पीएससी चयन सूची को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

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छत्तीसगढ़ में राज्य लोक सेवा आयोग की चयन सूची को लेकर सत्ताधारी दल कांग्रेस और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने हैं। भाजपा ने इस मामले में अनियमितता का आरोप लगाया है वहीं कांग्रेस ने कहा है कि पीएससी चयन पर सवाल उठाना भाजपा की हताशा और निराशा का प्रमाण है। भाजपा ने राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा हाल ही में घोषित चयन सूची को लेकर सवाल उठाया है। पार्टी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने 18 मई को लोक सेवा आयोग के दफ्तर का घेराव करने का फैसला किया है। भाजपा ने बुधवार को पीएससी चयन सूची को लेकर कहा कि अधिकारियों, नेताओं और व्यापारियों के रिश्तेदारों का चयन राज्य पीएससी में हुआ है, जो संदेहास्पद है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कहा कि पीएससी की घोषित चयन सूची को लेकर राज्य के युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएससी की चयन सूची को देखकर स्पष्ट हो गया है कि यह छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभाओं के साथ सीधी-सीधी धोखाधड़ी है, छल है, अन्याय है। साव ने कहा कि रात-दिन पुरुषार्थ करने वाले राज्य के युवा अपने उज्ज्वल भविष्य की रचना कर जीवन को संवारने के लिए परिश्रम करते हैं, उन्हें प्रदेश सरकार ने ठेंगा दिखाने का काम किया है। उन्होंने कहा, राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति के साथ जो छल किया है, वह बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर भाजयुमो 18 मई को लोक सेवा आयोग का घेराव करेगा और युवाओं के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करेगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चयन सूची को देखकर युवाओं में जिस प्रकार से आक्रोश पनपा है, जिस प्रकार से लोक सेवा आयोग की विश्वसनीयता पर परीक्षार्थी युवाओं ने शंका व्यक्त की है, राज्य सरकार उस पर जवाब दे। भाजपा नेताओं के आरोप को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक एजेंसी है, यह एक स्वायत्तशासी संस्था है। उन्होंने कहा कि भर्ती, परीक्षा और चयन प्रक्रिया में राज्य सरकार का सीधे तौर पर कोई हस्तक्षेप नहीं रहा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं, केंद्रीय जांच एजेंसियों और राजभवन तक का राजनीतिक उपयोग करना भारतीय जनता पार्टी का चरित्र है। वर्मा ने कहा कि किसी अधिकारी या नेता का परिजन होना या उनका रिश्तेदार होना ना कोई अपराध है और ना ही भर्ती में अपात्रता है। उन्होंने कहा, ”पीएससी में यह नियम है कि ऐसे प्रतिभागी जिनके परिजन पदाधिकारी हैं तब, ऐसे पदाधिकारी उस इंटरव्यू बोर्ड में नहीं बैठ सकते जिसमें उनके परिजन या कोई निकट संबंधी अभ्यर्थी के रूप में शामिल हो रहा हो। वर्तमान सरकार के दौरान की गई सभी भर्तियों में इस नियम का पालन हुआ है। 170 में से अधिकांश बच्चे सामान्य परिवारों से सेलेक्ट हुए हैं। उन्होंने कहा कि पीएससी चयन पर सवाल उठाना भाजपा के हताशा और निराशा का प्रमाण है।

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