंगलों में रहा करते थे, तब उनका हर दिन जीवन के लिए संघर्ष का दिन हुआ करता था। वे हर दिन मिलजुल कर इस संघर्ष पर विजय प्राप्त करते थे। हर दिन अपने इस विजय का उत्सव मनाते थे। वही हमारा आदिम नृत्य था। बघेल ने कहा, इस बात पर बहुत आश्चर्य होता है कि दुनियाभर के आदिवासी नृत्यों की शैली, ताल, लय में बहुत समानताएं हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पूरी दुनिया के आदिवासियों का हृदय एक ही है। उन हृदयों के भाव एक ही हैं। उनके सपने, उनकी आशाएं और उनकी इच्छाएं एक ही हैं। आदिवासियों के ये सपने, उनकी आशाएं और उनकी इच्छाएं बहुत ही छोटी-छोटी हैं, लेकिन जीवन से सीधे जुड़ी हुई है। उनकी उन आशाओं का संबंध न सिर्फ उनके अपने जीवन से है, बल्कि पूरी मानवता से है।

उन्होंने इस नृत्य उत्सव का उद्देश्य ‘आदिवासियों की सदियों पुरानी परंपराओं और अधिकारों की रक्षा करना और इसे दुनिया भर में बढ़ावा देना’ बताते हुए कहा कि अगर हम पारंपरिक मूल्यों की रक्षा करेंगे तो एकजुटता और एकता भी कायम रहेगी। उन्होंने कहा कि विकास की वह सोच भी रहेगी, जो मानवता को बचाने के लिए जरूरी है। बघेल ने इस अवसर पर बताया कि इस वर्ष तीसरी बार इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमे 28 राज्यों, आठ केंद्र शासित प्रदेशों और 10 देशों – मोज़ाम्बिक, टोगो, ईजिप्ट, मंगोलिया, इंडोनेशिया, रूस, न्यूजीलैंड, सर्बिया, रवांडा और मालदीव के कलाकारों सहित लगभग 1500 देशी-विदेशी कलाकार शिरकत कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ का राज्य स्थापना दिवस है और यह छत्तीसगढ़िया लोगों के लिए बहुत बड़ा दिन है क्योंकि आज ही के दिन उनके पुरखों का संघर्ष सफल हुआ था। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। इधर राज्य के 42 आदिवासी समुदायों का संगठन छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज (सीएसएएस) ने कांग्रेस सरकार पर आदिवासियों के आरक्षण अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए नृत्य महोत्सव का बहिष्कार करने की घोषणा की है।

आदिम सांस्कृतिक मूल्यों को बचाए रखने से बनी रहेगी हमारी एकजुटता: सीएम भूपेश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि पूरी दुनिया के आदिम सांस्कृतिक मूल्यों को जब हम बचाए रखेंगे, तभी हमारी एकजुटता बची रहेगी और प्राकृतिक संतुलन के साथ विकास की अवधारणा साकार हो सकेगी। सीएम बघेल ने साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित भव्य समारोह में तीसरे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। उन्होंने दीप प्रजज्वलित कर एवं आदिवासी वाद्ययंत्र नगाड़ा बजाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

सीएम बघेल ने सभी राज्यों के नर्तक दल और विदेशी मेहमानों का हार्दिक स्वागत करते हुए प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस और तीसरे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की बधाई दी। स्वागत कार्यक्रम में देश के 28 राज्यों, 7 केन्द्र शासित प्रदेश सहित 10 देशों मोज़ाम्बिक, टोगो, ईजप्टि, मंगोलिया, इंडोनेशिया, रूस, न्यूजीलैंड, सर्बिया, रवांडा और मालदीव के कलाकारों ने आदिवासी नृत्य की झलक दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इस आयोजन में लगभग 1500 देशी-विदेशी कलाकार शिरकत कर रहे हैं।

सीएम बघेल ने कहा कि मनुष्य का इतिहास जितना पुराना है उतना ही पुराना नृत्य का इतिहास है। दुनियाभर के आदिवासियों की नृत्य शैली, वाद्ययंत्र में समानता है। यह अद्भुद संयोग है कि दुनियाभर के आदिवासी नृत्यों की शैली, ताल, लय में बहुत समानताएं हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पूरी दुनिया के आदिवासियों का हृदय एक ही है। उन हृदयों के भाव एक ही हैं। उनके सपने, उनकी आशाएं और उनकी इच्छाएं एक ही हैं। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का उद्देश्य आदिम संस्कृति को बचाये रखना है।

उन्होने कहा कि आज छत्तीसगढ़ का राज्य स्थापना दिवस है। आज हमारा विजय दिवस है, क्योंकि आज ही के दिन हमारे पुरखों का संघर्ष सफल हुआ था। हर बार 01 नवंबर को छत्तीसगढ़िया लोगों का दिल उल्लास से भरा होता है। उनका मन थिरक उठता है। राज्य स्थापना दिवस के साथ राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का यह स्वभाविक संगम है।उन्होने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और दुनिया भर के जनजातीय कलाकारों को धन्यवाद देते हुए कहा कि देश दुनिया के आदिवासी कलाकार हमारी खुशियों में शामिल होने आए हैं। वे हमारे साथ थिरक रहे हैं और अपनी सांस्कृतिक खूबसूरती के रंगों से हमारी संस्कृति को और भी सुंदर बना रहे हैं।

सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों को विदेश में प्रस्तुति का अवसर और मंच प्रदान करने के लिए राज्य सरकार और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद नई दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) के लिए सहमति बनी है जिससे आदिवासी संस्कृति के प्रसार और विनिमय का दायरा बढ़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हमें छत्तीसगढ़ की मूल संस्कृति, मूल विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए जनमत मिला था। राज्य सरकार छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़िया और छत्तीसगढ़ी की उन्नति के लिए बहुत बेहतर ढ़ंग से काम कर रही है। राज्य सरकार की योजनाओं से किसानों, गरीबों और पिछड़ों को न्याय मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए सभी को गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।

आदिवासियों को 32 प्रतिशत तक आरक्षण दिलाएगी छत्तीसगढ़ सरकार? सीएम भूपेश बघेल ने दिया भरोसा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी समाज को आश्वस्त किया हैं कि उनकी सरकार राज्य में आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए कृत संकल्पित है। सीएम बघेल ने अपने निवास कार्यालय में राज्यभर से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया। उन्होंने इस मौके पर आदिवासियों की मांग पर आवश्यक पहल करते हुए समस्त शासकीय विभागों में रोस्टर के नियमित रूप से पालन के संबंध में जांच के लिए प्रकोष्ठ के गठन की घोषणा की। साथ ही सहकारिता विभाग में हर समुदाय के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने भी आश्वस्त किया।

उन्होने आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए आगे कहा कि आदिवासियों के हित और उनके संरक्षण के लिए संविधान में जो अधिकार प्रदत्त है, उसका पालन के लिए हमारी सरकार पूरी तरह से सजग होकर कार्य कर रही है। हमारी स्पष्ट मंशा है कि संविधान द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग को प्रदान किए गए सभी अधिकारों का संरक्षण किया जाएगा। राज्य में आदिवासियों के हित को ध्यान में रखते हुए उनके 32 प्रतिशत आरक्षण के मामले में जो भी आवश्यक कदम होगा, वह उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए आवश्यक हुआ तो विधानसभा में विशेष सत्र बुलाएंगे और अध्यादेश भी लाएंगे। उन्होने कहा कि राज्य में आदिवासियों के उत्थान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इनमें उनके आर्थिक, शैक्षणिक सहित सामाजिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में घर बैठे बनेगा पांच साल तक के बच्चों का आधार कार्ड, राज्योत्सव पर सीएम बघेल का उपहार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री मितान योजना के तहत अब पांच वर्ष तक के बच्चों का आधार मितान द्वारा घर आकर बनाया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार टोल फ्री नंबर 14545 पर कॉल कर अपनी सुविधानुसार अप्वाइंटमेंट बुक किया जा सकता है। आवेदक द्वारा दी गई नियत तिथि एवं समय अनुसार मितान घर आकर बच्चों का आधार पंजीकरण करने आएंगे। पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण होने के कुछ ही दिनों में बच्चे का आधार आवेदक द्वारा दिए गए पते पर आ जाएगा।

मुख्यमंत्री मितान योजना के माध्यम से पांच वर्ष तक के बच्चों का आधार बनाने के लिए राशन कार्ड, सीजीएसएस/ स्टेट गवर्नमेंट/ ईसीएचएस/ ईएसआईसी /मेडिकल कार्ड, आर्मी कैंटीन कार्ड, पासपोर्ट, बर्थ सर्टिफिकेट, राज्य अथवा केंद्र सरकार द्वारा जारी परिवार से संबंधित दस्तावेज बच्चों के आधार पंजीकरण के समय माता, पिता मे से किसी एक का आधार नंबर एवं बायोमेट्रिक अनिवार्य होगा।

राष्ट्रीय आदिवासीय नृत्य महोत्सव 2022: लकड़ी और चमड़े से बने वाद्ययंत्रों के साथ मनमोहक प्रस्तुति देंगे घुडका जनजाति के कलाकार

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रायपुर। उड़ीसा की घुमंतु जनजाति लकड़ी और चमड़े से बने वाद्ययंत्रों के साथ मनमोहक प्रस्तुति देंगे। राजधानी रायपुर कें साइंस कॉलेज मैदान में एक नवंबर से शुरू हो रहा है। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में उड़ीसा के घुडका जनजाति के कलाकार पहली बार शामिल होने जा रहे हैं। ये कलाकार मुख्य मंच पर घबुकुडु नृत्य की प्रस्तुति देंगे। घबुकुडु नृत्य में लगभग 22 कलाकार अपने परंपरागत् परिधानों में सज-धजकर घुडका गीत गाते हुये नृत्य करते हैं। इस नृत्य में लकड़ी और चमड़े से बने वाद्य यंत्र घुडका का उपयोग किया जाता है। नृत्य में पुरूष और महिला दोनों शामिल होते है।

नृत्य समूह के मुखिया सुश्री रीमा बाघ ने बताया कि महिलायें कपटा (साड़ी), हाथों में भथरिया और बदरिया, गले में पैसामाली, भुजाओं में नागमोरी पहन कर नृत्य करती है। इसी प्रकार पुरुष लंगोट (धोती) और सिर में खजूर की पत्ती से बनी टोपी विशेष रूप से पहनते है। उन्होंने बताया कि घुडका जनजाति घुमन्तु प्रजाति है, इस नृत्य का प्रदर्शन वे जंगल से बाहर भ्रमण के दौरान आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। यह जनजाति भोजन से लेकर अन्य जरूरतों के लिए पूरी तरह वन संसाधनों पर निर्भर रहती है। ये अपने परंपरागत् देवी-देवाताओं में गहरी आस्था रखते हैं।

मंगोलिया के सांस्कृतिक दूत के रूप में महोत्सव में भाग लेना गर्व की बात

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रायपुर। मंगोलिया का नर्तक दल सोमवार को राजधानी रायपुर पहुंच गया है। यह दल स्थानीय साइंस कॉलेज मैदान में 01 से 03 नवंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में अपनी नृत्य शैली की छटा बिखेरेगा। टीम लीडर एंखबोल्ड टुमूरबातर ने बताया कि हम अपनी कला और संस्कृति से छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों एवं अन्य विदेशी मेहमानों के दिल में जरूर स्थान बनाने में सफल होंगे। इस महोत्सव में मंगोलिया के सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लेना हम सब के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि उनके दल में 10 सदस्य हैं जिसमें 5 महिलाएं और 5 पुरुष शामिल हैं।

मंगोलिया के नर्तक दल का स्वामी विवेकानंद विमानतल माना पहुंचने पर राज्य सरकार के अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। नर्तक दल के सदस्यों ने स्वागत से अभिभूत होकर कहा छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया। इस दौरान नर्तक दल ने नृत्य की मोहक झलक भी दिखाई। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में मोजाम्बिक, टोगो, मंगोलिया, रूस, इंडोनेशिया, सर्बिया, न्यूजीलैंड, इजिप्ट और मालदीव कलाकारों सहित देश के विभिन्न राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लगभग 15 सौ कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव : रायपुर पहुंचा सर्बिया, इंडोनेशिया और मालदीव का नृतक दल

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यूरोप के सर्बिया और एशिया से मालदीव और इंडोनेशिया के नृतक दल राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने आज राजधानी रायपुर पहुंचे। विभागीय अधिकारी कर्मचारियों ने माना विमानतल पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया। नृतक दलों में गजब का उत्साह देखने को मिला और इस उत्साह के साथ ही उन्होंने अपने अपने अपने देश की संस्कृति की झलक एयरपोर्ट पर नृत्य करके भी प्रदर्शित की। नर्तक दलों ने छत्तीसगढ़ सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल से उन्हें सांस्कृतिक अदान प्रदान में शामिल होने का अच्छा अवसर मिल रहा है तथा छत्तीसगढ़ की संस्कृति के साथ साथ विभिन्न देश की संस्कृति से नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल के जरिए अवगत हो पाएंगे।
इसके पश्चात उन्होंने छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया का नारा का उदघोष किया।

उल्लेखनीय है कि सरबिया मालदीव और इंडोनेशिया से आए सभी नृतक दलों में 10-10 सदस्य हैं।सर्बिया से आए नृतक दल में 6 पुरुष और 4 महिला,मालदीव से आए दल में 10 पुरुष एवम इंडोनेशिया के दल में 5 पुरुष और 5 महिला सदस्य शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 1 नवंबर से 3 नवंबर तक राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य एवं राज्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है , जिसमे देश के विभिन्न राज्यों के साथ साथ 9 विदेशी टीम भी शिरकत कर रही है।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव: कई विभागों के लगेंगे स्टाल, देश-विदेश से भी आएंगे मेहमान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का साइंस कॉलेज मैदान एक बार फिर से राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव के लिए तैयार हो रहा है। 01 से 03 नवंबर तक आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव के लिए तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। यहां मुख्य मंच पर राज्योत्सव और राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के कार्यक्रम होंगे। वहीं साइंस कॉलेज मैदान में विभिन्न शासकीय विभागों के स्टॉल और व्यावसायिक स्टॉल लगेंगे तो दूसरी ओर फूड जोन भी बनाया जा रहा है। स्टॉल निर्माण की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से कलाकार पहुंचने लगे हैं।

गौरतलब है कि 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से पृथक कर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया है। राज्य गठन को 22 वर्ष पूर्ण होने को है। प्रति वर्ष की तरह इस बार भी भव्य स्तर पर राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में तीसरी बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन हो रहा है। इस बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में भारत के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों समेत नौ देशों मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के 1500 जनजातीय कलाकार शामिल होंगे, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश-विदेश की विभिन्न जनजातियों की विविधतापूर्ण संस्कृति, परंपरा और लोककला देखने को मिलेगी।

राज्योत्सव के मौके पर साइंस कॉलेज मैदान में विकास प्रदर्शनी भी लगायी जा रही है। विकास प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ की विकास गाथा की झांकी के साथ ही पिछले पौने चार वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए लागू योजनाओं और किए गए कार्यों की झलक देखने को मिलेगी। इस दौरान राज्य शासन के 21 विभागों के स्टॉल, शिल्पग्राम में 40 स्टॉल, फूड जोन में 24 स्टॉल, थीम हैंगर में विभिन्न उद्योगों और सार्वजनिक उपक्रमों के स्टॉल, 40 व्यावसायिक स्टॉल बनाए जा रहे हैं। शिल्पग्राम और फूड जोन भी उनके आकर्षण का केंद्र होंगे।

एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के विकल्प तलाशें विभाग और उद्योग : छत्तीसगढ़ सरकार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के उद्योगों और सरकारी विभागों से एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक का उपयोग बंद करने और इसके विकल्प खोजने को कहा है। जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि इन निर्देशों के मुताबिक विभिन्न कार्यालय प्रमुखों से सरकारी कार्यालयों को एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक से मुक्त करवाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। इसके लिए अधिकारियों से देश के अन्य राज्यों में लागू किए जा रहे सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीके अपनाने को कहा गया है।

एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए गठित कार्यबल के साथ राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने हाल ही में एक बैठक की थी। इसमें उन्होंने केंद्र से मिले दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन का निर्देश दिया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों को ऐसे उद्योगों की सूची बनाने का निर्देश दिया गया है जो एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक से संबंधित नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।