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मोदी सरकार पर फिर बरसे छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, बोले-केन्द्रीय एजेन्सियों के साथ ही केन्द्रीय बलों का भी कर रही दुरुपयोग

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मोदी सरकार पर केन्द्रीय एजेन्सयों के साथ ही केन्द्रीय सुरक्षा बलो के भी दुरूपयोग का आरोप लगाया हैं। सीएम बघेल ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मोदी सरकार ईडी,सीबीआई एवं आयकर जैसी एजेन्सियों का अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ दुरूपयोग कर ही रही थी अब उसने केन्द्रीय सुरक्षा बलों का भी दुरूपयोग करना शुरू कर दिया हैं।

केन्द्रीय एजेन्सियां छापे की कार्रवाई में केन्द्रीय बलों को बगैर राज्य सरकार की सहमति के लेकर पहुंच रही है।यह सब केवल विपक्षी दलों की जहां राज्य सरकारे हैं वहीं पर हो रहा हैं। उन्होने कहा कि कानून व्यवस्था का मसला राज्यों का हैं। केन्द्रीय एजेन्सियां और केन्द्रीय बल कहीं पर कार्रवाई कर रहे है तो एकतरफा नही बल्कि राज्य सरकारों के साथ समन्वय से होना चाहिए। उन्होंने केन्द्रीय बलों के इस्तेमाल के लिए कानून में परिवर्तन के गृह मंत्री के चिंतन शिविर में संकेत के बारे में पूछे जाने पर कहा कि क्या मसौदा है बगैर उसे जाने टप्पिणी करना उचित नही है।

सीएम बघेल ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कई नई परिभाषाएं गढ़ी गई है जैसे कि यदि कोई भाजपा के खिलाफ हैं तो वह धर्मद्रोही और अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ है तो वह राष्ट्रद्रोही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में काम करने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता सुधा भारद्धाज के खिलाफ कार्रवाई बड़ा उदाहरण है।

युवाओं को रोजगार आधारित निशुल्क कौशल प्रशिक्षण देने पर छत्तीसगढ़ को मिला स्कॉच सिल्वर अवार्ड-2022

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रायपुर। देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्य का गौरव हासिल करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर आज एक और गौरवपूर्ण सम्मान से नवाजा गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना को गुणवत्तायुक्त एवं रोजगार आधारित निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के स्कॉच सिल्वर अवार्ड-2022 से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल एवं उच्च शिक्षा मंत्री तथा कौशल विकास मंत्री श्री उमेश पटेल ने छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है।

कौशल विकास मंत्री श्री उमेश पटेल के कुशल मार्गदर्शन युवाओं को बेहतर कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त हो, इसके लिए कौशल विकास प्राधिकरण के द्वारा युवाओं को उनकी रुचि अनुसार गुणवतायुक्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पाकर युवा लगातार सरकारी और गैर सरकारी विभागों में नौकरी पाने के साथ ही स्वरोजगार को अपना रहे हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत योजना के तहत अब तक 4 लाख 68 हजार 184 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 2 लाख 55 हजार 678 युवाओं को नियोजित किया गया है, वर्तमान में 2726 युवा प्रशिक्षणरत हैं।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2022: छत्तीसगढ़ में फिर बिखरेगी आदिवासी संस्कृति की छटा

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रायपुर। एक नवंबर से शुरू होने वाले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2022 को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान पर हो रहे इस आयोजन में एक बार फिर आदिवासी संस्कृति की छटा देखने को मिलेगी। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ी संस्कृति सभ्यता और लोक कला को बढ़ावा देने के साथ ही आदिम संस्कृति एवं कला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास निरंतर जारी है। इसी कड़ी का हिस्सा छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव भी है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का यह तीसरा आयोजन है, जिसमें छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी आदिवासी समुदाय के लोग अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति की छटा बिखेरने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जुटते हैं। इस बार यह आयोजन राज्योत्सव के साथ ही 1 से 3 नवंबर तक राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में किया जा रहा है। इस बार भी अनेक आदिवासी समूह अपनी पहचान के पर्याय और विशेष अवसरों पर प्रदर्शित किए जाने वाले आदिवासी लोक नृत्यों को लेकर पहुंचेंगे।

दंडामी माड़िया नृत्य – छत्तीसगढ़: बस्तर के दंडामी माड़िया नृत्य को गौर माड़िया नृत्य के नाम से जाना जाता है। इस नृत्य में युवक अपने सिर पर गौर नामक पशु के सींग से बना मुकुट, कोकोटा पहनते हैं, जो कौड़ियों और कलगी से सजा रहता है। युवकों के साथ नृत्य करने वाली युवतियां अपने सिर पर पीतल का मुकुट (टिगे) पहनती हैं और हाथ में लोहे की सरिया से बनी एक छड़ी, गूजरी बड़गी रखती हैं, जिसके ऊपर घुंघरू लगे रहते हैं, जिसे जमीन पर पटकते हुए आकर्षक ध्वनि उत्पन्न करती है।

माओ पाटा नृत्य – छत्तीसगढ़: बस्तर के मुरिया जनजाति में अनेक प्रदर्शनकारी कलाएं प्रचलित हैं, जो अत्यंत मनोरम तथा लयात्मकता से परिपूर्ण हैं। माओ पाटा मुरिया जनजाति का एक ऐसा ही नृत्य है, जिसमें नाटक के भी लगभग सभी तत्व विद्यमान हैं। इस नृत्य को गौर मार नृत्य भी कहा जाता है। माओ पाटा का आयोजन घोटुल के प्रांगण में किया जाता है, जिसमें युवक और युवतियां सम्मिलित होते हैं। नर्तक विशाल आकार के ढोल बजाते हुए घोटुल में प्रवेश करते हैं। इस नृत्य में गौर पशु है तथा पाटा का अभिप्राय कहानी है, जिसमें गौर के पारंपरिक शिकार को प्रदर्शित किया जाता है। पोत से बनी सुंदर माला, कौड़ी और भृंगराज पक्षी के पंख की कलगी जिसे जेलिंग कहा जाता है, युवक अपने सिर पर सजाए रहते हैं और युवतियां पोत और धातुई आभूषण कंघियां और कौड़ी से श्रृंगार किए हुए रहती हैं। एक व्यक्ति गौर पशु का स्वांग लिए रहता है, जिसका नृत्य के दौरान शिकार किया जाता है।

हुलकी नृत्य – छत्तीसगढ़: हुलकी नृत्य बस्तर के कोंडागांव और नारायणपुर जिले में निवास करने वाली मुरिया जनजाति का पारंपरिक नृत्य है। इसमें स्त्री-पुरूष दोनों ही सम्मिलित होते हैं। हुलकी नृत्य के बारे में यह मान्यता है कि यह नृत्य आदि देवता लिंगोपेन को समर्पित है। इस नृत्य में सवाल-जवाब की शैली में गीत गाये जाते हैं, जिसमें दैवीय मान्यताओं, किंवदतियों एवं नृत्य की अवधारणाओं से संबंधित प्रसंग पर सवाल-जवाब होते हैं। इस नृत्य का मुख्य वाद्य यंत्र डहकी पर्राय है, जिसका वादन पुरूष नर्तक करते हैं और महिलाएं चिटकुलिंग का वादन करती है। इस नृत्य में इसके अलावा कोई और वाद्य यंत्र निषिद्ध है। पारंपरिक रूप से हुलकी नृत्य का आरंभ हरियाली त्यौहार के बाद युवागृह से प्रारंभ होता है जो क्वांर महीने तक चलता है।

छाऊ नृत्य – झारखण्ड: छाऊ नृत्य भारत के तीन पूर्वी राज्यों में लोक और जनजातीय कलाकारों द्वारा किया जाने वाला एक लोकप्रिय नृत्य रूप है, जिसमें मार्शल आर्ट और करतबों की भरमार रहा करती है। छाऊ नृत्य का नामकरण संबंधित क्षेत्र के आधार पर किया जाता है। पश्चिम बंगाल में पुरूलिया छाऊ, झारखंड में सराइकेला छाऊ और ओडिशा में मयूरभंज छाऊ। इसमें से पहले दो प्रकार के छाऊ नृत्यों में प्रस्तुति के अवसर पर मुखौटों का उपयोग किया जाता है, जबकि तीसरे प्रकार के मयूरभंज छाऊ में मुखौटे का प्रयोग नहीं होता है। इस नृत्य में रामायण, महाभारत और पुराण की कथाओं को कलाकारों द्वारा मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। इसमें गायन और संगीत का प्रमुख स्थ्ज्ञान है, किन्तु प्रस्तुति के समय लगातार चल रही वाद्य संगीत की विशेषता प्रधान रहती है। नृत्य में प्रत्येक विषय की शुरूआत नृत्य एक छोटे से गीत से होती है, जिसमें उस विषय वस्तु का परिचय होता है। छाऊ नृत्य केवल पुरूष कलाकारों द्वारा ही किया जाता है। छाऊ ने अपने कथावस्तु, कलाकारों की ओजस्विता, चपलता और संगीत के आधार पर न सिर्फ भारतवर्ष वरन विदेश में भी अपनी खास पहचान बनाई है।

पाइका नृत्य – झारखण्ड: मुंडा झारखंड की एक प्रमुख जनजाति है। मुंडा जनजाति झारखंड के अतिरिक्त पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और असम में भी निवास करती है। वर्तमान में मुख्यतः कृषि पर आधारित जीविकोपार्जन करने वाले मुण्डा लोगों को प्रदर्शनकारी कलाओं में पाइका नृत्य का विशेष स्थान है। पाइका युद्ध कला से संबंधित नृत्य है जिसे मुण्डा, उरांव, खड़िया आदि आदिवासी समाजों के नर्तकों द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में केवल पुरूष ही हिस्सा लेते हैं। नर्तक योद्धाओं के पोषाक धारण करते हैं और अपने हाथों में ढाल, तलवार आदि अस्त्र लिए रहते हैं। नृत्य के अवसर पर प्रयोग होने वाले वाद्य ढाक, नगाड़ा, शहनाई, मदनभैरी आदि है। पाइका नृत्य विवाह उत्सवों के साथ ही अतिथि सत्कार के लिए सामान्यतः किया जाता है।

दमकच नृत्य – झारखण्ड: दमकच झारखंड राज्य के आदिवासी और लोक समाजों का एक लोकप्रिय नृत्य है। यह नृत्य मुख्यतः विवाह के अवसर पर किया जाने वाला नृत्य है जिसमें महिलाएं और पुरूष दोनों ही सम्मिलित होते हैं। पुरूष वर्ग इस नृत्य में गायक वादक और नर्तक के रूप में महिलाओं का साथ देते हैं। इस नृत्य में कन्या और वर को भी पारंपरिक रूप से सम्मिलित किया जाता है। दमकच नृत्य में उपयोग किए जाने वाले वाद्य में ढोल, नगाड़ा, ढाक, मांदर, बांसुरी, शहनाई और झांझ आदि सम्मिलित है। यह नृत्य कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के देवउठनी एकादशी से शुरू होकर आषाढ़ मास के रथयात्रा तक किया जाता है।

बाघरूम्बा नृत्य – असम: बाघरूम्बा असम की बोडो जनजाति का एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय नृत्य है। बोडो असम का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है, जो वहां की कुल जनजातीय जनसंख्या का लगभग 40 प्रतिशत है। बोडो जनजाति की ज्ञान परंपराओं में अनेक सर्जनात्मक और प्रस्तुतिकारी कलाएं सम्मिलित हैं, जिनमें बाघरूम्बा नृत्य का उल्लेखनीय स्थान है। बाघरूम्बा नृत्य महिलाओं द्वारा त्यौहारों के परिधान धारण करती है। इस नृत्य में ढोल जिसे स्थानीय भाषा में खाम कहा जाता है, प्रमुख वाद्य है, जिसे सिफुंग अर्थात् बांसुरी और बांस में बने गोंगवना और थरका आदि वाद्यों के साथ बजाया जाता है। बोडो लोगों का प्रकृति प्रेम इस नृत्य में भी मुखरित होता है, जिसे इस नृत्य में पेड़, पौधे, पशु, पक्षी, तितली, बहती हुई नदी की धारा, वायु आदि को दर्शाती नृत्य रचनाओं में देखा जा सकता है।

मरयूराट्टम नृत्य – केरल: मरयूराट्टम केरल की माविलन जनजाति का एक नृत्य है, जिसे केरल और तमिलनाडू के सीमा क्षेत्र में स्थित मरायूर नामक स्थान में निवास करने वाली माविलन जनजाति के लोगों के द्वारा किया जाता है। मरायूर केरल के पल्ल्ककाड़ जिले में स्थित है, जहां इस नृत्य को मुख्यतः विवाह समारोहों और उत्सवों के अवसर पर किया जाता है। इस नृत्य में स्त्री और पुरूष दोनों ही सम्मिलित होते हैं।

नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर की मांग को लेकर बघेल ने की सीएम केजरीवाल की खिंचाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारतीय नोटों पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की तस्वीर की मांग वाले बयान को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आलोचना की और उनके बयान को वोट बटोरने की रणनीति बताया। बघेल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में केजरीवाल पर वोट के लिए चुनाव के दौरान भावनात्मक कार्ड खेलने का भी आरोप लगाया। बघेल से जब केजरीवाल के बयान के बारे में पूछा गया तब उन्होंने कहा, अलग-अलग समय पर भारत सरकार तय करती है कि नोटों और सिक्कों पर किसकी फोटो लगेगी। लेकिन अभी वोट की खातिर केजरीवाल जी ने यह शिगूफा छोड़ा है।

उन्होंने कहा, मैं कल समाचार देख रहा था। उन्होंने जिन महापुरूषों की तस्वीरें लगायी थीं और प्रेस से चर्चा कर रहे थे, उनमें एक तरफ अंबेडकर जी थे और एक तरफ सरदार भगत सिंह जी थे। यदि दोनों जीवित होते तो क्या तब केजरीवाल जी दोनों महापुरुषों के समक्ष यह बात कह पाते। क्या (उनका यह बयान) उनके विचारों से यह अभिप्रेरित है। क्या उन महापुरूषों की विचारधारा यही थी। उन्होंने कहा कि केजरीवाल जी को जब चुनाव लड़ना होता है तब वह भावनात्मक कार्ड खेलते हैं, इससे वह वोट बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। बघेल ने कहा, उन्होंने (केजरीवाल) कहा था कि वह यमुना नदी को साफ करेंगे और उन्होंने पत्रकारों से भी कहा था कि वे इसमें डुबकी लगा सकेंगे, लेकिन क्या हुआ? बघेल ने कहा, वह जो कहते हैं वह करते नहीं है।

उन्होंने गांधी जी को अपने कार्यालयों से पहले हटाया। अब वह जाकर साबरमती में चरखा चलाने लगे। अब लक्ष्मी जी और गणेश जी का पैर पकड़कर वैतरणी पार करना चाहते हैं। किसकी तस्वीर लगेगी नोटों पर या ​सिक्कों पर या नोट किस रंग के होंगे यह सब आरबीआई और भारत सरकार द्वारा तय किया जाता है। केजरीवाल ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा था कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के लगातार कमजोर होने के कारण देश नाजुक स्थिति से गुजर रहा है। उन्होंने दावा किया था कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए देश को बहुत सारे प्रयास करने के साथ ही ‘हमारे देवी-देवताओं के आशीर्वाद की भी जरूरत है। केजरीवाल ने कहा था, आज मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि हमारे नोटों पर एक तरफ महात्मा गांधी की तस्वीर है। यह जिस स्थिति में है, वैसी ही रहनी चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ भगवान गणेश और लक्ष्मी के चित्र छपे होने चाहिए।

छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर एक नवंबर को रहेगा अवकाश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य स्थापना दिवस एक नवम्बर पर अवकाश घोषित किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार एक नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस पर राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों, संस्थाओं के लिए एक दिवस का स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। एक नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश को विभाजित छत्तीसगढ़ का गठन किया गया था तभी से एक नवम्बर को प्रति वर्ष राज्योत्सव मनाया जाता हैं।

सीएम बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को मिल रही है अंतर्राष्ट्रीय पहचान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। 42 तरह की जनजातियां प्रदेश में निवास करती हैं। इन सभी जनजातियों के अपने-अपने तीज-त्यौहार हैं, अपनी-अपनी संस्कृति है, अपनी-अपनी कला परंपराएं हैं। इन्हीं सबसे मिलकर छत्तीसगढ़ राज्य की सुंदर संस्कृति और परंपराओं का निर्माण होता है। छत्तीसगढ़ में जनजातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 31 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इसी कड़ी में राज्य में तीसरी बार आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल के रूप में एक बहुत महत्वपूर्ण परंपरा की शुरुआत छत्तीसगढ़ में की गई है। यह प्रयास न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि देश और पूरी दुनिया के जन-जातीय समुदायों के आपसी मेलजोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध साबित हो रहा है।

इस आयोजन में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय कलाकारों की टीमों के साथ-साथ 09 देशों के जनजातीय कलाकारों की टीमें भी शामिल हो रही हैं। इस वर्ष यह आयोजन 01 नवंबर से शुरू हो रहा है। यह छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की तारीख भी है। रायपुर में राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव का आयोजन तीन दिनों तक किया जाएगा। इस आयोजन में 1500 जनजातीय कलाकार शामिल होंगे। इनमें से 1400 कलाकार भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हैं, और 100 कलाकार विदेशों के होंगे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का यह तीसरा आयोजन है। पिछले वर्ष इस आयोजन में 12 देशों ने रुचि ली थी, जिनमें से 07 ने इसमें हिस्सा लिया था। इस साल 26 देशों ने रुचि प्रदर्शित की है, इनमें से 09 देश इस महोत्सव में शामिल होने जा रहे हैं। इस आयोजन में मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे।

नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल में दो कैटेगिरी में प्रतियोगिताएं होंगी। विजेताओं को कुल 20 लाख रुपए के पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। प्रथम स्थान के लिए 05 लाख रुपए, द्वितीय स्थान के लिए 03 लाख रुपए और तृतीय स्थान के लिए 02 लाख रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। 01 नवंबर को सुबह नृत्य महोत्सव का शुभारंभ होगा और शाम को राज्योत्सव के अवसर पर राज्य अलंकरण दिया जाएगा। 03 नवंबर को नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल का समापन होगा। इस महोत्सव के माध्यम से न केवल राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय कलाकारों के बीच उनकी कलाओं की साझेदारी होगी, बल्कि वे एक-दूसरे के खान-पान, रीति-रिवाज, शिल्प-शैली को भी देख-समझ सकेंगे। महोत्सव के दौरान संगोष्ठियां भी होंगी, जिनमें जनजातीय विकास के बारे में विमर्श होगा। जाने-माने विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे।

राज्योत्सव एवं आदिवासी नृत्व महोत्सव की तैयारियों का सीएम भूपेश बघेल ने लिया जायजा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के 23वें स्थापना दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं। रायपुर में एक से तीन नवंबर तक होने वाला यह राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित किया जाएगा। गुरुवार की शाम सीएम भूपेश बघेल महोत्सव की तैयारियों का जायजा लेने के पहुंचे। मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ शासन के सभी विभागों द्वारा लगाए जाने वाले स्टालों के स्थल का भी निरीक्षण किया और विभागीय अधिकारियों को तैयारियों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।

गौरतलब है कि 1 से 3 नवंबर तक आयोजित राज्योत्सव एवं राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव को भव्य रूप से मनाने की तैयारी की जा रही है और इसके लिए साइंस कालेज मैदान में तैयारियां जोरों पर हैं। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के लिए सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों सहित 09 देशों के 1500 आदिवासी कलाकार अपनी प्रस्तुति देने के लिए छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। इस अवसर पर सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना बनी नजीर, ग्रामीणों को मिला रोजगार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना देश-दुनिया के लिए नजीर बन गई है। देश के कृषि क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना को एक सफल और मजबूत योजना के रूप में सराहा जा रहा है। गांव-गांव में की जा रही गोबर खरीदी और जैविक खाद के सतत निर्माण एवं उपयोग से राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। गोधन न्याय योजना की शुरुआत जिन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए की गई थी, इस योजना ने उन सभी लक्ष्यों में बहुत कम समय में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की है। यह योजना गांवों में खुशहाली का सबब बन गई है। छत्तीसगढ़ का गौरव बन चुकी गोधन न्याय योजना की देशभर में सराहना हो रही है। पार्लियामेंट की स्थाई कृषि समिति ने छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना की तारीफ करने के साथ ही इसे पूरे देश में लागू करने की सिफारिश की है।

गोधन न्याय योजना के तहत बीते सवा दो सालों में 87.28 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी पशुपालकों ग्रामीणों एवं किसानों से की गई है, जिससे जैविक खाद सहित अन्य सामग्री का निर्माण महिला स्व-सहायता समूह द्वारा गौठानों में अनवरत रूप से किया जा रहा है। गोबर खरीदी के एवज में अब तक 174.56 करोड़ रूपए का भुगतान गोबर विक्रेताओं को किया जा चुका है। क्रय किए गए गोबर से गौठानों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा लगभग 24 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट एवं सुपर कम्पोस्ट प्लस का निर्माण किया गया है। जिसमें से 20 लाख क्विंटल कम्पोस्ट खाद का उपयोग किसानों ने अपने खेतों में किया है। इससे राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है।

छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना की शुरूआत 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन से हुई थी। इस योजना के तहत मार्च 2021 यानी 9 माह में 45.81 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हुई, जिसका उपयोग वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए क्रमिक रूप से किया गया। वर्ष 2021-22 में 21.28 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी राज्य में हुई। योजना केे सत्त अनुश्रवण एवं विधिवत पोर्टल निर्माण एवं इंद्राज से पंजीकृत गोबर विक्रेताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2020-21 में पंजीकृत विक्रेताओं की संख्या 2,45,831 से बढ़कर वर्ष 2021-22 में 3,12,647 हुई तथा गोबर विक्रेताओं को सीधे लाभ पहुंचा है। सत्त अनुश्रवण एवं गोबर विक्रेताओं की निगरानी से गोठानों में गोबर विक्रेताओं की संख्या वर्ष 2022-23 में बढ़कर 2,93,496 हो चुकी है एवं सत्त गोबर की खरीदी हो रही है। चालू वर्ष में प्रथम छह माह में 21.81 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है जिसकी मात्रा वर्षान्त तक दोगुना होने की उम्मीद है।

गोधन न्याय मिशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि राज्य में गोबर की खरीदी पूरी पादर्शिता के साथ की जा रही है। क्रय किए गए गोबर के सुरक्षित रख-रखाव की भी व्यवस्था गौठानों में की गई है। प्रदेश के बीजापुर जिले में 2 हजार क्विंटल गोबर बह जाने की जानकारी मिली है। गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन की सतत मॉनिटरिंग किए जाने के साथ ही शिकायतों का तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। बिलासपुर एवं धमतरी जिले में योजना से संबंधित शिकायत का निराकरण कर लिया गया है। दो बैल रखने वाले किसानों से 6400 क्विंटल गोबर बेचने, पडोसी इलाको से गोबर खरीदी एवं बिना गोबर खरीदी के लाखों रूपये का भुगतान का मामला तथ्यहीन है।

अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2020-21 में जिला-गरियाबंद में 1,14,603 क्विंटल गोबर खरीदी की गई तथा 77,147 क्विंटल गोबर का उपयोग खाद बनाने हेतु किया गया है। इसी प्रकार जिला-सूरजपुर एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में क्रमशः 93,870 क्विंटल एवं 1,19,024 क्विंटल गोबर खरीदी की गई तथा 68,524 क्विं. एवं 46,384 क्विं. गोबर का उपयोग खाद बनाने हेतु किया गया है। वर्मी कम्पोस्ट निर्माण एक सत्त प्रक्रिया है गोठानांे में गोबर क्रय की मात्रा एवं कम्पोस्ट उत्पादन की मात्रा व रूपांतरण मौसम के आधार पर प्रभावित होता है। गोबर क्रय एवं कम्पोस्ट का उत्पादन गोठानों में निर्मित वर्मी टांका के आधार पर ही होता है। सरगुजा जिले में अब तक 1,38,384 क्विंटल गोबर महिला स्व-सहायता समूहो को वर्मी खाद निर्माण हेतु उपलब्ध कराया गया है। जिससे 57,248 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण हो चुका है जो कि 41 प्रतिशत है। इसी प्रकार बस्तर जिले में 82,876 क्विंटल गोबर से 39,377 क्विंटल वर्मी तथा बीजापुर में 38,811 क्विंटल गोबर से 18468 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कराया गया जो कि लगभग 48 प्रतिशत है।

गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 356.14 करोड़ का भुगतान

गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में अब तक गोबर विक्रेता पशुपालक किसानों सहित गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 356 करोड 14 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है, जिसमें 18 करोड़ रूपए की बोनस राशि भी शामिल है। गोधन न्याय योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के गौठानों में 2 रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। गौठानों में 15 अक्टूबर तक खरीदे गए 87.28 लाख क्विंटल गोबर के एवज में गोबर विक्रेताओं को 174.56 करोड़ रूपए का भुगतान भी किया जा चुका है। गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 159.41 करोड़ रूपए राशि की भुगतान किया जा चुका है। गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को 163.58 करोड़ लाभांश राशि का वितरण किया गया है। स्वावलंबी गौठानों में स्वयं की राशि से 21.78 करोड़ रूपए का गोबर क्रय किया है।

गौठानों में 70,889 लीटर गोमूत्र की खरीदी

14.75 लाख रूपए का बिक चुका ब्रम्हास्त्र और जीवामृत अभी राज्य के 78 गौठानों में 4 रूपए लीटर की दर से गोमूत्र की खरीदी की जा रही है। गौठानों में अब तक 70 हजार 889 लीटर क्रय किए गए गौमूत्र से 24,547 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और 16,722 लीटर जीवामृत तैयार किया गया है, जिसमें से 34,085 लीटर ब्रम्हास्त्र और जीवमृत की बिक्री से 14.75 लाख रूपए की आय हुई है।

गोबर से 24 लाख कम्पोस्ट खाद का उत्पादन-समूहों को 81.84 करोड़ की आय

गौठानों में महिला समूहों द्वारा 18.61 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तथा 5.37 लाख क्विंटल से अधिक सुपर कम्पोस्ट एवं 18,924 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस खाद का निर्माण किया जा चुका है, जिसे सोसायटियों के माध्यम से क्रमशः 10 रूपए, 6 रूपए तथा 6.50 रूपए प्रतिकिलो की दर पर विक्रय किया जा रहा है। महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-कास्ट, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर रही हैं। गौठानों में महिला समूहों द्वारा इसके अलावा सब्जी एवं मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन एवं पशुपालन के साथ-साथ अन्य आय मूलक विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे महिला समूहों को अब तक 84.55 करोड़ रूपए की आय हो चुकी हैं। राज्य में गौठानों से 11,187 महिला स्व-सहायता समूह सीधे जुड़े हैं, जिनकी सदस्य संख्या 83,874 है। गौठानों में क्रय गोबर से विद्युत उत्पादन की शुरुआत की जा चुकी है।

गोधन न्याय से 2.93 लाख ग्रामीण पशुपालक लाभान्वित

राज्य में गोधन के संरक्षण और संर्वधन के लिए गांवों में गौठानों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। गौठानों में पशुधन देख-रेख, उपचार एवं चारे-पानी का निःशुल्क बेहतर प्रबंध है। राज्य में अब तक 10,624 गांवों में गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 8408 गौठान निर्मित एवं 1758 गौठान निर्माणाधीन है। गोधन न्याय योजना से 2 लाख 93 हजार से अधिक ग्रामीण, पशुपालक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। गोबर बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने वालों में 46 प्रतिशत महिलाएं है।

छत्तीसगढ़ में फल विक्रेता ने घर में फहराया पाकिस्तानी झंडा, गिरफ्तार

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पुलिस ने एक फल विक्रेता को पाकिस्तानी झंडा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले के सरिया थाना क्षेत्र में पाकिस्तानी झंडा फहराने के आरोप में फल विक्रेता मुश्ताक खान (52) को गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस को मंगलवार शाम शिकायत मिली थी कि खान ने अटल चौक स्थित अपने घर में पाकिस्तानी झंडा फहराया हुआ है।

उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद खान के घर पहुंची पुलिस ने झंडा को उतारकर जब्त कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-153(क) के तहत सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का मामला दर्ज किया गया है। उसे गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस बीच, घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सरिया थाने के बाहर प्रदर्शन किया और खान के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की।

छत्तीसगढ़ में ईडी छापा: आईएएस अधिकारी समेत तीन लोग न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापों के बाद गिरफ्तार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी समीर विश्नोई सहित तीन लोगों को ईडी की विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अधिवक्ताओं ने बताया कि 13 अक्टूबर को गिरफ्तार आईएएस अधिकारी विश्नोई, इंदरमणि समूह के कारोबारी सुनील अग्रवाल और फरार कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के चाचा लक्ष्मीकांत तिवारी की हिरासत अवधि पूरी होने पर ईडी ने आज उन्हें विशेष अदालत के चतुर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत के समक्ष पेश किया जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इससे पहले अदालत ने तीनों को आठ और छह दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा था।

लक्ष्मीकांत तिवारी के अधिवक्ता फैजल रिजवी ने बताया कि अदालत ने आईएएस अधिकारी समेत तीनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन्हें 10 नवंबर को अदालत में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि ईडी ने 11 अक्टूबर से राज्य के रायपुर, रायगढ़, महासमुंद और कोरबा समेत कई शहरों में छापेमारी शुरू की और 13 अक्टूबर को आईएएस अधिकारी विश्नोई, कारोबारी अग्रवाल और लक्ष्मीकांत तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के मुताबिक तीनों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2009 बैच के अधिकारी विश्नोई छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसाइटी के सीईओ के रूप में कार्यरत थे। वहीं तिवारी पेशे से अधिवक्ता हैं। ईडी के सूत्रों ने बताया कि एजेंसी की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में ट्रांसपोर्टरों से कुछ व्यवसासियों और लोगों द्वारा कथित अवैध कमीशन के धन शोधन से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी ने आईएएस अधिकारी और रायगढ़ की जिलाधिकारी रानू साहू के आवास और कार्यालय में भी छानबीन की थी। ईडी के सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने खनन विभाग के निदेशक आईएएस अधिकारी जेपी मौर्य के परिसरों परभीछापा मारा था। मौर्य, रानू साहू के पति हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने 14 अक्टूबर को दावा किया था कि छत्तीसगढ़ में कोयला ढुलाई में “बड़े पैमाने पर घोटाला” हो रहा है, जिसके तहत नेताओं, अधिकारियों और अन्य लोगों का एक समूह कथित तौर पर “अवैध कर वसूली की समानांतर प्रणाली” चला कर प्रतिदिन लगभग 2-3 करोड़ रुपये अर्जित कर रहा है। इससे पहले सितंबर में आयकर विभाग ने राज्य में इस्पात और कोयला व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों के परिसरों पर छापा मारा था। वहीं, इस साल जून-जुलाई में आयकर विभाग ने कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में कोयला व्यापारी सूर्यकांत तिवारी के परिसरों और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में तैनात एक अधिकारी के घर समेत कई जगहों की तलाशी ली थी।